दोस्तों, समाज में लैंगिक समानता प्राप्त करने के लिए सामाजिक असमानता को दूर करना सबसे ज़रूरी है। शिक्षा, जागरूकता, और कानूनों का कड़ाई से पालन करके हम एक ऐसा समाज बना सकते हैं जहाँ पुरुषों और महिलाओं को समान अधिकार और अवसर प्राप्त हों। तो दोस्तों, हर समस्या का समाधान होता है आप हमें बताइए कि _____ हमारे समाज में लैंगिक असमानता क्यों मौजूद हैं? _____आपके अनुसार से लैंगिक समानता को मिटाने के लिए सरकार के साथ साथ हमें किस तरह के प्रेस को करने की ज़रूरत है ?
लैंगिक असमानता का मुख्य कारण, पुराणी कथा, लोगों में असमानता जागरूकता व कड़े कानून का लागू नहीं होना है। लैंगिक असामनता को मिटाने के लिए शिक्षा, जागरूकता और कड़े कानूनों को लागू करना होगा।
उत्तर प्रदेश राज्य के हरदोई जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता बुद्धसेन सोनी ने जानकारी दी कि महिलाओं को भूमि अधिकार मिलना जरुरी है। क्योंकि पुरुषों के मुकाबले महिलाओं को समान अधिकार नहीं प्राप्त होता है।महिलाओं को सशक्त बनाने में समाज की भूमिका बहुत महत्वपुर्ण है। अगर पूरा समाज जागरूक और एकजुट हो कर महिलाओं को उनका अधिकार दें या दिलाने का प्रयास करें तो स्थिति हर तरह से बेहतर हो सकती है। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
हरदोई जनपद की बात की जाए तो यहां भूमि अधिकार के मामले में लैंगिक असमानता साफ दिखाई देती है। दरअसल हरदोई शैक्षिक दृष्टि से बेहद पिछड़ा जिला माना जाता है। हालांकि गत वर्षो में सरकार और तमाम सामाजिक संस्थाओं के द्वारा जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए। जिसके चलते यहां शिक्षा का स्तर धीरे-धीरे बढ़ने लगा है। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
भारत में लैंगिक असमानता का अर्थ वह सामाजिक घटना है जिसमें पुरुष के सापेक्ष महिलाओं के साथ लिंग के आधार पर समान व्यवहार नहीं किया जाता है। नमस्कार आप सुन रहे हैं हरदोई मोबाइल वाणी । दोस्तो राजीव की डायरी लेकर आया हैं एक और ज्वलंत मुद्दा । राजीव की डायरी के कड़ी संख्या 27 लैंगिक असमानता हमारे समाज के लिए एक बड़ी चुनौती। आखिर लैंगिक असमानता के मुख्य कारण क्या हैं ? दरअसल हरदोई जिले में लैंगिक असमानता की बात की जाए तो यहां शिक्षा के क्षेत्र में लैंगिक असमानता चरम पर है। हमारे ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी महिलाओं पर पुरुषों द्वारा अपने हित से जुड़े नियम थोपे जा रहे है। हमारे क्षेत्र में आज भी महिलाओं के लिए काम के अवसर कम है, धार्मिक समूहों में महिलाओं की भागीदारी नहीं, महिलाओं से जुड़े रोगों के उपचार के लिए ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं का पूर्णतया अभाव है। लड़को की अपेक्षा लड़कियों के मामले में हमारे समाज में बचपन से ही भेदभाव शुरू हो जाता हैं। परिवार में भी लड़के और लड़कियों को देखने का नजरिया अलग अलग होता है, सुविधाओं के लिहाज से भी लड़कियों को भेदभाव का शिकार होना पड़ता हैं। शैक्षिक असमानता की वजह से उनमें जागरूकता की कमी पाई जाती हैं जिसकी वजह से वह हिंसा का भी शिकार होती रहती हैं। आर्थिक आधार पर भी वह पुरुषों पर ही निर्भर रह रही हैं। हरदोई जनपद के नगरीय इलाको में फैलाई जा रही जागरूकता की वजह से लैंगिक असमानता के अनुपात में कमी आ रही है, यह सुखद कल की ओर इशारा कर रहा हैं, हालांकि हरदोई के ग्रामीण इलाकों में अभी भी लैंगिक समानता को लेकर जागरूकता की कमी है। फिलहाल हरदोई जिले में लैंगिक असमानता के मुख्य कारण प्रचलित सामाजिक व धार्मिक मानदंड हैं, जो यह निर्देश देते हैं कि महिलाओं को पुरुषों के अधीन रहना चाहिए । लेकिन आधुनिकता के इस दौर में अब इन मानदंडों में परिवर्तन की और लिंग के आधार पर असमानता को खत्म करने की जरूरत है।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।
महिलाओं को अक्सर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, रोजगार और राजनीतिक भागीदारी जैसे क्षेत्रों में भेदभाव का सामना करना पड़ता है। यह भेदभाव उन्हें अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचने से रोकता है। महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, दहेज हत्या और बाल विवाह जैसी हिंसा लैंगिक असमानता का एक भयानक रूप है। यह हिंसा महिलाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से नुकसान पहुंचाती है और उन्हें डर और असुरक्षा में जीने के लिए मजबूर करती है। लैंगिक असमानता गरीबी और असमानता को बढ़ावा देती है, क्योंकि महिलाएं अक्सर कम वेतन वाली नौकरियों में काम करती हैं और उन्हें भूमि और संपत्ति जैसे संसाधनों तक कम पहुंच होती है। दोस्तों, आप हमें बताइए कि *-----लैंगिक असमानता के मुख्य कारण क्या हैं? *-----आपके अनुसार से लैंगिक समानता को मिटाने के लिए भविष्य में क्या-क्या तरीके अपनाएँ जा सकते हैं? *-----साथ ही, लैंगिक असमानता को दूर करने के लिए हम व्यक्तिगत रूप से क्या प्रयास कर सकते हैं?
