प्रखंड कार्यालय के निकट स्थित चिल्ड्रन पैराडाइस स्कूल में शनिवार को वार्षिक खेल-कूद कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस अवसर पर विद्यालय के सैकडों बच्चों ने विभिन्न खेलों में हिस्सा लिया. इस दौरान विद्यालय परिवार द्वारा लंबी कूद, ऊंची कूद, दौड़, रस्सी कूद, म्यूजिकल रेस, जलेबी रेस सहित अन्य खेलों का आयोजन किया गया. इस प्रतियोगिता में प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले सभी बच्चों को विद्यालय के प्राचार्य द्वारा शील्ड एवं मैडल देकर सम्मानित किया गया. संपूर्ण प्रतियोगिता के दौरान सभी बच्चे हर्षित एवं उमंग से भरे नजर आए. इस दौरान विद्यालय के अध्यक्ष ब्रजेश मिश्रा व प्राचार्य विकाश कुमार ने बच्चों का हौसला बढ़ाते हुए कहा की जीत और हार खेल का हिस्सा है. विद्यार्थी जीवन में जब भी मौका मिले विद्यार्थियों को खेलों में शामिल होना चाहिए और अपनी ओर से जीत की पूरी कोशिश करनी चाहिए. प्रतियोगिता से बच्चों में मौजूद हुनर की परख होती है. इस अवसर पर विद्यालय के अभिषेक कुमार, सचिव अमित कुमार सिन्हा, अरविंद कुमार, सिंटू कुमार, अबोध गुरु, अन्नू प्रसाद, काजल कुमारी, अर्चना कुमारी, संजीदा बानो, नीतू सिन्हा, प्रमिला कुमारी, समायरा परवीन सहित विद्यार्थी उपस्थित थे.
पेटरवार प्रखंड अंतर्गत कोह पंचायत के सरला खुर्द गांव के काला पहाड़ टोला में बिरसा कृषि विश्व विद्यालय रांची की ओर से शनिवार को पशुधन जागृति अभियान, पशु बांझपन सह जागरूकता सेमिनार का अयोजन किया गया. इस शिविर में पंचायत क्षेत्र के विभिन्न गांवों से काफी संख्या में पशुधन पालक महिला-पुरुष शामिल हुए. कार्यक्रम में मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी विभाग झारखंड सरकार का भरपूर सहयोग रहा. एक दिवसीय सेमिनार के दौरान पंचायत के मुखिया राजेंद्र रजवार, जिला पशुपालन पदाधिकारी बोकारो डॉ मनोज कुमार मणि, वेटनरी कॉलेज रांची के सहायक प्रोफेसर डॉ बसंत सिंह, डॉ मधु रेंदरर बच्चन, डॉ थानेस उरांव, डॉ उमेश कुमार ने पशु बांझपन शिविर में किसानों को बांझपन से निदान और बचाव करने की महत्वपूर्ण जानकारी दी. सेमिनार में पशुओं का प्रबंधन, पशु आहार, टीकाकरण, देख -रेख आदि बिंदुओं पर विस्तार से बताया गया. सेमिनार के दौरान मुख्यमंत्री पशुधन योजना के संबंध में विस्तार से बताया गया. सेमिनार के दौरान पशुधन के गोबर का जांच भी कार्यक्रम स्थल पर किया गया और क्षेत्र के करीब डेढ़ सौ पशुपालकों के बीच कैल्शियम, मिनरल मिक्सचर और जोंक की दवा उपलब्ध कराया गया। इस खबर को सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें।
पेटरवार तथा आस -पास कृषि बहुल क्षेत्रों में तीन दिवसीय बाउंडी परब धूम -धाम के साथ शनिवार को मनाया गया. इस अवसर पर आज अहले सुबह महिलाएं घर आंगन की साफ -सफाई व गोबर से लिपाई करने के बाद नहा -धो कर बाउंडी पीठा बनाने में जुट गयीं और सुबह होते ही उस पीठा व पकवान को अपने इष्ट देवी देवता सहित पित्तरों को अर्पण करते हुए पूजा अर्चना किये. उसके बाद प्रसाद स्वरुप सभी मिल कर खाये और घर पर जितने लोग पहुंचे उन्हें आदर के साथ खिलाया गया. इसके पूर्व गुरुवार को चारधोवा व शुक्रवार को चावल का गुंडी कुटा कार्यक्रम किया गया. गुंडी ढेकी से कूट कर बनाया गया. आज दोपहर व शाम को मांस भात खाने की परिपार्टी का निर्वहन किये. इसीलिए पेटरवार के झटका मिट दुकानों व मुर्गा दुकानों में भारी भीड़ लगी रही. गाँवों में भी लोग खस्सी का हिस्सा लगाये. रविवार को दही-चूड़ा नेग :- रविवार को नहा-धो कर दही चूड़ा कार्यक्रम किया जायगा. जिसमें घर के उत्पादित धान को ढेकी से चूड़ा बना कर अपने इष्ट देवी देवता को भोग लगाते हैं. साथ ही टुसु परब महोत्सव हर गाँवो में मनाया जायगा. टुसु व बाजा गाजा के साथ नगर भ्रमण व जलाशयों में विसर्जन किया जायगा. टुसु स्थापना कई दिनों पूर्व करते हैं. यह प्रचलन आदिवासी कुड़मी, मूलवासी सहित अन्य जातियों में जो कृषि से उत्पन्न किये गए धान चावल की पूजा -पाठ व अराधना करते हैं
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