झारखण्ड राज्य से टेक नारायण प्रसाद कुशवाहा मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि जमीन में समाज में एक अलग स पहचान, सम्मान ,सशक्तिकण ,आर्थिक, सामाजिक ,महत्वाकांक्षा का महत्व देता है। महिलाओं के नाम से जमीन की पट्टा मिलने या वन जंगल का पट्टा मिलने से महिलाओं में आत्मनिर्भर ,आत्म स्वाभिमानी और महिला उस घर की एक सशक्त महिला के रूप में उभरने का स्वाभिमान प्राप्त होता है। महिलाएं पुरुषों को अधिकार नहीं देना चाहते हैं और वह अपने अधीन ही रखना चाहते हैं । पुरुष को यह बात की जागरूकता होना चाहिए कि जमीन महिलाओं के नाम से पट्टा मिलता है तो महिला उस घर की स्वाभिमानी कहलाती है और उस घर में उनकी बहुत बड़ी महत्व देखने को मिलता है तथा इससे महिलाओं के लिए आबादी को एक स्वाभिमान प्राप्त होता है और हमारे देश को एक सशक्तिकरण मिलने की बात कही जाती है जो आज महिलाओं के नाम से जमीन का पट्टा बनाने से महिलाओं में आत्मस्वाभिमान उत्पन्न होता है।

झारखंड राज्य के हजारीबाग जिला से साजिद अंसारी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिलाओं के नाम से जमीन होना चाहिए ।महिलाओं को जमीन में अधिकार मिलने से सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा मिलती है और कानूनी फायदे भी मिलते हैं ।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से उपेंद्र केशरी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि महिलाओं के नाम से जमीन होने से वह आर्थिक रूप से अधिक स्वतंत्र और आत्मविश्वासी बनती हैं

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं के नाम जमीन होने के कई फायदे हैं।जैसे - प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत यदि घर किसी महिला के नाम पर है या घर में एक महिला सह मालिक है तो उन्हें 6.5 प्रतिशत तक की सब्सिडी मिलती है।यदि पति पत्नी मिलकर ज्वाइंट प्रोपर्टी खरीदते हैं और महिला उसमें बराबर के हिस्सेदार हैं तो उन्हें आयकर में भी छूट मिल सकती है।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिला खरीदारों के लिए रियल एटेट में लाभ मिलता है। कई राज्य सरकारें अपने नाम पर संपत्ति पंजीकृत कराने वाली महिलाओं को विभिन्न प्रोत्साहन दे रही है। भारत में महिलाओं को अचल संपत्ति में निवेश करने और संपत्ति का स्वामित्व प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहन किया जा रहा है। क्योंकि इससे उन्हें वित्तीय सुरक्षा और संतरता मिलती है। किसी महिला के नाम पर सम्पत्ति पंजीकृत कराने से विवादों की स्थिति में उनके अधिकारों की रक्षा होती है और सम्पत्ति पर उनका नियंत्रण सुनिश्चित होता है।

विष्णुगढ़ प्रखंड मुख्यालय सभागार में सोमवार को पेयजल स्वच्छता विभाग प्रखंड कोऑर्डिनेटर राजेश कुमार की अध्यक्षता में प्रखंड के विभिन्न गांव से पहुंचे जलसहिया के बीच बैठक किया गया।इस बैठक में मुख्य रूप से ब्रजेश कुमार पंकज कुमार दशमी देवी अनीता देवी सुनीता देवी गेंदो देवी रेखा कुमारी उषा रानी रीना देवी कंचन देवी सज्जनती देवी ललिता देवी समेत बड़ी संख्या में जलसहिया मौजूद रहे।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से प्रिया कुमारी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारत में अधिकांश जमीन पुरुषों के नाम होने के पीछे मुख्य कारण ऐतिहासिक पितृसत्तात्मक व्यवस्था,पारम्परिक रीति रिवाज और कानूनी उत्तराधिकार के नियम रहे हैं। सदियों से पैतृक संपत्ति बेटों को मिलने की प्रथा और महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्र ना मानने की सामाजिक सोच ने यह नियम बनाया था।लेकिन अब क़ानूनी बदलाव हो रहे हैं।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से अंजलि कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि पैतृक संपत्ति वह होती है जो पिता की संपत्ति में उत्तराधिकारी के रूप में मिलती है। अगर कोई अन्य व्यक्ति संपत्ति में अधिकार देता है तो वह पैतृक संपत्ति नहीं माना जाता है। उत्तराधिकार कानून के अनुसार दिवंगत व्यक्ति की संपत्ति का वारिश बनने का कानूनी रूप अधिकार प्राप्त होता है। संपत्ति पर दावा करने के लिए उन्हें लीगल हाइपर सर्टिफिकेट के लिए आवेदन करना पड़ता है। यह प्रमाण पत्र यह सुनिश्चित करता है कि वे मृतक परिवार सदस्य की संपत्ति के वेद वारिस है।

झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से लक्ष्मी कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि भारतीय कानून वारिस वह व्यक्ति होता है जिसे कानून द्वारा किसी मृत्य व्यक्ति की संपत्ति उत्तराधिकार के रूप में प्राप्त होता है। किसी भी व्यक्ति के कानूनी वारिस का पहचान करना जरूरी होता है।

Transcript Unavailable.