उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से विजयपाल चौधरी कहते हैं कि पति की मृत्यु के बाद विधवा बहु अपने हिस्से के लिए ससुर की संपत्ति में दावा कर सकती है। क्योंकि मृत्यु के बाद उसके कानूनन वारिश में विधवा पत्नी और उसके बच्चे शामिल होते हैं
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उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला के साउघाट प्रखंड से 44 वर्षीय विजय पाल चौधरी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि पट्टे की जमीन के लिए प्रधान से यह लिखवाना होगा कि व्यक्ति के पास जमीन नहीं है ,इसके बाद सम्बंधित लेखपाल से मिलकर एक ऑनलाइन एप्लीकेशन भी देना होता है। जिसपर लेखपाल अपनी रिपोर्ट लगाते है और यह सक्षम अधिकारी के पास जाता है। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद तहसील से जानकारी होती है। इस प्रकार पत्नी को जमीन मिल सकता है।
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमज़ान अली मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि सबुर मिशा ने बताया कि इनके पिता द्वारा इन्हें जमीन मिला है। इससे वो खुश है। साथ ही इन्हे किसान सम्मान निधि का लाभ भी मिल रहा है
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमज़ान अली मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि साउघाट प्रखंड निवासी नाज़मा ने बताया कि इनके पति ने नाजमा के नाम से ज़मीन लिया ,खेत लिया ,रजिस्ट्री करवाने में पैसे भी कम लगे। बस एक समस्या आ रही है कि केवाईसी भी अपडेट है ,सब चीज़ सही रहने के बावजूद किसान सम्मान निधि का लाभ नहीं मिल रहा है।
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से उम्र 44 विजय कुमार चौधरी कहते हैं कि भारत में महिलाओं को दो हज़ार पाँच हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के द्वारा पिता की संपत्ति में बेटियों को भी कानून अधिकार बन गया। विवाहित हो या अविवाहित बेटी माँ पिता की जमीन की सामान हिस्सेदार बनती है। इसके अलावा भी महिलाओं के नाम जमीन खरीदी जाती है, तो सरकार स्टाम्प में छूट देती है
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से विजयपाल चौधरी कहते हैं कि पैतृिक संपति में दो हजार पांच कानून के अनुसार बेटियों को भी हक़ दिया गया है क्योंकि जन्म से ही बेटियां जमीन की सहभागीदार है और अपने माता पिता की जमीन और घर में वो अपना हिस्सा मांग सकती है
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से प्रीति सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि भूमि पर महिलाओं का अधिकार होने से अनेक प्रकार के लाभ होते है। जैसे की उनका आय का स्रोत भी मिल जाता है। अगर ज़रूरत पड़ने पर उनको कोई दिक्कत है, तो जमीन के जरिए बैंक से लोन भी ले सकती हैं। वो अपना व्यवसाय शुरू कर सकती है। इससे उनका मान सम्मान बढ़ सकता है। महिलाओं के पास अगर भूमि के अधिकार है, तो परिवार में उनका मान सम्मान या कोई निणय लेने में उनको उनकी भूमिका बढ़ जाती है। भूमि का स्वामित्व उन्हें समाज में सम्मान और नई पहचान देता है। उनका आत्मविश्वास बढ़ जाता है। उनके साथ घरेलु हिंसा भी नहीं होता है
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से प्रीति सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि महिलाओं को भूमि अधिकार मिलने से बहुत ही फायदे हो रहे हैं। इससे ना केवल उनका व्यक्तिगत जीवन सुधरता है, बल्कि पूरे समाज पर प्रभाव पड़ता है। जिसे की उनकी एक आय का श्रोत भी बनता है। भूमि अधिकार मिलने से आर्थिक सशक्तिकरण और सुरक्षा का भी आभास होता है। इससे उन्हें आर्थिक समस्याओं से कोई परेशानी नहीं होती है
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से प्रीति सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि पुराने समय में महिलाओं को सिर्फ काम करने की आजादी थी। महिलाओं के नाम प्रॉपर्टी नहीं थी। समाज में उनका कोई वैल्यू नहीं था। लेकिन आज के समय में महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए कई ऐसे नियम बनाए गए हैं। जिससे उन्हें आत्मनिर्भर और संपत्ति का मालिक बना कर समाजीकोर आर्थिक तौर पर सशक्त बनाना है सुरक्षा देना है
