Transcript Unavailable.
बारह सौ छियानबे छात्रों को माध्यमिक विद्यालय में और सात सौ चौरासी छात्रों को पंडित दीनदयाल बालिका उच्च विद्यालय परीक्षा केंद्र में उपस्थित होना है
डॉ श्रीकृष्ण सिंह को शीघ्र मिले भारत रत्न का सम्मान : अजीत कुमार 63 वीं पुण्यतिथि पर याद किए गए बिहार केसरी श्री बाबू। बिहार मुजफ्फरपुर मै भूमिहार ब्राह्मण सामाजिक फ्रंट एवं टीम अजीत कुमार के संयुक्त तत्वावधान में समारोह आयोजित कर अर्पित किया गया भावभीनी श्रद्धांजलि। और भूमिहार ब्राह्मण सामाजिक फ्रंट एवं टीम अजीत कुमार ने संयुक्त रूप से बुधवार को बिहार केसरी डॉ श्रीकृष्ण सिंह के 63 वीं पुण्यतिथि पर पर स्थानीय बीबीगंज स्थित पूर्व मंत्री के आवासीय परिसर में समारोह आयोजित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित किया। जयंती समारोह की अध्यक्षता टीम के अध्यक्ष मुखिया इंद्र मोहन झा तथा संचालन पूर्व मुखिया अशोक पासवान ने किया।कार्यक्रम का शुभारंभ समाज के आदर्श श्री कृष्ण सिंह के तैल चित्र पर पुष्प अर्पित एवं दीप प्रज्वलित कर टीम के संरक्षक, भाजपा के बरिष्ठ नेता पूर्व मंत्री अजीत कुमार व स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने संयुक्त रूप से किया। इस अवसर पर लोगों को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री अजीत कुमार ने कहा की श्री बाबू समकालीन भारतीय राजनीति के दिव्यमान राजनेता थे। वे संघर्षशील, जुझारू और दूरदर्शी सोच के व्यक्ति थे । श्री बाबू सामाजिक न्याय व संप्रदायिक सद्भाव के प्रणेता थे । उन्होंने समाज के सभी वर्गों के संतुलित विकास पर ध्यान देते हुए बिहार और इस देश को बहुत कुछ दिया था । श्री बाबू स्वामी सहजानंद सरस्वती के विचारों से प्रभावित होकर इस देश में पहली बार बिहार से जमीनदारी प्रथा का उन्मूलन प्रारंभ किया था । उन्होंने बिहार में उद्योग, कृषि , सिंचाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, कला व सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करते हुए कल कारखाना, शैक्षणिक संस्थान खुलवा कर बिहार को प्रगति की ओर अग्रसर कराया था। उनके द्वारा रिफाइनरी, खाद कारखाना, भारी उद्योग , देश का सबसे बड़ा स्टील प्लांट, एशिया का सबसे बड़ा रेल यार्ड, गंगोत्री से गंगासागर के बीच प्रथम रेल सह- सड़क पुल , राजेंद्र पुल, कोसी प्रोजेक्ट, पूसा और सबौर में एग्रीकल्चर कॉलेज, बिहार, भागलपुर , रांची विश्वविद्यालय स्थापित कर बिहार को नया स्वरूप प्रदान किया था । श्री कुमार ने कहा कि आज भले श्री बाबू हम सबके बीच नहीं हैं लेकिन उनका कृति अमर है, अमर रहेगा ।उन्होंने कहा कि श्री बाबू दलित समाज के लोगों को मंदिर में प्रवेश दिला कर सामाजिक समरसता का मिसाल कायम किया था। श्री कुमार ने आजादी के 75 वर्ष बाद भी श्री बाबू को भारत रत्न की उपाधि नहीं दिए जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से शीघ्र उन्हें भारत रत्न के सम्मान से सम्मानित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि श्री बाबू आजीवन अपराजय और 1937 से अपने जीवन के अंतिम समय तक मुख्यमंत्री रहे । उन्होंने कहा कि सरकार उनके जीवनी को एनसीआरटी और बिहार के पाठ्यक्रमों में शामिल करें। श्री कुमार ने सरकार से पटना विश्वविद्यालय का नाम श्री बाबू के नाम पर रखने का भी मांग किया। इस अवसर पर श्री बाबू को श्रद्धा सुमन अर्पित करने वालों में मोहम्मद समीम ,उपेंद्र शाह ,मंकू पाठक , निखिल कुमार, हिमांशु कुमार, मोहम्मद फिरोज ,पंकज कुमार ,संतोष सिंह, विवेक कुमार ,अनिल पंडित, संजय शाह ,देवानंद महतो ,मोहम्मद सगिर, लखेंदर पासवान ,संजय पासवान, रवि कुमार ,राकेश कुमार श्रीवास्तव , नित्यानंद कुमार, संजय शाह, शत्रुघ्न सिंह ,अरुण कुमार ,आकाश कुमार, संजय पासवान ,अजय कुमार ,चंदन कुमार ,मोहम्मद सगिर ,उदय कुमार आदि प्रमुख थे।
Transcript Unavailable.
Transcript Unavailable.
Transcript Unavailable.
Transcript Unavailable.
Transcript Unavailable.
Transcript Unavailable.
Transcript Unavailable.