उत्तरप्रदेश राज्य के जिला हरदोई से बुध सेन सोनी , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते है कि महिलाओं को समाज में समान अधिकार प्राप्त करने के लिए सबसे पहले शिक्षित होना चाहिए।
भारत में जहां 18वीं लोकसभा के लिए चुनाव हो रहे हैं। इन चुनावों में एक तरफ राजनीतिक दल हैं जो सत्ता में आने के लिए मतदाताओं से उनका जीवन बेहतर बनाने के तमाम वादे कर रहे हैं, दूसरी तरफ मतदाता हैं जिनसे पूछा ही नहीं जा रहा है कि वास्तव में उन्हें क्या चाहिए। राजनीतिक दलों ने भले ही मतदाताओं को उनके हाल पर छोड़ दिया हो लेकिन अलग-अलग समुदायो से आने वाले महिला समूहों ने गांव, जिला और राज्य स्तर पर चुनाव में भाग ले रहे राजनीतिर दलों के साथ साझा करने के लिए घोषणापत्र तैयार किया है। इन समूहों में घुमंतू जनजातियों की महिलाओं से लेकर गन्ना काटने वालों सहित, छोटे सामाजिक और श्रमिक समूह मौजूदा चुनाव लड़ रहे राजनेताओं और पार्टियों के सामने अपनी मांगों का घोषणा पत्र पेश कर रहे हैं। क्या है उनकी मांगे ? जानने के लिए इस ऑडियो को सुने
दोस्तों, हमारे यह 2 तरह के देश बसते है। एक शहर , जिसे हम इंडिया कहते है और दूसरा ग्रामीण जो भारत है और इसी भारत में देश की लगभग आधी से ज्यादा आबादी रहती है। और उस आबादी में आज भी हम महिला को नाम से नहीं जानते। कोई महिला पिंटू की माँ है , कोई मनोज की पत्नी, कोई फलाने घर की बड़ी या छोटी बहु है , कोई संजय की बहन, तो कोई फलाने गाँव वाली, जहाँ उन्हें उनके मायके के गाँव के नाम से जाना जाता है। हम महिलाओ को आज भी ऐसे ही पुकारते है और अपने आप को समाज में मॉडर्न दिखने की रीती का निर्वाह कर लेते है। समाज में महिलाओं की पहचान का महत्व और उनकी स्थिति को समझने की आवश्यकता के बावजूद, यह बहुत दुःख कि बात है आधुनिक समय में भी महिलाओं की पहचान गुम हो रही है। तो दोस्तों, आप हमें बताइए कि *-----आप इस मसले को लेकर क्या सोचते है ? *-----आपके अनुसार से औरतों को आगे लाने के लिए हमें किस तरह के प्रयास करने की ज़रूरत है *-----साथ ही, आप औरतों को किस नाम से जानते है ?
दुनिया भर में हर साल 15 मार्च को उपभोक्ता के हक की आवाज़ उठाने और ग्राहको को उनके अधिकारों के प्रति जागरुक बनाने के लिए "विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस" मनाया जाता है। 15 मार्च, 1983 में उपभोक्ता अधिकार दिवस मनाने की शुरूआत कंज्यूमर्स इंटरनेशनल नाम की संस्था ने की थी।आपको बता दे की हर साल विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस के लिए एक थीम बनाई जाती है कंज्यूमर्स इंटरनेशनल ने इस साल की थीम " उपभोक्ताओं के लिए निष्पक्ष और जिम्मेदार एआई "को चुना है। मोबाइल वाणी के पुरे परिवार की ओर से आप सभी को "विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस"की बहुत बहुत शुभकामनाएं।
