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gurugram siber city
बिहार राज्य सीतामणी जिला से हमारे श्रोता जानना छह रहे है कि वो जिस कंपनी में काम करते है वहा पर अचानक उनका वेतन कम क्यों कर दिया गया है ?
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राजधानी दिल्ली के वार्ड नंबर 64 ई का मामला
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दिल्ली से राम करण साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि बाढ़ के कारण लोग पलायन कर रहे हैं। पूरी खबर सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें
दिल्ली के बुराड़ी क्षेत्र से महेश कुमार सैनी ,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि अटल बिहारी वाजपेई के कार्यकाल में पाकिस्तान भारत का युद्ध शुरू हुआ। विस्तृत जानकारी के लिए ऑडियो पर क्लिक करें
दिल्ली के बुराड़ी क्षेत्र से महेश कुमार सैनी ,साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि देश के वीर जवानों को सम्बोधित किया गया है। पूरी ख़बर सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें
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कम्पनी अपने मज़दूरों कि सैलरी इस तरह कम नहीं कर सकती, लेकिन देश भर में मज़दूरों के साथ ऐसा ही हो रहा है और ख़ास कर प्रवासी मज़दूरों के साथ। श्रम क़ानूनों अंतर्गत अगर कम्पनी किसी मज़दूर या मज़दूरों कि सैलरी या दिनों में किसी भी तरह की कमी नहीं कर सकती क्योंकि इससे मज़दूरों कि सेवा की शर्तों में बदलाव होगा। अधिनियम के अनुसार, इस तरह के बदलाव से पहले संबंधित मज़दूरों को 21 दिनों के नोटिस के बिना प्रस्तुत किए बिना किसी भी तरह के परिवर्तन को प्रभावित नहीं किया जा सकता है। लेकिन अगर आपकी कम्पनी ने न्यूनतम वेतन के आधार पर एक रोज़गार अनुबंध या रोज़गार की शर्तों को बनाया है और मज़दूरों ने उसे स्वीकार किया है तो बात दूसरी है, और आपके नियोक्ता इसके चलते "प्रचलित राष्ट्रीय न्यूनतम मजबूरी प्रति घंटा की दर" पर भुगतान कर सकते हैं, जिसमें मज़दूरों की सैलरी कम हो सकती है। मज़दूरों के साथ लॉक डाउन के बाद ऐसा होना शुरू हो गया है, क्योंकि कंपनियां लॉक डाउन में हुऐ अपने नुकसान को मज़दूरों कि सैलरी से भरना चाहती हैं। लेकिन मज़दूरों का पूरा हक़ बनता है कि वे इसके ख़िलाफ़ आवाज़ उठाए, एकजुट होकर यूनियन के साथ इसका विरोध करें, नहीं तो मज़दूरों का शोषण इसी तरह होता रहेगा।
Aug. 4, 2020, 3:22 p.m. | Tags: skd int-PAJ wages workplace entitlements