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उत्तरप्रदेश राज्य के जिला बलरामपुर से नीलू , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती है कि गर्मी बहुत बढ़ गई है। लोग बहुत परेशान हो रहे है। गर्मी को कम करने के लिए अधिक से अधिक पेंड़ पौधे लगाने चाहिए।

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उत्तरप्रदेश राज्य के जिला बलरामपुर से वीर बहादुर यादव , मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते है कि लिंग असमानता वह है जो समाज में महिलाओं को प्रभावित करती है। जो भेदभाव किया जा रहा है वह बहुत गलत है जैसे अस्पृश्यता का भेदभाव, समाज में महिलाओं के रहने का अधिकार और उसके बाद अगर महिलाएं काम कर रही हैं तो उन्हें पुरुषों की तुलना में कम वेतन दिया जा रहा है। महिलाओं को पुरुषों के बराबर बैठने का भी अधिकार नहीं दिया जा रहा है और अगर महिलाओं के खिलाफ कोई कानून बनाया गया है तो उसका सख्ती से पालन किया जाना चाहिए।

उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि लैंगिक समानता अतिरिक्त विकास से जुड़ी हुई है और सभी के लिए मानवाधिकार की प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण है । लैंगिक समानता का समग्र उद्देश्य एक ऐसे समाज का निर्माण करना है जिसमें महिलाएं और पुरुष जीवन के सभी क्षेत्रों में समान अवसर अधिकारों और जिम्मेदारियों का आनंद लें। शैक्षिक अवसरों में महिलाओं के बहिष्कार के परिणामस्वरूप मानव पूंजी का महत्वपूर्ण नुकसान होता है।समाज लड़कियों को शिक्षा से वंचित कर के उनकी क्षमता और प्रतिभा को बर्बाद भी कर रहा है।इससे आर्थिक विकास बाधित होता है और गरीबी और असमानता का चक्र कायम रहता है। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि पुरुषों से अधिक सीखकर महिलाओं को झेलनी पड़ती है। कृषि क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका होते हुए भी महिलाओं को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अशिक्षा, अनभिज्ञता, उदासीनता और अंधविश्वास उनके सशक्तिकरण के राह में मुश्किल बढ़ाते हैं।कई महिलाओं ने इन बाधाओं से जूझ कर समाज में खुद की पहचान बनाई है, जो दूसरों के लिए अनुकरणीय है। महिलाएँ किसान मजदूर और ओहामी हैं, लेकिन लगभग हर जगह उन्हें उत्पादक तक पहुंचने में पुरुषों की तुलना में अधिक बाधाओं का सामना करना पड़ता है। महिला किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वे जिस भूमि पर खेती करती है उसपर स्वामित्व का दावा नहीं कर पाती हैं। सामाजिक व्यवस्था के कारण वो इस अधिकार से वंचित रह जाती हैं। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिलाएं किसी भी विकसित समाज की रीढ़ हैं। हमारे देश में सत्तर प्रतिशत आबादी आज भी ग्रामीण क्षेत्र में रहती है। पचास प्रतिशत से अधिक ग्रामीण परिवार अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर हैं। कृषि में महिलाओं का योगदान पैंसठ से सत्तर प्रतिशत है, लेकिन अधिकतर महिलाएँ नई तकनीक को अपनाने,आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों का लाभ उठाने और औपचारिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में भाग में असमर्थ हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं को केवल दो फीसदी भूमि उत्तराधिकारी में मिली है।इसके आलावा 81 प्रतिशत महिला कृषि मजदूर, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़े वर्गों की हैं और वे सावधि और भूमिहीन मजदूरी में सबसे अधिक योगदान देती हैं। विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।

उत्तर प्रदेश राज्य के बलरामपुर जिला से प्रियंका सिंह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि महिला के भूमि अधिकार की खोज में पुरुष को शामिल करने का महत्त्व साफ़ है। ऐसा करने का इरादा रखने वाले संगठनों को उन कार्यक्रमों में पुरुषों को शामिल करना चाहिए जो व्यक्तिगत परिवर्तन लाने में मददगार हों।लोगों में एक गहरी समझ पैदा करने की जरूरत होगी जो महिलाओं और पुरुषों दोनों के साथ जुड़ सके और लैंगिक मानकों को बनाने और मजबूत करने वाली वजहों पर काम कर सके। इससे संगठनों को शक्ति असंतुलन को सही करने, सुरक्षित स्थान बनाने, लैंगिक समानता के फ़ायदों पर संवाद करने में सुविधा होगी। साथ ही, इससे मजबूत संस्थागत साझेदारी बनाने और उन पर विचार और कार्रवाई की एक परंपरा के लिए प्रतिबद्ध होने में मदद मिलेगी। यह सामूहिक रूप से सार्थक परिवर्तन लाने में योगदान कर सकता है।विस्तार पूर्वक जानकारी के लिए क्लिक करें ऑडियो पर और सुनें पूरी खबर।