उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से शालिनी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि इन्हे मोबाइल वाणी के कार्यक्रम से जानकारी मिली कि महिलाओं को जमीन में मालिकाना हक़ मिलना चाहिए क्योंकि अगर महिला के पास उनके नाम की जमीन होगी तो वो अपना और अपने परिवार का अच्छे से ध्यान रख पाएगी। जानकारी से बातों को समझने के बाद शालीनी ने जमीन में हिस्सा लेने के बारे में अपने पति और अपने ससुर से बात किया। जिस पर ससुर ने कहा कि शालिनी को ससुराल में क्या कमी हो गयी है। आज तक परिवार में किसी महिला के नाम जमीन नहीं है। ये सुनने के बाद शालिनी ने कहा कि जब सरकार कानून बना चुकी है कि जमीन में जितना पुरुषों का हिस्सा है उतना ही महिलाओं का भी हिस्सा मिलना चाहिए तो इन्हे भी जमीन मिलना चाहिए। और अगर ससुराल में इन्हे जमीन में हिस्सा नहीं दिया जाएगा तो ये अदालत जा कर कानून का साथ लेगी। जिसके बाद इनके पति और ससुर ने आपस में बातचीत कर सलाह मशवरा किया कि आजतक परिवार में आदलत का कोई मुद्दा नहीं आया है। अगर शालिनी अदालत जाती है तो परिवार की बदनामी होगी। इस कारण ससुराल के जमीन में शालिनी को भी इनका हिस्सा मिल गया। कुछ दिन के बाद ससुर का देहांत हो गया और पति ने भी साथ छोड़ दिया। लेकिन शालिनी को इस बात की कोई चिंता नहीं हुई क्योंकि शालिनी को उनके जमीन में मालिकाना हक़ मिल गया था। अब जमीन में ही वो खेती बाड़ी का कार्य कर जीविका चला रही है।
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उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला के श्रीदत्तगंज प्रखंड के गोमढ़ि से 25 वर्षीय क्रांति मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि महिलाओं के नाम जमीन होनी चाहिए
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार 2024 में वैश्विक स्तर पर महिलाओं के अधिकारों में गिरावट देखी गई है। जहाँ कई समाजों के समान अधिकारों को कम किया जा रहा है। इन अधिकारों को उल्लंघन होने पर राष्ट्रीय महिला आयोग या स्थानीय पुलिस 1091 या 112 पे सहायता ली जा सकती है
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय के पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है।असाधारण परस्थिति में ऐसा हो एकता है और गिरफ्तारी के समय महिला कंस्टेबल की उपस्थिति अनिवार्य है।जरूरतमंद महिलाओं को मुफ्त क़ानूनी सलाह और सहायता पाने का अधिकार है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि समानता का अधिकार अनुच्छेद चौदह कानून के समक्ष समानता और अनुच्छेद पंद्रह लिंग के आधार पर भेदभाव को रोकता है और गरिमा के साथ जीने का अधिकार संविधान का अनुच्छेद 21 के तहत हर महिला को समान और भय मुक्त जीवन जीने का अधिकार है
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उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से स्नेहा मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि इन्होने मोबाइल वाणी के कार्यक्रम के माध्यम से सुना कि जमीन चाहे पिता के द्वारा दी गयी हो या पति के द्वारा दी गई हो ,महिलाओं के पास भी खुद की जमीन होनी चाहिए जिससे उनका वर्चस्व बना रहे। जिसके बाद इन्होने अपने पति से अपने खुद के नाम जमीन खरीद देने की बात कही। इनके पति ने उस वक़्त कहा कि इन्हे अभी जमीन की आवश्यकता क्यों है,इस पर स्नेहा ने उन्हें समझाया कि अभी नहीं तो भविष्य में जमीन की आवश्यकता पड़ सकती है। स्नेहा के पति प्राइवेट स्कूल में शिक्षक है। उनके चार भाई है। इनके पास एंटी पैतृक संपत्ति नहीं कि चारों भाई का भरण पोषण हो पाए। जिसके बाद स्नेहा के पति ने लोन लेकर स्नेहा के नाम जमीन खरीद दिया। कुछ समय अच्छा से बीता ,फिर उसके बाद अचानक स्नेहा के पति का देहांत हो गया। देहांत के बाद स्नेहा के अपने परिजन भी उनका साथ नहीं दिए। जिसके बाद स्नेहा ने अपने पति के बीमा के पैसे से अपने नाम की जमीन में चार कमरे बनवाया। सारे कमरे में उन्होंने किराया लगाया है। आज के समय में वही किराया का पैसा से इनका और इनके बच्चों का भरण पोषण हो रहा है। जमीन ही इनका रोज़ी रोटी का साधन बन गया है। स्नेहा मोबाइल वाणी को धन्यवाद देना चाहती है कि इन्हे जानकारी मिली कि महिलाओं के पास अपनी खुद की जमीन होनी चाहिए
उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला के श्रीदत्तगंज प्रखंड के सोनपुर से 25 वर्षीय सनी कुमार जैसवाल मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि गाँव की जमीन महिलाओं के नाम होनी चाहिए।
