उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि जब किसी महिला के नाम जमीन होती है तो वो सिर्फ प्रॉपर्टी नहीं होती उसकी पहचान होती है। वो किसी पर निर्भर नहीं होती जमीन का अधिकार महिला को मजबूत बनाता है। फाइनेंशियली भी और मेंटली भी। ये सिर्फ कहने की बात नहीं है की उसे जमीन दे दिया अब उसके पास एक तरीके से स्टेबिलिटी होगी। जमीन मिल जाने के बाद आपके पास एक अचल संपत्ति हो जाती है। जो भविष्य में आपके काम आ सकती है। आप खेती करवा कर अनाज उगा सकते हैं या फिर अगर आपको पैसे की कमी हो रही है, तो आप उसको बेच के पैसे भी पा सकते हैं। दूसरी बात ये की जब आपके पास एक ऐसी संपत्ति होती है, जिससे आपको पता है की मदद मिल सकती है भविष्य में तो इंसान खुद को सिक्योर महसूस करता है सुरक्षित महसूस करता है। इसलिए महिलाओं के पास भी जमीन होना बहुत जरूरी है। ये इंसान के साहस को बढ़ाता है जीवन जीने की शैली को बदल देता है। जब भी दो इंसान जिसके अंदर बहुत साहस आत्मविश्वास है उसके जीवन जीने का तरीका बहुत अलग होता है और एक इंसान जिसे पता है उसको दूसरों पर निर्भर रहना है उसके पास कोई ऐसी संपत्ति नहीं है जो आगे जाके उसकी मदद कर सके तो उसे दब के रहना पड़ता है। जिससे अत्याचार भी बढ़ते है। तो अपने सोच को बदलें और महिलाओं को भूमि का हिस्सा बनाये

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि लोग अक्सर कहते है महिलाओं को जमीन का अधिकार नहीं होता पर सच ये है की हिंदू सक्सेेशन एक्ट के हिसाब से जो की हमारे देश में एक कानून है। उसके हिसब से बेटी को भी बेटा जितना हक मिलता है। पर कानून कागज पर नहीं जमीन पर होता है, सोच में होता है। यानी की कानून बन तो गया है, पर उसे लागू करने के लिए उसे एक्ट में लाने के लिए लोगों का भी उस पर काम करना जरुरी है। अगर लोग कचहरी जा कर बेटियों का नाम लिखवाएगे ही नहीं तो कानून बनने से क्या फायदा है। जमीन पर उनके लिए कोई काम किया ही नहीं जाता है। क्योंकि महिलाओं को अधिकार लेना सिखाया ही नहीं गया है। महिलाओं को लगता है कि वो जमीन का हक नहीं रखती है। इसलिए घर में जब भी इस पर बात होती है, वो इस चर्चा में शामिल ही नहीं होती है। ऐसा नहीं होना चाहिए

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि हम बचपन से सुनते आए हैं बेटी पराया धन होती है। पर क्या इसलिए उसे जमीन का हक नहीं मिलना चाहिए। बेटी भी माँ बाप का ही खून होती है और बल्कि ये कहा जाता है की बेटिया माँ बाप का ज्यादा ध्यान रखती है। तो फिर जब बेटा जमीन संभाल सकता है तो बेटी क्यों नहीं। ऐसा क्यों माना जाता है की केवल बेटा ही उसकी विरासत आगे बढ़ा सकता है या फिर बेटा असली हकदार है। क्या सिर्फ इसलिए की उसका विवाह हो जाता है, वो दूसरे घर में चली जाती है, तो वो आपके घर का हिस्सा नहीं रह गई। या वो आपके लिए सम्मान की बात नहीं रह गई। ये सिर्फ कानून का सवाल नहीं सोच बदलने का सवाल है

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि जब हम घर कहते है, तो सिर्फ छत नहीं होती जमीन भी होती है। पर सवाल ये है की क्या जमीन पर महिला का भी हक होता है। आज भी बहुत सी बेटियां सिर्फ इसलिए अपना भूमि अधिकार नहीं मांगती क्योंकि उन्हें लगता है की ये गलत है। जबकि सच ये है की कानून उनके साथ खड़ा है। भूमि पर अधिकार सिर्फ पैसों का नहीं सुरक्षा और इज्जत का भी होना चाहिए। कानून बन जाने से केवल अधिकार नहीं मिल जाते। लोगों को अपनी मानसिकता बदलनी होगी और आगे बढ़ के ये कदम उठाना होगा। वो महिलाओं पर भी विश्वास करें और उनको भी अपने जमीन अपनी विरासत जो वो समझते हैं उसका हिस्सा महिलाओं को भी बनाये।

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमज़ान अली की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से एक श्रोता से हुई। वो कहते है कि महिला को जमीनी हक दिलाने के लिए योजना बनाना चाहिए। जिसके तहत गांव में जा कर गरीब महिलाओं की सूची बना कर उन्हें आवास और जमीन देना चाहिए। जिससे महिला आर्थिक रूप से मजबूत होंगी

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमज़ान अली की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से एक श्रोता से हुई। वो कहते है कि महिला को जमीन में हिस्सा मिलना चाहिए। जमीनी अधिकार रहेगा तो वो आर्थिक रूप से मजबूत होंगी। सरकार को गरीब महिलाओं की मदद करना चाहिए उनके नाम जमीनी पट्टा करवा कर

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से अनीता दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि महिलाओं को उनका हक अवश्य मिलना चाहिए। क्योंकि यह उनका संवैधानिक और मानव अधिकार है। इसके साथ ही यह स्वस्थ और प्रगतिशील समाज के लिए स्त्री पुरुष समानता भी जरुरी है। जिसमें शिक्षा रोजगार सुरक्षा और निर्णय लेने का सामना अवसर शामिल है। भारतीय संविधान भी इसके लिए प्रावधान करता है

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से 49 वर्षीय राकेश श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि अगर महिलाओं को मायके में अधिकार मिल जाए ,उन्हें प्रॉपर्टी में हिस्सा मिले तो इससे फायदा यह होगा कि जेवर ज्वारत की तरह आपातकालीन स्थिति में प्रॉपर्टी का हिस्सा से महिला को मदद मिलेगी।

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमज़ान अली की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से एक श्रोता से हुई। वो कहते है कि महिला को जमीन में हिस्सा मायके में नहीं मिलना चाहिए। लेकिन मायके में नहीं मिलना चाहिए। महिलाओं को जमीन मिला तो वो आर्थिक रूप से मजबूत बनेगी

Transcript Unavailable.