महिलाओं को अक्सर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, रोजगार और राजनीतिक भागीदारी जैसे क्षेत्रों में भेदभाव का सामना करना पड़ता है। यह भेदभाव उन्हें अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचने से रोकता है। महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा, यौन उत्पीड़न, दहेज हत्या और बाल विवाह जैसी हिंसा लैंगिक असमानता का एक भयानक रूप है। यह हिंसा महिलाओं को शारीरिक और मानसिक रूप से नुकसान पहुंचाती है और उन्हें डर और असुरक्षा में जीने के लिए मजबूर करती है। लैंगिक असमानता गरीबी और असमानता को बढ़ावा देती है, क्योंकि महिलाएं अक्सर कम वेतन वाली नौकरियों में काम करती हैं और उन्हें भूमि और संपत्ति जैसे संसाधनों तक कम पहुंच होती है। दोस्तों, आप हमें बताइए कि *-----लैंगिक असमानता के मुख्य कारण क्या हैं? *-----आपके अनुसार से लैंगिक समानता को मिटाने के लिए भविष्य में क्या-क्या तरीके अपनाएँ जा सकते हैं? *-----साथ ही, लैंगिक असमानता को दूर करने के लिए हम व्यक्तिगत रूप से क्या प्रयास कर सकते हैं?

2024 के आम चुनाव के लिए भी पक्ष-विपक्ष और सहयोगी विरोधी लगभग सभी प्रकार के दलों ने अपने घोषणा पत्र जारी कर दिये हैं। सत्ता पक्ष के घोषणा पत्र के अलावा लगभग सभी दलों ने युवाओं, कामगारों, और रोजगार की बात की है। कोई बेरोजगारी भत्ते की घोषणा कर रहा है तो कोई एक करोड़ नौकरियों का वादा कर रहा है, इसके उलट दस साल से सत्ता पर काबिज राजनीतिक दल रोजगार पर बात ही नहीं कर रहा है, जबकि पहले चुनाव में वह बेरोजगारी को मुद्दा बनाकर ही सत्ता तक पहुंचा था, सवाल उठता है कि जब सत्ताधारी दल गरीबी रोजगार, मंहगाई जैसे विषयों को अपने घोषणापत्र का हिस्सा नहीं बना रहा है तो फिर वह चुनाव किन मुद्दों पर लड़ रहा है।

भारत का आम समाज अक्सर सरकारी सेवाओं की शिकायत करता रहता है, सरकारी सेवाओं की इन आलोचनाओं के पक्ष में आम लोगों सहित तमाम बड़े बड़े अर्थशास्त्रियों तक का मानना है कि खुले बाजार से किसी भी क्षेत्र में काम कर रही कंपनियों में कंपटीशन बढ़ेगा जो आम लोगों को बेहतर सुविधाएं देगा। इस एक तर्क के सहारे सरकार ने सभी सेवाओं को बाजार के हवाले पर छोड़ दिया, इसमें जिन सेवाओं पर इसका सबसे ज्यादा असर हुआ वे शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार पर पड़ा है। इसका खामियाजा गरीब, मजदूर और आम लोगों को भुगतना पड़ता है।

भारत गंभीर भुखमरी और कुपोषण के से जूझ रहा है इस संबंध में पिछले सालों में अलग-अलग कई रिपोर्टें आई हैं जो भारत की गंभीर स्थिति को बताती है। भारत का यह हाल तब है जब कि देश में सरकार की तरफ से ही राशन मुफ्त या फिर कम दाम पर राशन दिया जाता है। उसके बाद भी भारत गरीबी और भुखमरी के मामले में पिछड़ता ही जा रहा है। ऐसे में सरकारी नीतियों में बदलाव की सख्त जरूरत है ताकि कोई भी बच्चा भूखा न सोए। आखिर बच्चे किसी भी देश का भविष्य होते हैं।स्तों क्या आपको भी लगता है कि सरकार की नीतियों से देश के चुनिंदा लोग ही फाएदा उठा रहे हैं, क्या आपको भी लगता है कि इन नीतियों में बदलाव की जरूरत है जिससे देश के किसी भी बच्चे को भूखा न सोना पड़े। किसी के व्यक्तिगत लालच पर कहीं तो रोक लगाई जानी चाहिए जिससे किसी की भी मानवीय गरिमा का शोषण न किया जा सके।

हरदोई। निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम (आरटीई) के तहत जिले के गरीब परिवारों के 171

