आज की युवा पीढ़ी महिला अधिकारों को एक नए नजरिए से देख रही है। जहां पहले अधिकारों की लड़ाई सड़क से संसद तक सीमित थी, वहीं अब यह लड़ाई डिजिटल दुनिया तक पहुंच चुकी है। सोशल मीडिया, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डिजिटल कैंपेन यह सब उसके नए हथियार हैं.

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से प्रीति सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि भूमि पर महिलाओं का अधिकार होने से अनेक प्रकार के लाभ होते है। जैसे की उनका आय का स्रोत भी मिल जाता है। अगर ज़रूरत पड़ने पर उनको कोई दिक्कत है, तो जमीन के जरिए बैंक से लोन भी ले सकती हैं। वो अपना व्यवसाय शुरू कर सकती है। इससे उनका मान सम्मान बढ़ सकता है। महिलाओं के पास अगर भूमि के अधिकार है, तो परिवार में उनका मान सम्मान या कोई निणय लेने में उनको उनकी भूमिका बढ़ जाती है। भूमि का स्वामित्व उन्हें समाज में सम्मान और नई पहचान देता है। उनका आत्मविश्वास बढ़ जाता है। उनके साथ घरेलु हिंसा भी नहीं होता है

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से अनीता दुबे मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि महिलाओं को जमीन का अधिकार मिलने से परिवार और उनके भविष्य दोनों के लिए बहुत सकारात्मक बदलाव आते है। क्योंकि इससे उनकी आर्थिक स्थिति आत्म सम्मान और निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है। जिससे घरेलू हिंसा कम होती है और परिवार की स्थिति सुधरती है। हालांकि सांस्कृतिक और सामाजिक चुनौतियाँ भी है। यह है कि संपत्ति का मालिक ही नहीं बल्कि परिवार में एक मजबूत भागीदार बनाता है जो बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य पर अच्छा असर डालता है

अधिकांश व्यक्तिगत पट्टे पुरुषों के नाम पर होते हैं. सामुदायिक अधिकारों में भी महिलाओं को भी कम प्रतिनिधित्व दिया जाता है. इसके चलते महिलाएं केवल खेत मजदूर बनकर रह जाती हैं. महिलाओं को इसका नुकसान यह होता है कि बैंक, बीमा तथा दूसरी सरकारी सहायता का लाभ नहीं उठा पाती है, जो उनके लिए चलाई जा रही हैं.

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आपदा राहत के दौरान भी महिलाओं की स्थिति चुनौतीपूर्ण रहती है। राहत शिविरों में कई बार अकेली महिलाओं, विधवाओं या महिला-प्रधान परिवारों की जरूरतें प्राथमिकता में नहीं आतीं। तब तक आप हमें बताइए कि , *--- जब किसी महिला के नाम पर घर या खेत होता है, तो परिवार या समाज में उसे देखने का नज़रिया किस तरह से बदलता है? *--- आपके हिसाब से एक गरीब परिवार, जिसके पास ज़मीन तो है पर कागज नहीं, उसे अपनी सुरक्षा के लिए सबसे पहले क्या कदम उठाना चाहिए?"? *--- "सिर्फ 'रहने के लिए छत होना' और उस छत का 'कानूनी मालिक होना'—इन दोनों स्थितियों में आप एक महिला की सुरक्षा और आत्मविश्वास में क्या अंतर देखते हैं?"

उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से अरविन्द श्रीवास्तव कहते हैं कि महिलाओं को जमीन देने से आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। लेकिन हमारे समाज में लोग आज भी पुरानी रुढ़िवादी सोच के साथ आगे बढ़ रहे हैं। जिसके कारण महिलाओं को उनका हक नहीं मिल पाता है। सरकार कितना भी प्रयास कर लें। लेकिन हकीकत में महिलाओं को उनका हक बहुत कम ही मिल पाता है। महिला अक्सर अपने अधिकार को मांगने के कारण घरेलू हिंसा का भी शिकार हो जाती है। क्योंकि भाई या पिता काफी नाराज होते हैं और अपनी बहन या बेटी को हिस्सा नहीं देना चाहते हैं। इसके लिए एक बदलाव की जरूरत है और उनको ये बताने की आवश्यकता है की वो भी उसी परिवार की बेटी है उसके लिए भी जमीन देना आवश्यक होता है। जिससे की उसके पति की मृत्यु के बाद वो आर्थिक रूप से मजबूत रहे

साल 2024 में राष्ट्रीय महिला आयोग को 25743 शिकायतें मिलीं जिसमें से 6,237 (लगभग 24%) घरेलू हिंसा से जुड़ी थीं. इसी रिपोर्ट के अनुसार 54% शिकायतें उत्तर प्रदेश से आईं, जो घरेलू हिंसा से जुड़ी शिकायतों में उत्तर प्रदेश की प्रमुखता को दिखाता है. उत्तर प्रदेश से 6,470 शिकायतें आई थीं, तमिलनाडु से 301 और बिहार से 584 शिकायतें दर्ज की गई थीं.

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