जिले की चनपटिया प्रखंड क्षेत्र से डाँन बास्को टेक सोसायटी द्वारा चयनित 05 छात्र होटल मैनेजमेंट एवं 10 छात्र नर्सिंग कोर्स में प्रशिक्षण हेतु पटना के लिए प्रस्थान किये। प्रखंड कार्यक्रम समन्वयक(जीविका)चनपटिया ने बताया कि ये सभी 15 छात्र दलित समुदाय से है। इनका चयन सीएलसीडीसी कार्यक्रम के माध्यम से तैयार कर रोजगार प्राप्त करने के लिए प्रशिक्षण हेतु भेजा जा रहा है। आगे भी जीविका की प्रयास है कि छात्रों को तैयार विभिन्न प्रशिक्षण में भेजा जाय। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

जब शिविर में अड़सठ युवाओं का चयन किया गया, जब निजी क्षेत्र की कंपनी ने जिला योजना कार्यालय सभागार में शिविर का आयोजन किया, तो एक सौ आठ मैट्रिक और इंटर पास युवाओं का भी संसाधन व्यक्ति के पद पर नियुक्ति के लिए चयन किया गया।

जिले के ख्याति प्राप्त थरूहट क्षेत्र में यूँ ही पहले ही गरीबी, बेरोजगारी, पलायन, अशिक्षा यानी बेहतर सुविधाओं का घोर आभाव रहा है। हाल के दिनों में कुछ बदलाव व सुधार की झलक दिखने के साथ ही थरूहट के अधिकांश युवा अब आधुनिकता के दौर में नशे का शिकार होते जा रहे है।

जे,पी,एस,सी, की गड़बड़ी में छात्रों ने महाघेराव की चेतावनी दी है 1 अप्रैल को लाखों अभ्यर्थी करेंगे जे,पी,एस,सी,का महाघेराव विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

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एकमा/सारण।एकमा प्रखंड के कर्णपुरा आमडाढी और मुबारकपुर के बीच फाइनल क्रिकेट मैच का आयोजन किया गया।आयोजित क्रिकेट मैच का उद्घाटन राष्ट्रीय एथलीट विकास सिंह द्वारा फीता काटकर तथा खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर किया।आयोजित इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय एथलीट विकास सिंह ने इस फाइनल मैच में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया।इसके साथ ही विकास सिंह ने मंच से बताया की ऐसे कमजोर बच्चे जो आर्थिक स्थिति के कारण पढ़ने में असमर्थ हो हम उसके लिए हमेशा तत्पर रहेंगे और बेहतर से बेहतर मदद करेंगे।उन्हों ने आगे कहा कि पढ़ाई के साथ खेलकूद बहुत जरूरी है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस तरह के टूर्नामेंट का आयोजन होने से युवाओं को अपने प्रतिभा को दिखाने का अवसर मिलता है।आज कल खास करके क्रिकेट के तरफ युवाओं का काफी झुकाव हो रहा है। मौके पर पृथ्वी कुमार, नितेश कुमार सिंह, अजय सोनी, मिठ्ठू सिंह सहित दर्जनों लोग उपस्थित रहे।

नूह जिले में 12 वर्षों से प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसमे प्रत्येक वर्ष 100 बच्चों को 4 माह का प्रशिक्षण दिया जाता है

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नागपुर महाराष्ट्र से आदर्श मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे कि एक व्यक्ति अपने ज्ञान के लिए सोशल मीडिया का भी उपयोग करता है , लेकिन उसके साथ उल्टा होता है । और ऐसी बीमारी उत्पन्न होती है कि इस बीमारी का निदान करने वाले डॉक्टर भी गायब हो जाते हैं , यानी उन्हें नहीं पता कि कौन सी बीमारी है और कौन सी बीमारी है । यह बीमारी कायरों की तरह छिपी हुई है , कोई जानकारी सामने नहीं आती है , यह सोशल मीडिया ज्ञान के लिए नहीं बल्कि लोगों में मानसिकता पैदा करने के लिए बनाया गया है , चाहे वह फेसबुक हो या वॉट्सऐप । इंस्टाग्राम या तार या किसी भी तरह का कोई भी ऐप , मुझे नहीं लगता कि कोई मानवीय प्रगति हुई है । मनुष्य प्रगति के चक्र में फँसा हुआ है । चौबीस घंटे महिलाएं । सोशल मीडिया वॉट्सऐप पर लगा हुआ है , जो उनके दिमाग में आया , उन्हें नहीं पता , उन्हें अपने बच्चों के साथ - साथ अपने परिवार की भी परवाह नहीं है , वे सारा दिन और हर समय अपने मोबाइल फोन में बिताते हैं । चाहे वह शिक्षा हो , किस तरह के उपाय किए जाने चाहिए , इसलिए चौबीस घंटे अपना सारा समय मोबाइल फोन में अपने परिवार को अलग - थलग करके बिता रहे हैं और हमारे देश में यह काम इतनी बार क्यों हो रहा है ।

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