गरीबों की 2 जून की रोटी खाने की कहानी संजय केशरी की जुबानी जी हां! आज हम बात कर रहे हैं एक ऐसे शख्स की जो आज एक समाजसेवी के रूप में नहीं बल्कि आम आदमी के रूप में गरीबों की 2 जून की रोटी खाने की कहानी को दर्द बयां कर रहे हैं। एनसीपी क्षमिक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष संजय केशरी ने कोरोना जैसी वैश्विक महामारी की वजह से बिहार ही नहीं बल्कि पूरे भारत में जो गरीब एवं मजदूर वर्ग के लोगों से उनका रोजगार छीन उन्हें सड़कों पर लाकर खड़ा कर दिया है उन करोड़ों गरीब जनता के ऊपर इस वक्त क्या गुजर रही है उन्हें किस प्रकार की मुसीबतों से दो चार होना पड़ रहा है जबकि आप और हम सभी जानते हैं कि भारत में सरकारी राशन की दुकानों पर जहां दो और ₹3 में राशन खरीद कर जिंदगी काटते हुए बहुत सारे लोगों को आपने जरूर देखा होगा इतने सस्ते में अनाज मिलने की वजह से इन गरीबों की 2 जून की रोटी खाने का जुगाड़ हो पाती है इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है वर्ष 2013 में बना राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा कानून जहां पर सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह सबसे गरीब लोगों तक सस्ता अनाज पहुंचाएं इससे क्या आपको लगता है कि नए कृषि कानून लागू होने से सरकारी राशन भंडार व्यवस्था प्रभावित होगी क्या सरकारी राशन दुकानों पर लोगों को राशन मिल पा रही है या दानों दानों के मोहताज हैं सरकार से आम आदमी को क्या उम्मीदें हैं और सरकार अब तक उनकी उम्मीदों पर क्यों खड़ी नहीं उतर रही है इन सभी बातों का खुलासा करते हुए संजय केशरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आम लोगों के लिए राहत एवं मदद का हाथ बढ़ाने का आग्रह किया है।
