उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से अनीता दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि चुनौतियां और सांस्कृतिक बाधाए कई जगहों पर पुरानी परंपरा और और सांस्कृतिक प्रथाएं महिलाओं के अधिकारों को लागू होने से रोकती हैं। कानूनों के बावजूद जमीनी स्तर पर इन्हें लागू करना एक चुनौती हो सकती है। महिलाओं को जमीन का अधिकार देना न केवल उनके लिए बल्कि पूरे परिवार और समाज के लिए एक सकारात्मक कदम है। जो सशक्तिकरण और बेहतर भविष्य की नींव रखता है

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से अनीता दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि क्या आप मानते हैं की महिलाओं को जमीन का अधिकार मिलने से परिवार ज्यादा सुरक्षित और मजबूत होता है। क्या अगली पीढ़ी को बराबरी की सीख देने के लिए आप संयुक्त स्वामित्व अपनाना चाहेंगे

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से अनीता दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि क्या आपके परिवार की जमीन या घर महिलाओं के नाम आरोप भी संयुक्त रूप में दर्ज है।अगर नहीं है तो क्या आप संपत्ति में बेटियों और बहुओं को बराबर का हक देंगे।

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से विजय पाल चौधरी उम्र पैंतालीस साल कहते हैं कि जमीनी अधिकार में जैसे कुछ लोगों के नाम से जमीन नहीं है और उनको जमीन पट्टा कराना है तो इसके लिए कहाँ जाना चाहिए। किससे मिल कर ये काम किया जा सकता है। इसकी जानकारी चाहिए

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला के साउघाट प्रखंड से विजय पाल चौधरी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि महिला के पास जमीन है पर उसके नाम से नहीं है तो उस समस्या के लिए महिला को कहाँ जाना पड़ेगा ?

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से 50 वर्षीय अरविन्द श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि अधिकतर महिलाएँ अपना समय कृषि कार्यों में देती है और महिलाओं को यह हक़ नहीं होता है कि उनका अधिकार जमीन में होना चाहिए। जहाँ पट्टे की बात होती है तो पुरुष अपने नाम ही पट्टा करवाता है। पैतृक संपत्ति में भी बेटों को अधिक हिस्सा दिया जाता है। लड़ाई लड़ने के बाद ही कुछ प्रतिशत महिलाओं को जमीन में मालिकाना हक़ मिला हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में न के बराबर महिलाओं के नाम जमीन है वहीं शहरी क्षेत्रों में लोग महिलाओं के नाम जमीन खरीदते है क्योंकि उसमें स्टाम्प छूट मिलता है। लेकिन जमीन में नाम के बावजूद महिलाओं को मालिकाना हक़ समाज द्वारा नहीं दिया जाता है। महिलाओं को उनके नाम जमीन रहने पर भी उनका स्वामित्व नहीं मिलता है।

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि महिलाओं का भूमि अधिकार केवल कागज़ का सवाल नहीं बल्कि सोच बदलने का सवाल है। अगर महिला को जमीन का अधिकार देते है तो हम उसे कह रहे है होते है कि वो खुद अपना निर्णय ले सकती है और उनपर भरोसा दिखाते है। इससे महिला का आत्मविश्वास बढ़ता है और उनका सम्मान बढ़ता है। परिवार मज़बूत होता है। अगर लोगों के पास जमीन है तो महिला का भी नाम जमीन में जोड़िये। क्योंकि अगर महिला मज़बूत होती है तो देश मज़बूत होता है

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से 35 वर्षीय गुड्डू मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि ये गल्ला किसी से लेकर बोते है तो इसका लाभ कैसे मिल पाएगा

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से लक्ष्मी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि अगर इनके पिता या भाई अपने जमीन से हिस्सा देना चाहे तो क्या क्या समस्या उत्पन्न हो सकती है ?

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