J.M.Rangila from Nawadih, Bokaro called to share with the listeners of JMR a gazal which he recited rather then singing it.
बोकारो: नावाडीह से जे.एम. रंगीला और वासुदेव तुरी ने संयुक्त रूप से नावाडीह प्रखंड में महिला सशक्तिकरण की दिशा में कार्य कर रही संस्था आदर्श ग्राम विकास सेवा समिति के सचिव वासुदेव शर्मा से बातचीत की जिसमे उन्होंने बताया कि यह संस्था पुनर रूप से महिलाओं को सशक्त करने का काम कर रहे हैं. महिला समूह को चलने के लिए महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जाता है. उन्होंने बताया कि आज इस संस्था के द्वारा ४०० महिला समूहों का गठन किया जा चूका है. महिलाओं को साबुन, अगरबती, मसरूम आदि जैसे उत्पाद बनाने के लिए भी प्रशिक्षण दिया जाता है. पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि नावाडीह प्रखंड एक उग्रवादी प्रभावित क्षेत्र है इसके बाद भी यह संस्था यहाँ के महिलाओं को आगे लेन हेतू महिला समूह गठन किया और उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है. यह संस्था पंचायती राज में महिलाओं जागरूक करने में भी अहम् भूमिका निभा रही है.उन्होंने कहा कि पंचायत चुनाव होने से महिलाओं को आगे आने में मदद मिला हैं. जो महिलाएं घर से नही निकलती थी आज वे ही महिलाएं पंचायतों में कई तरह की समस्याओं का निपटारा कर रही है. गाँव के विकास के सरकार द्वारा बनाई जाने वाली योजनाओं में अपनी भागीदारी निभा रही हैं. और इन क्षेत्रों में महिलाओं को खुलकर आगे लेन में यह इस संस्था का बड़ा हांथ है.
बोकारो: नावाडीह, बोकारो से वासुदेव तुरी ने समाज में आज के समय में महिलाओं कि स्थित के बारे में कहते हैं कि महिलाए किसी भी क्षेत्र में पुरुषो से पीछे नही है वे हर संभव पुरुषो के साथ- साथ कदम से कदम मिलाकर चलने का प्रयास कर रही हैं. वे हिन्दू समाज के रुढ़िवादी पम्परा से बाहर निकलने का प्रयास कर रही है जो उनके विकास में सबसे बड़ी बाधा है. महिलाए अब नारी मुक्ति के बाद महिला सशक्तिकरण के नारे को वास्तविक अर्थ समझ कर उसे व्यावहारिकता में डालने की कोशिश कर रही हैं.वे कहते हैं कि महिलाएं आरक्षण के कारण स्थानीय सत्ता तक तो पहुँच गई हैं लेकिन लेकिन आज भी वे अपने से निर्णय नही ले पाती हैं.महिलाए पंचायत प्रतिनिधि चुने जाने बाद भी सहभागिता के दृष्टी से हासिये पर हैं.
बोकारो: नावाडीह, बोकारो से शोभा कुमारी ने झारखण्ड मोबाइल वाणी पर भारत देश के सम्बन्ध में एक निबंध प्रस्तुत किया है.
J M Rangeela called from Bokaro to report about the Women's Day function to be organized by Mahila Ekta Manch in Chandrapura welfare Centre on the 8th of March. In a special interview for JMR, Mahila Ekta Manch spokesperson Leena Devi revealed that Shri Puspa Kumari, Chandrapura Women welfare society president will be present as the chief guest on the occasion with other active members of the society.
J M Rangeela from Nawadih, Bokaro called to inform the listeners of JMR about the preparation for Women's Day celebration on 8th March by Adarsh Gram Bikash Samity in Nawadih block office. Samity spokesperson Wazbir Sharma said to JMR that Bokaro Zila Parishad president Munir Singh Chaudhury, with MLA Jagannath Mahto will be the chief guest along with many other recognized personalities in the forthcoming event.
नावाडीह बोकारो से वासुदेव तुरी ने झारखण्ड मोबाइल वाणी पे अपने विचार रखे और हमें बताया की महिला ससक्तिकरण के सपने देखने से नहीं बल्कि उन्हें हकीकत में अपनाना होगा आज भी बेटो की चाह में बेटियों की बलि चड़ा रहे है बेटियों को गर्भ में ही मार दिया जा रहा है. आज हम भले ही इकीसवी सदी में पहुँच गए है पर विचार पुराने ही है, हमें अपनी सोच बदलनी होगी और कन्या भूर्ण हत्या को रोकना होगा जिससे समाज का सही रूप में विकास हो सके.