पिछले 10 सालों में गेहूं की एमएसपी में महज 800 रुपये की वृद्धि हुई है वहीं धान में 823 रुपये की वृद्धि हुई है। सरकार की तरफ से 24 फसलों को ही एमएसपी में शामिल किया गया है। जबकि इसका बड़ा हिस्सा धान और गेहूं के हिस्से में जाता है, यह हाल तब है जबकि महज कुछ प्रतिशत बड़े किसान ही अपनी फसल एमएसपी पर बेच पाते हैं। एक और आंकड़ा है जो इसकी वास्तविक स्थिति को बेहतर ढ़ंग से बंया करत है, 2013-14 में एक आम परिवार की मासिक 6426 रुपये थी, जबकि 2018-19 में यह बढ़कर 10218 रुपये हो गई। उसके बाद से सरकार ने आंकड़े जारी करना ही बंद कर दिए इससे पता लगाना मुश्किल है कि वास्तवितक स्थिति क्या है। दोस्तों आपको सरकार के दावें कितने सच लगते हैं। क्या आप भी मानते हैं कि देश में गरीबी कम हुई है? क्या आपको अपने आसपास गरीब लोग नहीं दिखते हैं, क्या आपके खुद के घर का खर्च बिना सोचे बिचारे पूरे हो जाते हैं? इन सब सरकारी बातों का सच क्या है बताइये ग्रामवाणी पर अपनी राय को रिकॉर्ड करके

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सरकारी एवं गरीबों के पट्टे की भूमि तत्काल कब्जा मुक्त कराने के निर्देश . #हरदोई: आज थाना टड़ियावां में सम्पूर्ण थाना समाधान दिवस का आयोजन जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में आहूत हुआ। थाना समाधान दिवस में गरीबों की एवं सरकारी भूमि पर आयी अवैध कब्जों की शिकायतों पर सख्त नाराजगी व्यक्त करते हुए जिलाधिकारी ने उपस्थित कानूनगो तथा लेखपालों को निर्देश दिये कि गांवों में सरकारी एवं गरीबों के पट्टे की भूमि पर किये गये अवैध कब्जों को पुलिस बल के साथ जाकर तत्काल कब्जा मुक्त कराये और बार-बार भूमि पर अवैध कब्जा करने वालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराते हुए कड़ी कार्यवाही करें। जिलाधिकारी ने टड़ियावां कस्बे में नाली अवरोध करने की शिकायत पर ग्राम प्रधान तथा लेखपाल से कहा कि कल ही उक्त विवादित नाली पर जिन लोगों ने अवैध रूप से सीढ़ी, चबूतरा आदि का निर्माण कर लिया है वह सभी टुड़वा दें और नाली बनवाकर पानी निकास का समुचित निस्तारण करायें। उन्होने लेखपालों को निर्देश दिये के नियमित रूप से अपने क्षेत्र के गांवों का निरीक्षण कर ग्रामवासियों की समस्याओं की स्थाई समाधान करायें और अगर काम के बदले किसी लेखपाल आदि को बिचौलियों एवं दलालों के माध्यम से किसी प्रकार की घूस लेने की शिकायत मिली तो सम्बन्धित के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की जायेगी। थाना दिवस में पुलिस अधीक्षक केशव चन्द्र गोस्वामी ने थानाध्यक्ष को निर्देश दिये कि गांव में सरकारी एवं अन्य किसी भूमि पर अवैध कब्जों के सम्बन्ध में कार्यवाही के दौरान कानुनगो एवं लेखपालों के साथ पुलिस बल भेजें और एक बार कब्जा हटाने के बाद दोबारा कब्जा करने वालों को चिन्हित करें और उनके विरूद्व सख्त कानूनी कार्यवाही अमल में लाये और क्षेत्र के आसामाजिक, आराजक, अपराधी तथा दबंग व्यक्तियों की गतिविधियों की जानकारी प्रति दिन गांव के बीट सिपाही एवं चौकीदारों से लें और ऐसे लोगों की नियमित थाने पर हाजरी लें। थाना समाधान दिवस में जिला सूचना अधिकारी संतोष कुमार, थानाध्यक्ष, कानूनगो तथा लेखपाल आदि उपस्थित रहे।

हरदोई नगर क्षेत्र के मोहल्ला के गिगियानी निवासी अनीशा पत्नी रोचक थे एसडीएम को प्रार्थना पत्र देखकर अपनी गरीबी का हमला दिया और राशन कार्ड बनवाने की मांग की अनीशा के अनुसार उसका पति काफी गरीब है और बीमार भी रहता है जीवन यापन करने का उसके पास कोई सहारा नहीं है सरकार द्वारा दिए जाने वाले राशन से उसके बच्चे का भरण पोषण हो जाएगा एसडीएम ने पूर्ति निरीक्षक को जांच करने का निर्देश दिया है।

सरकार का दावा है कि वह 80 करोड़ लोगों को फ्री राशन दे रही है, और उसको अगले पांच साल तक दिये जाने की घोषणा की है। वित्त मंत्री ने अपने बजट भाषण में यह भी दावा किया कि उनकी सरकार की नीतियों के कारण देश के आम लोगों की औसत आय में करीब 50 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। इस दौरान वित्त मंत्री यह बताना भूल गईं की इस दौरान आम जरूरत की वस्तुओं की कीमतों में कितनी बढ़ोत्तरी हुई है।