मनरेगा में भ्रष्टाचार किसी से छुपा हुआ नहीं है, जिसका खामियाजा सबसे ज्यादा दलित आदिवासी समुदाय के सरपंचों और प्रधानों को उठाना पड़ता है, क्योंकि पहले तो उन्हें गांव के दबंगो और ऊंची जाती के लोगों से लड़ना पड़ता है, किसी तरह उनसे पार पा भी जाएं तो फिर उन्हें प्रशासनिक मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। इस मसले पर आप क्या सोचते हैं? क्या मनरेगा नागरिकों की इच्छाओं को पूरा करने में सक्षम हो पाएगी?

आपका पैसा आपकी ताकत की आज की कड़ी में हम सुनेंगे अपने श्रोताओं की राय

सवाजपुर में जिला उद्योग की ओर से महिलाओं को टूलकिट मिली जिससे महिलाओं के चेहरे पर खुशी दिखाई दी

आपका पैसा आपकी ताकत की आज की कड़ी में हम जानेंगे एसएचजी यानि की स्वयं सहायता समुह से जुड़ने के क्या फायदे हैं और इससे जुड़ कर कैसे आप अपने जीवन में बदलाव ला सकते हैं।

उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को स्वराज रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाए जाने और गांव में ही बिजली बिल जमा किए जाने की सुविधा के लिहाज से अब सभी ग्राम पंचायत में विद्युत सखी रखी जाएगी

रोजगार में महिलाओं की कम भागीदारी से जनपद की प्रगति प्रभावित हो रही है ग्राम्य विकास आयुक्त ने भी नाराजगी जाहिर की है

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इसके बरक्स एक और सवल उठता है कि क्या सरकारें चाहती हैं कि वह लोगों का खाने-पीने और पहनने सहित सामान्य जीवन के तौर तरीकों को भी तय करें? या फिर इस व्यवसाय को एक धार्मिक समुदाय को निशाना बनाने के लिए इस तरह के आदेश जारी किये जा रहे हैं। सरकार ने इस आदेश को जारी करते हुए इस बात पर भी ध्यान नहीं दिया कि उसके एक आदेश से कितने लोगों की रोजी रोटी पर असर पड़ेगा