भाजपा ओबीसी मोर्चा के सहायक सदस्यता प्रभारी बने लालचंद।लोगों ने दी ढ़ेरों बधाईयाँ।ऑडियो पर क्लिक कर सुनें पूरी खबर को।
साप्ताहिक समीक्षा में मुख्यमंत्री जनसंवाद बोकारो जिले से एक मामले का चयन किया गया।ऑडियो पर क्लिक कर सुनें पूरी खबर को।
उप विकास आयुक्त ने की योजनाओं की समीक्षात्मक बैठक की गयी। जिसमें कई सरकारी सुविधाओं की समीक्षा की गयी।सुनिये की किन-किन योजनाओं के बारे क्या निर्देश दिया गया।
विधानसभा की प्रश्न एवं ध्यानाकर्षण समिति की बैठक।जिले में लंबित विकास कार्यों के समीक्षा के लिए यह बैठक की गयी। ज्यादा जानकारी के लिए सुनें पूरी खबर को।
ग्रामीणों को रसोई गैस कनेक्शन उपलब्ध करवाने के लिए उपाध्यक्ष ने की बैठक। इस बैठक में उन्होंने कहा सभी लोगों को सरकारी सुविधाओं का लाभ मिलना चाहिए।जानकारी के अभाव में रह जाते हैं लोग सुविधाओं से वंचित।और क्या हुआ बैठक में सुनिये इस खबर के माध्यम से।
Transcript Unavailable.
झारखण्ड राज्य के बोकारो जिला के कसमार प्रखंड से कमलेश जयसवाल मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि कसमार प्रखंड के गररी पंचायत का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण सरकारी तालाब-कलोंदी बाँध का अस्तित्व आज खतरे में दिखाई दे रहा है ।करीब 18 एकड़ भू-भाग में फैले यह तालाब कभी डैम की तरह लबालब पानी भरा रहता था ।जो वर्तमान मे बिलकुल जल विहिन हो गया है ।पुरे तालाब में घास फुस जलकुंभी दलदल से भर गया है ।अतिक्रमण की वजह से यह तालाब सिकुड़ता जा रहा है ।जब से इस तालाब का निविदा मछली पालन हेतु होने लगा है उसी समय से इस तालाब का दुर्दशा शुरू हुआ है ।पहले यह जलमग्न रहता था ।कसमार का कलोंदी बांध बोकारो के गरगा डैम का उदगम स्थल है ।जो 35किलोमीटर तक कसमार जरीडीह चास प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों से गुजरते हुए यह बोकारो गरगा डैम बना है ।लेकिन आज यह बांध अपना अस्तित्व खोने के कगार पर खड़ा है ।कई बार मिटटी खुदाई के नाम पर सरकारी राशि का बंदरबाट होते रहा हद्वापर युग में गगॅ ऋषि की तपोभूमि कलोंदी बाॅध हुआ करता था । गर्ग ऋषि ने कंश को मारने के लिए इसी कलोंदी बांध के तट पर तप किए थे ।इसलिए इस तालाब का नाम कलोंदी बांध पडा।यह तालाब आस्था का प्रतीक हुआ करता था ।शादी विवाह से लेकर धार्मिक अनुष्ठान में यहाँ के पानी का उपयोग होता था ।कालांतर में गंदगी के कारण तालाब का पानी का उपयोग करना लोग छोड़ दिए।इस तालाब का पानी कभी बहुत ही स्वच्छ साफ निर्मल हुआ करता था।लेकिन उपेक्षा के कारण तालाब पर संकट के बादल मंडराने लगे।तालाब के कायाकल्प की जरूरत है ।ग्रामीणों ने इसे अविलंब विरासत स्थल के रूप में विकसित करने की मांग किए हैं ।इस तालाब के अस्तित्व को लेकर ग्रामीणों में काफी चिंता और प्रशासन के प्रति आक्रोश व्याप्त है.
