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बाल विवाह मुक्त झारखण्ड अभियान की आठवीं कड़ी में आइये हम सुनते हैं बाल विवाह से जुडी एक कहानी जिसका नाम है "बबली का सफर" इस कहानी में बबली और सुनीता दो सहेली अपनी दशवीं की परीक्षा का परिणाम आने पर बेहद खुश है।बबली अपने कक्षा में हमेशा अव्वल आती है। बबली पढ़ लिख कर नर्स बनना चाहती है। लेकिन बबली के परिवार वाले उसकी शादी करवाना चाहते हैं। इस बात से बबली बहुत दुःखी है, और वो अपने सहेली सुनीता से सारी बात कहती है। सुनीता के समझाने पर बबली की माँ उसे आगे पढ़ाने को तो राजी हो जाती है पर क्या बबली के पिता जी इस बात से राजी होंगे...? क्या पूरा हो पाएगा बबली का नर्स बनने का सपना जानने के लिए सुनते रहिये "बबली का सफर" दोस्तों क्या आपके अनुसार लड़कियों के लिए उच्च शिक्षा का कोई महत्व है...? या फिर लड़कियों के लिए प्राथमिक शिक्षा ही काफी है।

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बाल अधिकार दिवस पर झारखण्ड की महामहिम राज्यपाल श्री मति द्रौपदी मुर्मू जी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से समाज और बच्चों के लिए यह सन्देश दी हैं कि आज यदि बच्चे सुरक्षित होंगे तभी हमारा देश सुरक्षित हो सकेगा। इसलिए केवल एक जगह ही नहीं बल्कि सभी विभाग में सही तरीके से लागु किया जाए साथ ही बच्चों को भी क़ानूनी जानकारी उनका अधिकार के बारे में दिया जाना चाहिए जिससे बच्चे जागरूक हो सकें और खुद को सशक्त करें

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झारखण्ड राज्य के जिला धनबाद ,प्रखंड बाघमारा से मोबाइल वाणी रिपोर्टर मदन लाल चौहान मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते हैं कि हमारा देश 15 अगस्त सन 1947 को आजाद हुआ।देश की आजादी में अनेकों माता-पिता ने अपने औलाद को खो दिया ,तो कइयों ने अपने भाई को कुर्बान कर दिया।और हजारों की संख्या में बच्चे अपने बालअवस्था में ही पिता के प्यार से महरूम हो गए।जैसे ही देश आजाद हुआ सम्पूर्ण देश जश्न के माहौल में डूब गया।आजादी के बाद से आज तक में देश का काफी विकास हो चूका है,लेकिन देश के आजादी में शहीद हुए जवानों का गांव ,घर एवं परिवारों की दशा आज भी जस की तस बनी हुई है। शहीद हुए जवानों की परिवारों को आज भी किसी सरकारी योजना जैसे पेंशन आदि की सुविधा बड़ी ही मुश्किल से मिलती है।एक बात गौर करने वाली यह भी है कि चुनाव के समय वोट बैंक के लिए बड़े -बड़े राजनेताओं द्वारा रैली निकालकर शहीद हुए जवानों को याद कर श्रधंजलि दी जाती है और उनके परिवारों से बड़े-बड़े वादे किये जाते हैं लेकिन ये वादे सिर्फ अख़बारों तक ही सिमटकर रह जाती है। और यही वजह है कि शहीद हुए जवानों की परिवारों की स्थिति आज भी दयनीय है। वे कहते हैं कि शहीद हुए जवानों की परिवारों की स्थिति में सुधार लाने के लिए देश में एक कानून बननी चाहिए जिसमें यह प्रावधान होने चाहिए कि देश सेवा यानि फ़ौज में शामिल हुए जवानों के पुत्र एवं भाई-भतीजा होने पर विधायक,सांसद एवं राज्य सभा के सदस्य के लिए नॉमिनेट किया जायेगा ,तभी जाकर राजनीतिक स्थिति में सुधार आयेगा ।