कल के नेता, आज की आवाज़” केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक आह्वान है—युवाओं के लिए, समाज के लिए और नीति निर्माताओं के लिए। यदि युवाओं को सही दिशा, प्रशिक्षण और अवसर दिए जाएं, तो वे भूमि न्याय के आंदोलन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। भविष्य का भारत तभी सशक्त और न्यायपूर्ण होगा, जब आज की युवा आवाज़ भूमि पर समान अधिकार की मांग को मजबूती से उठाएगी। तब तक आप हमें बताइए कि , *--- आपके परिवार में जमीन किसके नाम है? क्या महिलाओं का नाम भी उसमें शामिल है *--- “हम अपने परिवार और समाज में ऐसी कौन-सी पहल कर सकते हैं, जिससे महिलाओं को ज़मीन में बराबर की हिस्सेदारी सुनिश्चित हो? *--- “अगर महिलाओं के नाम जमीन हो जाए, तो आपके हिसाब से उनकी ज़िंदगी में क्या-क्या बदल सकता है?”

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती जिला से 44 वर्षीय विजय पाल चौधरी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि महिलाओं को जमीन का अधिकार मिलना चाहिए। महिलाओं के नाम जमीन नहीं होने से महिलाएँ हमेशा प्रताड़ित की जाती है। परिवार के सदस्य महिला को छोटी छोटी बातों पर उन्हें घर से निकल जाने को कहते है। अगर महिलाओं को जमीन का अधिकार मिलेगा तो इस तरह की दुर्व्यवहार उनके साथ घटित नहीं होगा।

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उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमज़ान अली की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से एक श्रोता से हुई। वो कहती हैं कि उनके नाम पर जमीन है। लेकिन किसान सम्मान निधि का लाभ नहीं मिल रहा है

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से 45 वर्षीय विजय पाल चौधरी कहते हैं कि महिलाओं का भी पैतृक संपत्ति में पूरा अधिकार है। साल 2005 से उनका हक कानून भी बन गया है। महिला के नाम जमीन हुआ तो महिला अपना व्यवसाय भी कर सकती है। इसके लिए उन्हें सरकार की तरफ से कुछ अनुदान भी मिल जाता है। जिससे की महिलाओं को आर्थिक रूप से काफी सहायता मिलती है

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि महिला अकेली नहीं लड़ सकती। उसके साथ परिवार समाज और सरकार का सहयोग जरूरी है। जब पति या भाई साथ देता है तब बदलाव तेज होता है। हम सभी बार बार कहते है की महिलाओं को अपनी आवाज़ उठानी चाहिए अपनी आवाज के लिए लड़ना चाहिए पर अगर वही पर उसके घर वाले उसका साथ दे। उसका पति या भाई उसका साथ दे लोग उसका साथ दे तो महिलाओं को इतनी लड़ाई करनी ही नहीं पड़ेगी। महिलाओं को उनके अधिकार आसानी से मिल पायेंगे। जो की महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण की तरफ एक मजबूत कदम होगा

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि परंपरा के नाम पर महिलाओं का हक छीन लेना गलत है। परंपरा समाज को जोड़ती है। पर अधिकार छीनने का जरिया नहीं रखती। हमारे देश में कई घरों में परंपरा के नाम पर महिलाओं को अधिकारों से वंचित कर दिया जाता है। हमेशा महिला जब अपना अधिकार मांगना चाहती है, तो उसे यही कहा जाता है हमारे यहा ऐसा नहीं होता है। असल में तो हमारी परंपरा ने कभी कुछ कहा ही नहीं हमारी परंपरा ये कभी नहीं कहती की महिलाओं को अधिकार नहीं मिलना चाहिए। ये लोगों के बनाए हुए और फैलाए हुए झूठ हैं। परंपरा के नाम पर महिलाओं को हक से वंचित किया जा रहा है। इसलिए हमेशा अधिकार और परंपरा के बीच में सामंजस्य जरूरी है धन्यवाद

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि जब महिला के पास अपनी जमीन होती है, तो उसकी घरेलू हिंसा से लड़ने की ताकत भी बढ़ती है। हमारे देश में आज भी कई घर ऐसे है जहाँ पे घर में घरेलू हिंसा होती है महिलाओं को अच्छे से ट्रीट नहीं किया जाता है। पर ये बातें कभी बाहर ही नहीं आती है। महिलाएं आवाज नहीं उठा पाती है।क्योंकि कई बार उनको ऐसा लगता है की उनके पास कोई सहारा नहीं है। कोई आर्थिक सुरक्षा नहीं है।अगर उनके पास जमीन होगी तो वो अत्याचार के खिलाफ लड़ पाएंगे। उन्हें यह विश्वास होगा की अगर वो अपने पति को छोड़ भी दे तो उनके पास रहने को एक घर होगा

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि जमीनी अधिकार का समस्या सिर्फ गाँव तक ही सीमित नहीं है। शहरों में भी फ्लैट और प्लॉट अक्सर पुरुष के नाम से ही होता है। महिला का नाम जोड़ना अभी भी एक ऑप्शन समझा जाता है। जब भी कोई जमीन या घर खरीदा जाता है चाहे वो शहर हो या गाँव वो हमेशा किसी न किसी पुरुष के नाम से ही खरीदा जाता है। इस सोच को बदलने की जरूरत है