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दाउदनगर थाना क्षेत्र के लीला बिगहा गांव में मारपीट की घटना में पिता पुत्र घायल हो गए। दोनों घायलों को चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद दोनों घायलों को बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल औरंगाबाद रेफर कर दिया। संवाद संप्रेषण तक घटना के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है।

रफीगंज प्रखंड के पोगर पंचायत मुख्यालय से कोई भी गांव पक्की सड़क से अबतक नही जुड़ा है।इसके विरोध में ग्रामीणों ने पोगर बाजार में जमकर नारेबाजी एवं प्रदर्शन किया। रोड नहीं तो वोट नहीं के नारे लगाए। ग्रामीण राम बलम प्रसाद,कामता प्रसाद,रणधीर सिंह,प्रमोद कुमार सिंह,नरेश चौधरी, मुकेश कुमार, सुरेंद्र प्रसाद निरंजन प्रसाद, रवि रंजन कुमार, शैलेंद्र चौधरी, राजेश कुमार सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि देश मे आजादी का अमृत महोत्सव मनाया जा रहा है । हर एक पार्टी से विधायक सांसद बनते रहे हैं।पोगर गांव की जनता को मूर्ख बनाकर वोट लेते रहे हैं, लेकिन सांसद विधायक ने पोगर के जनता को कीचड़ से बाहर नहीं निकाल पाए।जिसके विरोध में रोड नहीं तो वोट नहीं का नारा लगाते के साथ प्रदर्शन किया गया।

बंटवारा, परिमार्जन व आधार सिडिंग के लिए कैंप का आयोजन राज्य सरकार की ओर से जमीन की खरीद-बिक्री में नए नियम लागू होने के बाद राजस्व कर्मचारी विनय कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि गोह प्रखंड के उपहारा पंचायत सरकार भवन में सोमवार, भुरकुंडा पंचायत के पिपरा पंचायत भवन में मंगलवार, तेयाप पंचायत सरकार भवन में बुधवार एवं हथियारा पंचायत सरकार भवन में गुरुवार को कैंप लगाकर बंटवारा, परिमार्जन व आधार सिडिंग का आवेदन लिया जा रहा है। राजस्व कर्मचारी ने बताया कि आवेदनों का भौतिक सत्यापन करने के बाद कार्य का निष्पादन किया जाएगा।

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दोस्तों, हंसने-हंसाने से इंसान खुश रहता है, जिससे मानसिक तनाव, चिंता और डिप्रेशन कम होता है। उत्तम स्वास्थ्य के लिए हंसी-मज़ाक बहुत ज़रूरी है। इसीलिए मोबाइल वाणी आपके लिए लेकर आया है कुछ मजेदार चुटकुले, जिन्हें सुनकर आप अपनी हंसी रोक नहीं पाएंगे।अगर आपके पास भी है कोई मज़ेदार चुटकुला, तो रिकॉर्ड करें मोबाइल वाणी पर, फ़ोन में नंबर 3 का बटन दबाकर।

भारत में शादी के मौकों पर लेन-देन यानी दहेज की प्रथा आदिकाल से चली आ रही है. पहले यह वधू पक्ष की सहमति से उपहार के तौर पर दिया जाता था। लेकिन हाल के वर्षों में यह एक सौदा और शादी की अनिवार्य शर्त बन गया है। विश्व बैंक की अर्थशास्त्री एस अनुकृति, निशीथ प्रकाश और सुंगोह क्वोन की टीम ने 1960 से लेकर 2008 के दौरान ग्रामीण इलाके में हुई 40 हजार शादियों के अध्ययन में पाया कि 95 फीसदी शादियों में दहेज दिया गया. बावजूद इसके कि वर्ष 1961 से ही भारत में दहेज को गैर-कानूनी घोषित किया जा चुका है. यह शोध भारत के 17 राज्यों पर आधारित है. इसमें ग्रामीण भारत पर ही ध्यान केंद्रित किया गया है जहां भारत की बहुसंख्यक आबादी रहती है.दोस्तों आप हमें बताइए कि *----- दहेज प्रथा को लेकर आप क्या सोचते है ? और इसकी मुख्य वजह क्या है ? *----- समाज में दहेज़ प्रथा रोकने को लेकर हमें किस तरह के प्रयास करने की ज़रूरत है ? *----- और क्यों आज भी हमारे समाज में दहेज़ जैसी कुप्रथा मौजूद है ?

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