उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से प्रीति सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि भारत में महिलाओं की स्थिति में सुधार के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन अभी भी लैंगिक भेदभाव और कई रूढ़िवादिता मौजूद हैं। महिला सशक्तिकरण केवल महिला को मजबूत बनाना ही नहीं बल्कि उन्हें समाज में प्रतिकारी रूप में स्थापित करना भी है। महिला को हर प्रकार का अधिकार मिलना चाहिए
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से प्रीति सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि भारत में महिलाओं को जमीन पर कई अधिकार प्राप्त है। लेकिन कई जगहों पर ऐसा नहीं हो पाता है।शादीशुदा बेटी को कृषि भूमि पर अधिकार नहीं मिलता था। लेकिन अब सरकार कानून पूरे देश में लागू कर रही है। सभी प्रकार की पैतृक संपत्ति पर अब महिला को भाइयों के बराबर हिस्सा मिल सकता है।बेटियों को पिता की पैतृक संपत्ति में भी हिस्सा मिलता है।मृत्यु के बाद पति के संपत्ति में माँ और बच्चे को बराबर की हिस्सेदारी मिल रही है। महिला कोई संपत्ति खुद खरीदती है या वसियत या उपहार के रूप में प्राप्त करती है। वह पूरी तरह से उनकी होती है और वो उसे अपने इच्छा के अनुसार बेच सकती हैं। तलाक के बाद गुजारा भत्ता या सम्पति में हिस्सा मिल सकता है।बेटी को पैतृक घर में रहने का अधिकार प्राप्त है, भले ही वो अविवाहित हो। पत्नी की संपत्ति पर पति का कोई कानूनी अधिकार नहीं होता है। कोर्ट के फैसले के बाद पति को भी पत्नी की संपत्ति जैसे गहने व धन वापस करने पड़ते है,लेकिन महिला की संपत्ति अपनी मानी जाती है
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमज़ान अली की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से श्रोता से हुई। श्रोता कहते है कि महिलाओं को उनके मायके में हिस्सा नहीं मिलना चाहिए अगर उन्हें मायके में हिस्सा मिला तो उनके भाइयों में विवाद हो सकता है। इसलिए महिलाओं को उनके ससुराल में ही जमीनी हक मिलना चाहिए।
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमज़ान अली की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से श्रोता से हुई। श्रोता कहते है कि महिलाओं को उनके मायके में हिस्सा नहीं मिलना चाहिए। महिलाओं को उनके ससुराल में ही जमीनी हक मिलना चाहिए।
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से विजय पाल चौधरी उम्र पैंतालीस साल कहते हैं कि जमीनी अधिकार में जैसे कुछ लोगों के नाम से जमीन नहीं है और उनको जमीन पट्टा कराना है तो इसके लिए कहाँ जाना चाहिए। किससे मिल कर ये काम किया जा सकता है। इसकी जानकारी चाहिए
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमज़ान अली की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से राज से हुई। राज कहते है कि मायके में महिला को हिस्सा नहीं मिलना चाहिए। उन्हें उनके पति के घर में हिस्सा मिलना चाहिए। अगर वो मायके में हिस्सा लेंगी तो भाइयों के साथ विवाद हो सकता है। दूसरी बहनें भी अगर हिस्सेदारी के लिए दावा करेंगी तो और बड़ा विवाद हो सकता है
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से रमज़ान अली की बातचीत मोबाइल वाणी के माध्यम से मोहम्मद फ़राहन से हुई। फ़राहन कहते है कि मायके के जमीन में बहन को हिस्सा नहीं मिलना चाहिए। उन्हें उनके पति के घर में हिस्सा मिलना चाहिए। अगर बहन को दिया जाएगा मायके में तो भाई बहन में विवाद होगा और स्थिति बदल जायेगी
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलायें बहुत ही मेहनत से पूरा समय खेती , पशु और घर को संभालती हैं। लेकिन जमीन पर उनका नाम नहीं होता है। जिसके कारण उन्हें कई लाभों से वंचित होना पड़ता है। वो लोन नहीं ले पाती ना ही उन्हें योजनाओं का लाभ मिल पाता है। अगर महिलाओं को जमीन पर हक दिए जाते तो वो योजना का लाभ ले सकती है। खेती में नए तरीके भी अपना सकती है। इसके साथ ही अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित कर सकती हैं। जो जमीन संभालती हैं उनका भी हक जमीन पर होना चाहिए
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से संस्कृति श्रीवास्तव मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि जमीन सिर्फ प्रॉपटी नहीं होती है, बल्कि पहचान होती है। एक महिला दिन रात काम करती है। अपने परिवार बच्चों का ख्याल रखती है। उसका काम भी जमीन से जुड़ा हुआ होता है। लेकिन उस महिला के नाम पर जमीन नहीं होती है। ये सिर्फ गलत नहीं नाइंसाफी है। कानून कहता है की बेटा और बेटी में कोई फर्क नहीं दोनों को समान अधिकार दिया गया है। लेकिन बेटियों को कहा जाता है की तुम्हें शादी में दे दिया गया। लेकिन शादी तो कोई डील नहीं है। बेटी कोई बोझ नहीं है। जब महिला के नाम जमीन होती है. तो वो अपने निर्णय खुद लेती हैं और अपने भविष्य को भी सुरक्षित करती है
उत्तरप्रदेश राज्य के बस्ती ज़िला से विजय पाल चौधरी पैंतालीस साल कहते हैं कि महिलाओं को अभी भी अपने अधिकारों की पुर्ण जानकारी नहीं है। जैसे की अगर महिला को राशन कार्ड ही बनवाना हो तो उन्हें यह नहीं पता होता है कि ये कैसे बनेगा कहाँ जाना होगा। इसलिए महिलाओं को जागरूक करना हर विषय पर बहुत जरुरी है
