झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि नई पीढ़ी का कहना है कि अकेले कृषि क्षेत्र उन्हें एक आरामदायक जीवन नहीं दे सकता है। भारत में कृषि क्षेत्र जिस गंभीर संकट से गुजर रहा है उसका एक संकेत ऐसे किसानों की बढ़ती जमात से मिल रहा है जो कृषि छोड़कर दूसरे पैसे चुन रहे हैं। लोगों का कहना है कि कृषि में मेहनत अधिक और आय कम हैं। इसलिए लोग कृषि नहीं करना चाहते हैं

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग से गीता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि किसानों का शहरों की ओर पलायन  कम आय, शिक्षा और  स्वास्थ्य समस्याओं  से उपजी समस्या है, जबकि गाँव में ही कृषि का विकल्प,जैसे- फूड प्रोसेसिंग, जैविक खेती, पशुपालन,इत्यादि खोजना एक दीर्घकालिक और बेहतर समाधान है। लेकिन,अचानक खर्चे के लिए पैसे चाहिए और इस जरूरत के लिए मौसमी पलायन भी जरूरी हो जाता है। कृषि का विकल्प गाँव में खोजना एक स्थायी समाधान हो सकता है। कम पानी वाली फसलों को लगाया जा सकता है। गाँव के पास ही कृषि से जुड़े छोटे उद्योग (जैसे- दूध डेयरी, अचार-पापड़, जूट लगा सकते हैं। मछली पालन, मधुमक्खी पालन, या जैविक खेती भी किसानों के लिए एक उत्तम विकल्प है।

झारखंड राज्य के हजारीबाग जिला से पिंकी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि हमें जल के महत्व को समझना चाहिए और इसे बचाने के उपाय करने चाहिए। छोटी-छोटी आदतें जैसे नल को बंद रखना, वर्षा जल संचयन करना, गंदा पानी न बहाना ये सब मिलकर जल संकट को कम करने में सहायक हो सकते हैं। बर्तन धोने और नहाने में पानी की कम मात्रा का उपयोग। वर्षा जल संचयन पानी बह जाने से बचने के लिए बर्तनों और गमलों में पानी जरूरत के अनुसार भरेंसमुदाय में तालाब, झील और जलाशयों का संरक्षण करना जरुरी है ।पेड़ लगाकर भी पानी की बर्बादी रोकी जा सकती है।

झारखंड राज्य के हजारीबाग जिला से पिंकी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि भीषण गर्मी या ठंड से फसल को बचाने के लिए स्मार्ट सिंचाई बेहद असरदार है। जैसे ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई से कम पानी में अधिक समय तक मिट्टी की नमी बनाए रखी जा सकती हैफसलों की जरूरत के अनुसार समय पर सिंचाई करें और जल का कुशल उपयोग करें। शाम के समय पानी देने से अधिक लाभ मिलता है।वर्षा जल संचयन तालाब और जल निकाय बना कर बारिश का पानी बचाया जा सकता है सर्दियों में पाले और ठंड से सब्ज़ियों को बचाने के लिए पौधों को ढकना, हल्की सिंचाई और उपयुक्त संरक्षण जैसे टनल तकनीक अपनाएं जा सकते हैं फसल पर कीट या रोग के शुरुआती लक्षण तुरंत पहचान कर जैविक या नियंत्रित कीटनाशक का उपयोग किया जा सकता है

झारखंड राज्य के हजारीबाग जिला से पिंकी मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती हैं कि बेमौसम बारिश से फसल खराब हो जाते हैं। बारिश के कारण मिट्टी में नमी बहुत बढ़ जाती है। जलभराव के कारण सब्जी के पौधों की जड़ों पर फंगस लग रहा है। खेतों में पानी भरने से आलू में झुलसा रोग हो रहा है। पौधे पीले होकर सूख रहे हैं। मटर की फसल भी बारिश से प्रभावित हुई है। फसलों को बचाने के लिए जल निकासी की व्यवस्था पर ज्यादा ध्यान दिया है इसके बाद एक लीटर पानी में 2 ग्राम कॉपर ऑक्सीक्लोराइड का घोल बनाकर सब्जी के पौधों की जड़ों में डाला है।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि देश में लगभग 80 परसेंट लोग कृषि पर निर्भर हैं।किसानों को फसल उगाने में जितना पूंजी लगता है उतना बेचने पर भी मूल्य नहीं निकल पाता है।किसानों का कहना है कि फसल उगाने में कई तरह परेशानियां आती हैं। कई जगह फसल में सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता है। फसल में पानी के कमी होने के कारण वह अच्छी तरह से तैयार नहीं हो पाता है और कभी कभी जरूरत से अधिक बारिश होने पर भी फसल खराब हो जाता है