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सुषमा कुमारी,जिला बोकारो के पेटरवार प्रखंड स्थित तेनुघाट से मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि बोकारों जिले में 12 जगहों पर खोली गई है सरकारी शराब की दुकानें।इस तरह की दुकानें लोगों के लिए अनुचित है लेकिन सरकार सिर्फ अपना फायदा देखती है.इससे जनताओ तथा खासकर युवाओं को क्या प्रभाव पड़ेगा इससे सरकार को कोई मतलब नहीं है।शराब की लत से लोगो की स्थिति दयनीय होती जा रही है।इसके लत के कारण लोगो द्वारा अपने बच्चों की पढ़ाई -लिखाई पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है।यह मामला खासकर न्यूनतम या माध्यम वर्ग के परिवार में आता है.वही इस शराब के कारण कुछ लोग अपनी पत्नी और बच्चों की पिटाई भी करते है जिसकारण घरों का माहौल गंभीर होता जाता है।शराब के कारण लोगो द्वारा दहेज़ की मांग भी की जाती है और अगर दहेज़ देने से इंकार किया जाता है तो जान से मार भी दिया जाता है अर्थात शराब पीकर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है।इसलिए इनका सरकार से निवेदन है कि जनताओ को होने वाली मुश्किलें,परेशानियों और नुकसानों को गहराई से सोचकर इसपर कोई भी कानून या मामले को लागु करे।

बोकारो झारखण्ड से सुषमा कुमारी ने मोबाईल वाणी के माध्यम से बताया कि सरकार द्वारा शराब बिक्री को बढ़ावा दिया जा रहा है ,जिस कारण युवाओ को इसकी आदत हो सकती है तथा उनका भविष्य अंधकारमय हो जायेगा।सरकार को समाज के प्रति नैतिक जिम्मेवारी को ध्यान में रखते हुए,शराब बिक्री को बढ़ावा बिलकुल नही देनी चाहिए।सरकार को बच्चों एवं युवा-वर्ग को जहाँ शिक्षा के प्रति जागरूक करना चाहिए ,वहीं नई पीढ़ी को शराब के कारोबार के लिए प्रेरित कर रही है।शराब के सेवन से समाज में कुरीतियाँ फैलेगी और परिवार बिखरने की भी सम्भावना रहती है।गाँव के विकास एवं बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए,सरकार को "शराब-बिक्री" पर नही,बल्कि "शराब-बंदी" पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

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जिला बोकारो प्रखंड पेटरवार से सुषमा जी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है की इनके ग्राम पंचायत में कई ऐसे लोग हो जो सामाजिक कार्य करते है जैसे की महिलाओ व वृद्ध लोगो का वृद्धा पेंशन का फॉर्म भर कर वृद्धा पेंशन की राशि दिलवाना पर अभी इनके गावं में 500 शराब की भट्टी है जो सामाजिक लोगो को उनके ,सामाजिक कार्यो से भटका रही है।इन शराब की भट्टियों से दिन प्रतिदिन पंचायत का विकास होने की जगह पर लोगो की आर्थिक स्थिति ख़राब हो रही है। इतना ही नहीं बच्चो के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी किया जा रहा है।ग्राम पंचायत में चल रहे शराब की इन भट्टियों पर कोई क़ानूनी कारवाई नहीं की जाती है और ना ही जांच के लिए कोई इस तरफ पुलिस के अधिकारीगण आते है।अगर गावं में कोई वयक्ति शराब के खिलाफ आवाज उठाता है तो उसकी आवाज को दबा दिया जाता है। गावं में जितने भी शराब के दुकान वे सारे मिलकर विरोध करने वाले को गाली गलौज करते है। इस तरह से कभी भी समाज का विकास नहीं होगा।

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