झारखण्ड राज्य के बोकारो जिला के कसमार प्रखंड से कमलेश जयसवाल मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि कसमार प्रखंड के गररी पंचायत का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण सरकारी तालाब-कलोंदी बाँध का अस्तित्व आज खतरे में दिखाई दे रहा है ।करीब 18 एकड़ भू-भाग में फैले यह तालाब कभी डैम की तरह लबालब पानी भरा रहता था ।जो वर्तमान मे बिलकुल जल विहिन हो गया है ।पुरे तालाब में घास फुस जलकुंभी दलदल से भर गया है ।अतिक्रमण की वजह से यह तालाब सिकुड़ता जा रहा है ।जब से इस तालाब का निविदा मछली पालन हेतु होने लगा है उसी समय से इस तालाब का दुर्दशा शुरू हुआ है ।पहले यह जलमग्न रहता था ।कसमार का कलोंदी बांध बोकारो के गरगा डैम का उदगम स्थल है ।जो 35किलोमीटर तक कसमार जरीडीह चास प्रखंड के विभिन्न क्षेत्रों से गुजरते हुए यह बोकारो गरगा डैम बना है ।लेकिन आज यह बांध अपना अस्तित्व खोने के कगार पर खड़ा है ।कई बार मिटटी खुदाई के नाम पर सरकारी राशि का बंदरबाट होते रहा हद्वापर युग में गगॅ ऋषि की तपोभूमि कलोंदी बाॅध हुआ करता था । गर्ग ऋषि ने कंश को मारने के लिए इसी कलोंदी बांध के तट पर तप किए थे ।इसलिए इस तालाब का नाम कलोंदी बांध पडा।यह तालाब आस्था का प्रतीक हुआ करता था ।शादी विवाह से लेकर धार्मिक अनुष्ठान में यहाँ के पानी का उपयोग होता था ।कालांतर में गंदगी के कारण तालाब का पानी का उपयोग करना लोग छोड़ दिए।इस तालाब का पानी कभी बहुत ही स्वच्छ साफ निर्मल हुआ करता था।लेकिन उपेक्षा के कारण तालाब पर संकट के बादल मंडराने लगे।तालाब के कायाकल्प की जरूरत है ।ग्रामीणों ने इसे अविलंब विरासत स्थल के रूप में विकसित करने की मांग किए हैं ।इस तालाब के अस्तित्व को लेकर ग्रामीणों में काफी चिंता और प्रशासन के प्रति आक्रोश व्याप्त है.