बोकारो नवाडीह से महावीर प्रसाद ने झारखण्ड मोबाइल वाणी को बताया की आठ मार्च को महिला दिवस मनाने की तैयारी देश एवं राज्यों में की जा रही है, महिलाओं की सुरक्षा से ज्यादा उनका साथ पाने की जरुरत है आज हमारे देश में महिलाओ की सुरक्षा सम्बन्धी कानून बनाने की जोरदार मुहीम छिड़ी है यह तो ठीक है जिन पर अत्याचार हुए है उमके साथ कोई खड़ा नहीं होता अगर कोई महिला अपने ऊपर आत्याचार को लेकर खड़ी होती है दोषियों को सजा दिलाने के लिए कड़ी होती है तो उसका साथ कोई नहीं देता अकेली महिला कुछ नहीं कर सकती है यह मुमकिन है की महिलायों को सुरक्षा देने से ये समस्या काम हो जाएगी जब तक की उनका साथ कोई नहीं देता ऐसा नहीं हो सकता अगर हम चाहते है की नारियो को सम्मान मिले तो हमें सबसे पहले हमें अपनी सोच में बदलाव लाना होगा उन्हें हर क्षेत्र में खुले दिल से मदद करनी होगी तभी आधी आबादी को अपनी पहचान मिल पायेगी नारी सशक्तिकरण के नारे लगाने से जयादा जरुरी है नारियो का साथ देना तभी हमारा समाज आगे बढ़ सकता हमारा देश एवं राज्य विकाश कर सकता है वह चाहे आर्थिक क्षेत्र सामाजिक क्षेत्र हो खुल कर उनका साथ देना चहिये
बोकारो के भंडारीदाह से जे. एम्. रंगीला ने बताया की, प्रबंधन की लापरवाही की वजह से सेल के SRU यूनिट के मजदूर विगत दो माह से काम के अभाव में बेकार बैठे हुए है. स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड के SRU यूनिट के भंद्रिका के गैस प्लांट के लोडिंग सेक्शन व चेकिंग आदि विभागों में 200 ठेका मजदूर काम करते है, परन्तु प्लांट में कोयले की कमी तथा रॉ मटेरियल की कमी की वजह से सारे उद्योग दो माह से बंद पड़े है, वही इन् विभागों में कार्यरत 200 ठेका मजदूर बेकार हो गए है, रिसैक्रिक सिरामिक मजदूर कांग्रेस इटक के बदलाव शाखा के सचिव सहनाज तुरी ने झारखण्ड मोबाइल रेडियो को बताया की स्थानीय प्रबंधन की लापरवाही से यह स्थिति उत्पन हुई है, इस सबंध में सेल SRU यूनिट के GM एस. के. मोहंती ने झारखण्ड मोबाइल वाणी को बताया की राज्य प्रदुषण नियंत्रण बोर्ड की अनुमति लेन की वजह से यह स्थिति उत्पन हुई है. प्रदुषण बोर्ड ने अस्थाई तौर पर एक माह की अनुमति प्रदान की है एक सप्ताह के अन्दर कोयले की आपूर्ति शुरु हो जाएगी वही रॉ मटेरियल के सबंध में श्री मोहंती ने कहा की रॉ मटेरियल हम बालूमाथ तथा हजारीबाग से मंगाते थे वह खदान लीज नवीनीकरण में विलंबता के कारण यहाँ रॉ मटेरियल की आपूर्ति बाधित है अर्थात् इनके कथन से भी प्रमाणित होता है की प्रबंधन ज्यादा लापरवाह है, यह प्लांट वर्षों से चल रहा है तो प्रश्न उठता है की आज तक प्रबंधन ने अनुमति क्यों नहीं ली, झारखण्ड राज्य प्रदुषण बोर्ड का गठन हुए एक दशक से ज्यादा गुजर गया है इन्हें अस्थाई अनुमति प्रदुषण बोर्ड से मिली है. इससे यह साफ़ प्रतीत होता है की सेल के अधिकारियों को मजदूरो की रोजी रोटी से कोई मतलब नहीं है
Vasudev Turi from Nawadih, Bokaro called to inform the listeners of JMR about women's social status on 21st century. He commented that 21st century is termed as the age of women's empowerment but there are still many loopholes in our society that needs amendment for realizing this dream. Apart from aiding industrialization and economic growth, urbanization, cultural liberalization, the government also needs to focus on all round development of woman, making her free from the evils of social insecurity, gender disparity, female foeticide etc. so that her identity remains sustainable.
