दिल्ली एनसीआर श्रमिक वाणी के माध्यम से मोहम्मद शाहनवाज की बातचीत दिल्ली सिविल लाइन के पास बैठी आशा वर्कों से हुई आशा वर्कर बताती हैं कि बेरोजगार हैं नौकरी करते हैं मगर 2500 सो मिलते हैं उसे कैसे किराया दिया जाए कैसे बच्चों का पेट पाल जाए हमारी सैलरी बढ़ाई जाए दिल्ली में रहने के बाद कितने कम पैसे कमाना समझदारी का काम नहीं है हमे गर्भवती महिला को लेकर बार-बार अस्पताल जाना पड़ता है जब तक उसका बच्चा नहीं हो जाता तब तक हम उसके साथ रहते हैं उसके बाद बच्चों का टीकाकरण कराना कोरोन कल जैसे आपदा में फील्ड में घूमने बाढ़ जैसी आपदा में साफ सफाई का ध्यान रखना अब डेंगू जैसी बीमारी चल रही है दिल्ली के अंदर उसमें भी हमारी ड्यूटी लगा दी जाती है फिर भी हमें तनख्वाह नहीं मिल रही है और मिलती है तो इतनी कम मिलती है कि इसमें तो हमारा गुजारा होता नहीं केजरीवाल सरकार हमेशा बेवकूफ बनाती है अब कैसे हम बेवकूफ बनने वाले नहीं है हम धरना जब तलक नहीं छोड़ेंगे तब तक हमारी मांगे पूरी नहीं होगी हम 28 अगस्त से यहां बैठे हुए हैं लगभग 20 दिन बीत चुके हैं सरकार का कोई भी नोमाइंदा हमसे यह पूछने नहीं आया है कि आपकी क्या मांगे हैं
