झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि पुरुष महिलाओं के अधिकार के खिलाफ होते हैं। क्योंकि पुरुषों के अनुसार, मताधिकार मिलने से पुरुष महिलाओं का भरण-पोषण करने में असमर्थ हो जायेंगे। तलाक की दर में भारी वृद्धि होगी और महिलाओं को श्रम बाजार में प्रवेश करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।राजनीतिक जिम्मेदारियाँ पहले से ही व्यस्त महिलाओं पर आरोप बोझ बढ़ा देंगी। नई महिला की छवि पत्नियों और मताओं के रूप में उन्हें प्राप्त सम्मान और प्रतिष्ठा को नष्ट कर देगी।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राहुल शुक्ला ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारत के लोग महिलाओं के लिए समान अधिकार चाहते हैं।बल्कि अगर पुरुष महिलाओं को अधिकार नही देते हैं तो यह असामान्य और अन्यायपूर्ण व्यवहार होगा। ये भारतीय हैं और इन्होने अंतर को महसूस किया है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि प्रत्येक महिला और लड़की को यौन और प्रजनन संबंधी अधिकार प्राप्त है।इसका अर्थ है कि उन्हें गर्भ निरोधक और सुरक्षित गर्भपात जैसी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँंच का अधिकार है। उन्हें यह चुनने का अधिकार है की वे कब,किससे और कैसे शादी करें।उन्हें यह भी तय करने का अधिकार है कि वे बच्चे पैदा करनाा चाहती हैं या नहीं। महिलाओं को लिंग आधारित हिंसा के भय के बिना जीने में सक्षम होना चाहिए।लेकिन सभी महिलाओं को इन अधिकारों का आनंद लेने में अभी लम्बा समय लगेगा।उदाहरण के लिए दुनियां भर में कई महिलाएं और लड़किया अभी भी सुरक्षित और कानूनी गर्भपात कराने में असमर्थ हैं।कई देशों में जो लोग गर्भपात करना चाहते हैं या जिन्हें इसकी आवश्यकता है,उन्हें अक्सर एक असंभव विकल्प चुनने के लिए मजबूर होना पड़ता है। ऐसे लोगों को या तो अपनी जान जोखिम में डालना पड़ता है या जेल जाना पड़ता है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से अनिज रावत ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि सदियों से और आज भी कार्यकर्ता महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।उनमे से एक है - महिलाओं का मताधिकार।1893 में महिलाओं के मताधिकार के लिए आंदोलन शुरू हुआ। न्यूजीलैंड (माओरी भाषा में ओटेरोवा) 1893 में राष्ट्रीय स्तर पर सभी महिलाओं को मताधिकार देने वाला दुनिया का पहला देश बना। यह आंदोलन विश्व भर में फैल गया और इस संघर्ष में शामिल सभी लोगों के प्रयासों के कारण आज महिलाओं को मताधिकार प्राप्त है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि कई वर्षों से महिला अधिकार आंदोलन असमानता को दूर करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।कानूनों में बदलाव के लिए अभियान चला रहे हैं। ताकि कानून अगर बदल जाए तो हम लोगों के लिए कुछ फायदेमंद हो या अपने अधिकारों के सम्मान की मांग करते हुए सड़कों पर उतर रहे हैं।डिजिटल युग में नए आंदोलन भी देखा जा रहा है। जैसे कि हैजमीटो अभियान,जो लिंग आधारित हिंसा और यौन उत्पीड़न की व्यापकता को उजागर करता है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि हम सभी को मानवाधिकार प्राप्त हैं।इनमें हिंसा और भेदभाव से मुक्त जीवन जीने का अधिकार है। शारीरिक और मानसिकता स्वास्थ्य के उच्तम संभव स्तर का आनंद लेने का अधिकार,शिक्षा प्राप्त करने का अधिकार,संपत्ति रखने का अधिकार,मतदान करने का अधिकार और समान वेतन अर्जित करने का अधिकार भी शामिल है।लेकिन विश्व में आज भी कई महिलाओं और लड़कियों को लिंग और लैंगिक पहचान के आधार पर भेदभाव का सामना करना पड़ता है।लैंगिक आसमानता कई ऐसी समस्याओं की जड़ है जो महिलाओं और लड़कियों को प्रभावित करती है
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाएं अपने अधिकार नही ले पाती हैं। इसके कई कारण हैं।जैसे अशिक्षा,क़ानूनी जानकारी का अभाव, पितृ सत्तात्मक मानसिकता,इत्यादि।समाज और परिवार में पुरुषों को महत्व देने वाली सोच,महिलाओं की आवाज को दबा दिया जाता है।संपत्ति का स्वामित्व ना होना और रोजगार के अवसरों की कमी के कारण महिलाओं को आर्थिक रूप से पुरुषों पर निर्भर रहना पड़ता है।साथ ही सामाजिक दबाव,बदनामी और परिवार टूटने का डर, महिलाओं को अपने अधिकार के प्रति उदासीन रखता है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से अनुरुद्ध राजा ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाएं अपने अधिकार नही ले पाती हैं। इसके कुछ मुख्य कारण हैं।जैसे - ,रूढ़िवादी सामाजिक ढांचा,शिक्षा की कमी,क़ानूनी जानकारी का अभाव,आर्थिक निर्भरता और पितृ सतात्मक मानसिकता,इत्यादि।अशिक्षित महिलाओं को अपने अधिकार ना ले पाने का पछतावा होता है। समाज में व्यापक भेदभाव,घरेलू हिंसा का डर और न्याय पाने की लंबी महंगी प्रक्रिया भी उन्हें पीछे खींचती है।अपने अधिकार पाने के लिए महिलाओं को शिक्षित,जागरूक और क़ानूनी जानकर होना चाहिए ।
कल के नेता, आज की आवाज़” केवल एक नारा नहीं, बल्कि एक आह्वान है—युवाओं के लिए, समाज के लिए और नीति निर्माताओं के लिए। यदि युवाओं को सही दिशा, प्रशिक्षण और अवसर दिए जाएं, तो वे भूमि न्याय के आंदोलन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकते हैं। भविष्य का भारत तभी सशक्त और न्यायपूर्ण होगा, जब आज की युवा आवाज़ भूमि पर समान अधिकार की मांग को मजबूती से उठाएगी। तब तक आप हमें बताइए कि , *--- आपके परिवार में जमीन किसके नाम है? क्या महिलाओं का नाम भी उसमें शामिल है *--- “हम अपने परिवार और समाज में ऐसी कौन-सी पहल कर सकते हैं, जिससे महिलाओं को ज़मीन में बराबर की हिस्सेदारी सुनिश्चित हो? *--- “अगर महिलाओं के नाम जमीन हो जाए, तो आपके हिसाब से उनकी ज़िंदगी में क्या-क्या बदल सकता है?”
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार महिलाओं को भूमि में बेटों के बराबर हिस्सा मिलना चाहिए।अगर किसी पिता का एक बेटा और एक बेटी है तो उस पिता की जितनी भी टोटल संपत्ति,भूमि या पैसे हैं,उनमे बेटी को बेटों के बराबर हिस्सा मिलना चाहिए।विवाद के डर से महिलाएं अपना हक़ नही लेती हैं।उन्हें लगता है सम्पत्ति मांगने पर ससुराल पक्ष और मायके में भाई से विवाद और दुश्मनी हो जाएगा।
