झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राज मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारत में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने वाले कई कानून हैं। जैसे - कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न रोकथाम निषेध और निवारण। इस 2013 अधिनियम का उद्देश्य महिलाओं को उनके कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न से बचाना और शिकायतों के निवारण के लिए एक तंत्र प्रदान करना है।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाओं के अधिकारों को बढ़ावा देने के लिए और उन लोगों के साथ भेदभाव न हो,इसके लिए कुछ नेताओं ने आंदोलन किया था। इस आंदोलन के परिणामस्वरूप आज महिलाओं को कुछ अधिकार मिल पा रहा है और भेदभाव से कुछ हद तक छुटकारा मिल पा रहा है। सावित्रीबाई फुले भारत की पहली महिला शिक्षिका,कवयित्री और समाज सुधारक थीं, जिन्होंने अपने पति ज्योतिबा फुले के साथ मिलकर भारत में महिलाओं के अधिकारों की उन्नति में महत्वपूर्ण योगदान दी।इसके बाद महिलाओं को अधिकार सम्बंधित जानकारी मिली और अपने अधिकारों के प्रति जागरूक हुई।
झारखंड आदिवासी संथाल समिति विष्णुगढ़ प्रखंड इकाई के तत्वाधान में कुसुमभा पंचायत के करारी बहाटांड परिसर में सोहराय पर्व का शुभारंभ किया गया।
भारतीय जनता पार्टी का एक बार फिर पूरे राज्य में जिला अध्यक्ष का चयन किया गया जिसमें हजारीबाग जिला अध्यक्ष विवेकानंद सिंह को फिर एक बार पुनः दोबारा जिला अध्यक्ष का पदभार कमेटी के द्वारा दिया गया वे कई सालों से भारतीय जनता पार्टी के सक्रिय कार्यकर्ता एवं संघर्ष नेता रहने के कारण उन्हें जिला अध्यक्ष बनाया गया जिला अध्यक्ष बनाए जाने पर विष्णुगढ़ प्रखंड कमेटी के द्वारा लोगों ने सोशल मीडिया के जरिए बधाई दिए बधाई देने वालों में सांसद प्रतिनिधि पश्चिम रविंद्र कुमार वर्णवाल पूर्वी नागेश्वर महतो मंडल अध्यक्ष सुरेश रजवार रवि कुमार पांडे किशोर कुमार मंडल शंकर बर्मन सुनील अकेला समेत कई सक्रिय कार्यकर्ताओं ने बधाई दिए।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि वर्तमान कानून के द्वारा हिंदू विवाह अधिनियम 1955 और बाल विवा निषेध अधिनियम 2006 के तहत लड़कियों के लिए शादी की कानूनी उम्र अठारह साल और लड़कों के लिए इक्कीस साल है। प्रस्तावित बदलाव,केंद्र सरकार ने महिलाओं के लिए कानूनी विवाह की उम्र को लड़कों बराबर 21 साल करने के लिए एक विधेयक पेश किए हैं। जिसे बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 के संशोधन के रूप में देखा जा रहा है। उद्देश्य यह है कि इस बदलाव का उद्देश बाल विवाह को रोकना, लड़कियों को शिक्षा और सशक्तिकरण के अवसर देना और उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से परिपक्व होने का समय देना है। समिति की सिफारिशें विधि आयोग और राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग जैसे संस्थाओं ने भी लड़के और लड़की के दोनों के लिए समान उम्र,18 साल की सिफ़िश की।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि कुछ मामलों में अगर बहु अपने बुजुर्ग सास ससुर को बहुत परेशान करती है जैसे लगातार झगड़े करना तो, अदालतों ने बुजुर्गो के शांतिपूर्ण जीवन के अधिकार को प्राथमिकता देते हुए बहु को घर से निकालने की अनुमति दी है।लेकिन इसके लिए भी उचित प्रक्रिया का पालन किया जाता है। प्रोपर्टी का स्वामित्व अगर पति के माता पिता की निजी संपत्ति है और पति का उस पर कोई कानूनी अधिकार नहीं है तो कोर्ट के पुराने फैसले में बहु के अधिकार सीमित किए गए थे। परन्तु हाल के फैसले में ससुराल वाले बहु को आसानी से घर से नही निकाल सकते हैं। ऐसा करने के लिए उन्हें कानूनी रास्ता अपनाना होगा। बहु को घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत आवास का अधिकार प्राप्त है, जब तक की कोई विशेष न्यायिक स्थिति ना हो।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि ससुराल वाले बहु को मनमाने ढंग से घर से नहीं निकाल सकते हैं। क्योंकि दिल्ली हाई कोर्ट के हालिया फैसलों के अनुसार शादी के बाद बहु का साझा घर में रहने का अधिकार होता है। भले ही घर उनके पति के माता पिता के नाम पर हो, उन्हें घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत कानूनी प्रक्रिया के बिना जबरन बेदखल नहीं किया जा सकता है।हालांकि कुछ दुर्लभ मामलों में जहाँ बहु बुजुर्ग सास -ससुर को परेशान करती है,अदालत ने उनके निष्कान पर विचार किया है। पर सामान्यतः बहु को सुरक्षित रहने का अधिकार है। बहु के अधिकार जैसे की साझा घर का अधिकार, शादी के बाद जिस घर में महिला रहती है वह उसका साझा घर बन जाता है और उसे वहाँ रहने का कानूनी अधिकार होता है। घरेलू हिंसा अधिनियम यह अधिनियम बहु को साझा घर में रहने का अधिकार देता है और उसे बेदखल होने से बचाता है।
झारखंड राज्य के हजारीबाग जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि गहना अगर ससुराल वाले ले लेते हैं तो उसको वापसी के लिए पति के खिलाफ याचिका दायर कर सकती हैं ।महिला संपत्ति को सुरक्षित रखने का हकदार हैं ।वह कानून का सहारा ले सकती हैं।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग़ जिला से राज कुमार मेहता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि ससुराल में महिलाओं को कई तरह के अधिकार दिए जाते हैं जैसे समान भरण पोषण का अधिकार और पति के संपत्ति में हिस्सा देना ।उनको ससुराल के घर में रहने का अधिकार होता है और घरेलू हिंसा से सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन जीने का हक है ।इसके लिए महिला कानून का सहारा ले सकती हैं ।घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 के तहत ससुराल के साजे के घर रहने का अधिकार होता है ।पति के संपत्ति में पत्नी का पूरा अधिकार होता है ।
झारखण्ड राज्य के हज़ारीबाग जिला से राजकुमार मेहता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि भारत की दस महिला स्वतंत्रता सेनानी ने इतिहास को आकार दिया है। जिनका नाम जो है - रानी लक्ष्मी बााई,बेगम हजरत महल,कस्तूरबा गाँधी,विजय लक्ष्मी पंडित, सरोजिनी नायडू,अरुणा आसाफली, मैडम भीकाजी कामा,कमला चटोपाध्याय,कितर चन्नमा और साविती भाई फुले। इन दस महिलाओं के द्वारा भारत में स्वतंत्रता,न्याय और समानता के लिए संघर्ष करने वाली साहसी महिलाओं का लंबा इतिहास है। रानी लक्ष्मी बााई से लेकर सरोजिनी नायडू तक भारत में सैकड़ों स्वतंत्रता सेनानी हुई।जिन्होंने देश की स्वतंत्रता में अमूल्य योगदान दिया।
