उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमज़ान अली की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से एक श्रोता से हुई। वो कहती है कि महिला को जमीन में अधिकार ससुराल में मिलना चाहिए। अगर कोई भाई नहीं हो तो ही मायके में जमीन मिलना चाहिए
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उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से विजय कुमार चौधरी कहते हैं कि महिलाओं के लिए संयुक्त स्वामित्व कागजी नियम नहीं होना चाहिए। बल्कि इसे लागू करना चाहिए। कागजों में अगर उनके नाम पर जमीन होगी, तो एक प्रकार से समाज में बदलाव भी होगा। जो आगे पीढ़ियों में भी चलता रहेगा। यह बहुत सही नियम होगा
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से अनीता दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि महिलाओं को जमीन और सम्पत्ति में बराबर हक देना एक बेहतर और न्याय पूर्ण समाज की ओर बढ़ता कदम है। आज महिलाओं के नाम पर संयुक्त रूप से दर्ज है बराबर का हक। क्या आप अपनी बेटियों और बहुओं को संपत्ति में बराबर का अधिकार देंगे
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से अनीता दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि महिलाओं को जमीन का अधिकार मिलने से परिवार और उनके भविष्य दोनों के लिए बहुत सकारात्मक बदलाव आते है। क्योंकि इससे उनकी आर्थिक स्थिति आत्म सम्मान और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है। जिससे घरेलू हिंसा कम होती है और परिवार की स्थिति सुधरती है। हालांकि सांस्कृतिक और सामाजिक चुनौतियाँ भी है। यह है कि संपत्ति का मालिक ही नहीं बल्कि परिवार में एक मजबूत भागीदार बनाता है जो बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर अच्छा असर डालता है
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से अनीता दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि बच्चों का बेहतर भविष्य बनाने के लिए संपत्ति वाली महिलाएँ बच्चों को स्कूल भेजने और उनके भविष्य का निर्णय करने का अधिक संभावना रखती है। यह उन्हें वित्तीय रूप से स्वतंत्र बनाता है। उन्हें दूसरों पर निर्भर होने से बचाता है
