उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि अपनी जमीन पाने के लिए अपना हक पाने के लिए कागजी कार्यवाही का पता होना भी बहुत जरूरी है। अगर आप अपने हक के लिए लड़ रहे हैं। अगर आपको आपका अधिकार दिया जा रहा है। तो उसके लिए आपको जमीन की रजिस्ट्री डॉक्यूमेंट इन सब के बारे में पता होना बहुत जरूरी है। आपको रजिस्ट्री ऑफिस जा कर जरूर पता लगाना चाहिए की कैसे चीजें होती है। केवल लड़ाई या बोलने से नहीं होगा। आपको जमीनी स्तर पर जा कर चीजें सीखनी होगी
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि अपनी जमीन होने से महिला को एक अलग ही स्वतंत्रता मिलती है। एक गरिमा का अनुभव होता है। वो किसी की बहन बेटी या पत्नी नहीं बल्कि एक स्वतंत्र व्यक्ति होती है। जिसकी अपनी आकांक्षाएं होती है। अपने सपने होते है जब किसी व्यक्ति के पास अपनी संपत्ति हो तो वो खुद को सशक्त महसूस करती है
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि अगर महिला को अपने अधिकारों या इसके प्रोसेस के बारे में नहीं पता है। जमीन कैसे लेनी है इन सभी बातों की जानकारी नहीं है। तो इस बारे में कानूनी सहायता लेना भी सशक्तिकरण के प्रति एक पहला कदम है। आपको जब भी ऐसी जरूरत महसूस हो तो कानूनी मदद जरूर लें
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि अक्सर ये कहा जाता है की लड़की को जमीन देने से पराया धन चला जाता है। लेकिन असल में ये सोच ही गलत है। अधिकार देना कभी भी नुकसान नहीं हो सकता और किसी का भी अधिकार छीनना गलत बात है। वो चाहे आप कोई भी बहाना देकर करें। महिलाओं को और पुरुषों को सबको अपना बराबर का अधिकार मिलना आवश्यक है
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि जब महिला के पास रिसोर्सेज होते हैं। उसकी जमीन होती है, तो वो अपनी बेटियों को पढ़ाने में ज्यादा योगदान कर पाती है। जिससे की आने वाली पीढ़ी भी सशक्त हो सके। बेटियां पढ़ सकेें आगे बढ़ सकेें। ये भी भूमि अधिकार का एक बहुत महत्वपूर्ण पहलू है। इसे भी ध्यान में रखना चाहिए आप महिलाओं को जमीन देते हैं तो केवल वो पीढ़ी आगे नहीं बढ़ेगी बल्कि आने वाली सभी पीढ़ियों को सशक्त करने का मार्ग खुलेगा
उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि जब भी कोई समस्या या विपत्ति आती है तो जिसके नाम से जमीन होती है मुआवज़ा भी उसी को मिलता है। गाँव में बाढ़ सूखा आने से नुक्सान हो जाता है। अगर महिलाओं के पास जमीन होता तो वो आर्थिक रूप से मज़बूत होगी और अपना भविष्य सुरक्षित कर पाएगी
उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि कई वर्षों से महिलाओं को जमीन देने की बात हो रही है लेकिन शहर हो या गाँव महिलाओं को जमीन दी नहीं जाती है। एक जॉइंट ओनरशिप होती है जिसमे पति पत्नी दोनों के नाम से जमीन होती है। इससे दोनों की सुरक्षा और बराबरी बनी रहती है
उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि जब महिला आर्थिक रूप से सुरक्षित होती है तो वो स्वास्थ्य पर भी ध्यान दे पाती है। जमीन में नाम रहने से महिला आर्थिक रूप से सुरक्षित होगी और अपने बारे में सोच पाएगी
उत्तरप्रदेश राज्य के बलरामपुर ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि जब महिलाओं के नाम जमीन होती है तो घर में महिलाओं की आवाज़ ज़्यादा सुनी जाती है। घर के हर के फैसले में महिलाओं की भूमिका बढ़ती है। ये सिर्फ कागज़ का अधिकार नहीं बल्कि निर्णय लेने की शक्ति भी है
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से विजयपाल चौधरी कहते हैं कि 1956 हरमनई अदालत ने साफ कहा था की पहले हुई मृत की स्थिति में बेटी पिता की संपत्ति की उत्तराधिकारी नहीं मानी जाएगी। 1956 की कानून के अनुसार केवल पुत्र को ही उत्तराधिकार का अधिकार हासिल होता था। लेकिन बेटी को हिस्सा तब ही मिलता था जब परिवार में बेटा ना हो। इसलिए ऐसी स्थिति में बेटियों को हक़ नहीं मिलेगा।
