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दिल्ली एनसीआर श्रमिक वाणी के माध्यम से मोहम्मद शाहनवाज की बातचीत दिल्ली में काम करने वाली आशा वर्कों से हुई दिल्ली के सिविल लाइन अरविंद केजरीवाल के घर पर जाना चाहती हैं उनको पुलिस ने सिविल लाइन के पास रोक दिया गया वह बराबर 28 अगस्त से प्रदर्शन कर रही हैं आशा वर्कर बताती है कि हमारा न्यूनतम वेतन हमें मिलना चाहिए हमें 30 से ₹35 रुपए मिलते हैं जो की ₹2500 या ₹3000 होते हैं क्योंकि वह बहुत गलत है हम जब तलक कम पर नहीं लौटेंगे तब तक हमारा वेतन फिक्स नहीं किया जाएगा गर्भवती महिला से लेकर बच्चे पैदा होने तक हम बराबर अस्पताल के चक्कर लगाते हैं महिलाओं के साथ और उसके बाद बच्चा जब पैदा हो जाता है तो टीकाकरण के लिए बच्चों के टीकाकरण लगा कर आते हैं और भी बहुत सारे टारगेट हमें दे दिए जाते हैं
दिल्ली एनसीआर श्रमिक वाणी के माध्यम से मोहम्मद शाहनवाज की बातचीत दिल्ली सिविल लाइन के पास बैठी आशा वर्कों से हुई आशा वर्कर बताती हैं कि बेरोजगार हैं नौकरी करते हैं मगर 2500 सो मिलते हैं उसे कैसे किराया दिया जाए कैसे बच्चों का पेट पाल जाए हमारी सैलरी बढ़ाई जाए दिल्ली में रहने के बाद कितने कम पैसे कमाना समझदारी का काम नहीं है हमे गर्भवती महिला को लेकर बार-बार अस्पताल जाना पड़ता है जब तक उसका बच्चा नहीं हो जाता तब तक हम उसके साथ रहते हैं उसके बाद बच्चों का टीकाकरण कराना कोरोन कल जैसे आपदा में फील्ड में घूमने बाढ़ जैसी आपदा में साफ सफाई का ध्यान रखना अब डेंगू जैसी बीमारी चल रही है दिल्ली के अंदर उसमें भी हमारी ड्यूटी लगा दी जाती है फिर भी हमें तनख्वाह नहीं मिल रही है और मिलती है तो इतनी कम मिलती है कि इसमें तो हमारा गुजारा होता नहीं केजरीवाल सरकार हमेशा बेवकूफ बनाती है अब कैसे हम बेवकूफ बनने वाले नहीं है हम धरना जब तलक नहीं छोड़ेंगे तब तक हमारी मांगे पूरी नहीं होगी हम 28 अगस्त से यहां बैठे हुए हैं लगभग 20 दिन बीत चुके हैं सरकार का कोई भी नोमाइंदा हमसे यह पूछने नहीं आया है कि आपकी क्या मांगे हैं
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