झारखण्ड राज्य के जिला बोकारो प्रखंड नावाडीह से जे.एम.रागीला झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से दिलिप महतो का साक्षात्कार लेते हुए वे कहते है, कि हर माँ बाप का सपना होता है कि उनके बच्चे पढ़ लिख कर डॉक्टर,इंजीनियर या कोई अधिकारी बने। बोकारो एक औद्योगिक जिला है लेकिन इस क्षेत्र में उच्च शिक्षण संस्थान उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण विद्यार्थियो को दूसरे शहर जाना पड़ता है। वे सरकार से आग्रह करते है कि बेरमो, बोकारो क्षेत्र में भी उच्च शिक्षण उपलब्ध कराई जाए।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग ज़िला से राजेश्वर महतो की बातचीत झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से लक्ष्मी कुमारी से हुई। बातचीत के दौरान लक्ष्मी कुमारी ने बताया कि वो बिष्णुगढ़ डिग्री कॉलेज में समाज शास्त्र की छात्रा हैं। वो बताती हैं कि कॉलेज का चुनाव करने से पहले यह देखना आवश्यक हैं कि संस्थान भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त हो।वो पढ़ लिख कर रांची में जी.डी.ए का प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं और प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद वो गरीबों व असहाय बुजुर्गों की सेवा करना चाहती हैं। लक्ष्मी कुमारी यह भी बताती हैं कि वो निम्न वर्ग से सम्बन्ध रखती हैं। उनके अनुसार उनके क्षेत्र में ही उच्च शिक्षण संस्थान जैसे मेडिकल कॉलेज,इंजीनियरिंग कॉलेज के साथ इलेक्ट्रीशियन,पत्रकार ,ब्यूटिशियन आदि का भी प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए ताकि अभिभावकों को ज़्यादा ख़र्च की चिंता न करना पड़े।लक्ष्मी कुमारी के अनुसार अपने राज्य में ही रह कर उच्च शिक्षा प्राप्त करना ज़्यादा अच्छा हैं।
झारखण्ड राज्य के बोकारो जिला के गरी पंचायत के सेवानिवृत शिक्षक दुर्गा प्रसाद प्रजापति जी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि झारखण्ड में शिक्षा की हालत बहुत ख़राब है खासकर उच्च शिक्षा की हालत निम्नस्तरीय है। इसके मुख्य कारण है कि कॉलेजों में अच्छे शिक्षकों के पद रिक्त पड़े हुए है। अच्छे प्रोफ़सरों और लेक्चरर की नियुक्ति नहीं हो पाती है।इसी तरह उच्च विद्यालय में भी काफी सारे पद खाली पड़े है।खासकर के प्रधानाध्यापक के 90 प्रतिशत पद खाली है।इस वजह से अनुशासन में कमी आ रही है। शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है। विद्यार्थी पहले जैसे नहीं है वे शिक्षकों की बात नहीं मानते है पढाई में उनकी रूचि नहीं दिखती है। आजकल मोबाइल का युग है पढाई छोड़कर बच्चे मोबाइल और इधर-उधर की बाते करते है। उच्च शिक्षा में राजनीति का प्रवेश हो गया है। उच्च शिक्षा की निम्न स्तरीय होने का एक और कारण की कॉलेजों में विद्यार्थी राजनीति करने लगे है । शिक्षा और विद्यार्थियों की इस हालत का ज़िम्मेदार उनके अभिभावक है उनको अपने बच्चों पर ध्यान देने की जरुरत है।इसमें सिर्फ सरकार का दोष नहीं है यह सिर्फ सरकार की बस की बता नहीं है इसमें सरकार के साथ साथ विद्यार्थी और शिक्षकों और अभिभावकों का भी योगदान जरुरी है।उच्च शिक्षा में सुधार के लिए शिक्षकों के रिक्त पदों को भरना होगा ,कॉलेज को राजनीति से दूर रखना होगा। शिक्षा में जिन कारणों से गिरवाट आ रही है उन सभी कारणों पर ध्यान देकर उन्हें दूर करना होगा।जैसे की प्रखंड स्तर पर कॉलेजों और उच्च विद्यालय और स्थापित होने चाहिए। क्योंकि इसकी कमी के कारण लड़किया आगे उच्च शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाती है। साथ ही सभी तरह के संस्थानों में एक तरह की शिक्षा होनी चाहिए।इतना ही नहीं शिक्षकों को सिर्फ पढ़ाई का कार्य दिया जाना चाहिए उन्हें दूसरे कार्यो से दूर रखा जाना चाहिए, साथ ही बच्चो को ससमय किताबे उपलब्ध होनी चाहिए । तभी हमारे राज्य में शिक्षा का क्षेत्र आगे बढ़ेगा।
