चावल को अच्छे से धो कर 3 -4 घंटे तक पानी में भींगा कर रख लीजिये। अब बांस करील को अच्छे से धो कर काट लेना है और इसे कुकर में नमक डाल कर मध्यम आंच में 3 सीटी आने तक उबाल लेना है।इसके बाद अब चावल अच्छे से फुल जाने पर इसे हरी मिर्च ,लहसुन और अदरक के साथ अच्छे से पीस कर घोल बना लेना है। अब बांस करील के उबल जाने के बाद थोड़ा देर ठंडा होने के लिए रख दें। अब इस उबले हुए बांस करील को दरदरा पीस ले।अब पिसा बांस करील को चावल का घोल में डाले साथ ही इसमें हल्दी पाउडर और स्वाद अनुसार नमक मिला कर अच्छे से बैटर को घोल लीजिये। अब तैयार बैटर को कुछ देर के लिए रख दीजिये। अब गैस में तवा चढ़ा लीजिये और अच्छे से तवा को गर्म कर लें। जब तवा अच्छे से गर्म हो जाए तो उसमे दो चम्मच सरसो का तेल डाल के फैला लें और गर्म होने पर बैटर को डाले और हल्के हाथों से तवा में फैलाए। अब जब ऊपर का परत हल्का ड्राई हो जाए तो ऊपर से थोड़ा सरसो का तेल डालना है और अब रोटी को पलट कर दूसरी तरफ से पकने दें। रोटी को थोड़ी थोड़ी देर में पलट कर पकाते रहना है जब तक रोटी का रंग लाल न हो जाए। अब तैयार है बांस करील की कुरकुरी रोटी। इसी प्रक्रिया से बाकि बैटर का भी रोटी तैयार कर लें और गरम गरम किसी भी चटनी के साथ सर्व करे।
बुढ़मू : होली पर्व एवं लोकसभा चुनाव को लेकर ठाकुरगांव थाना परिसर में शांति समिति की बैठक किया गया। बैठक की अध्यक्षता बुढ़मू अंचलाधिकारी सच्चिदानंद वर्मा ने किया। जबकि संचालन कमल मोदी ने किया। बैठक में होली पर्व शांति सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाने का निर्णय लिया गया। होली पर्व में कहीं पर किसी की भावना को मोबाइल में ठेस पहुंचाने वाला मैसेज आदि को पोस्ट नहीं करने की बात कही गई।, और मिलजुल कर होली पर्व मनाने की बात कही गई। वहीं लोकसभा चुनाव को लेकर भी चर्चा की गई, और शांति पूर्ण वातावरण में लोकतंत्र के पर्व में मतदान करने की अपील की गई। बैठक में कई जानकारी और आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए। थाना परिसर में होली मिलन समारोह भी मनाया गया। मौके पर उपस्थित पदाधिकारीयो, और जनप्रतिनिधियों ने एक दूसरे को रंग अबीर गुलाल लगाकर होली पर्व की बधाई एवं शुभकामनाएं दी। मौके पर ठाकुरगांव थाना प्रभारी विनीत कुमार, बुढ़मू बीडीओ, हेसलपीड़ी के मुखिया कुसेंद्र पाहन, दिनेश महतो, रंथेश्वर गिरी, ठाकुरगांव और खखरा के मुखिया सहित शांति समिति के सदस्य लोग उपस्थित थे।
बुढ़मू : बुढ़मू थाना परिसर में होली पर्व एवं लोकसभा चुनाव को लेकर शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता बुढ़मू अंचलाधिकारी सच्चिदानंद वर्मा ने किया। बैठक में होली पर्व शांति सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाने का निर्णय लिया गया। और होली पर्व के दौरान कहीं पर कोई भी किसी की भावना को ठेस पहुंचाने वाला मैसेज आदि पोस्ट नहीं करने की बात कही गई।, और मिलजुल कर होली पर्व मनाने की बात कही गई। वहीं लोकसभा चुनाव को लेकर भी चर्चा की गई, और शांति पूर्ण वातावरण में लोकतंत्र के पर्व में मतदान करने की बात कही गई। साथ ही बैठक में कई जानकारी और आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए। थाना परिसर में होली मिलन समारोह भी मनाया गया। मौके पर उपस्थित पदाधिकारीयो, और जनप्रतिनिधियों ने एक दूसरे को रंग अबीर गुलाल लगाकर होली पर्व की बधाई एवं शुभकामनाएं दी। मौके पर खलारी डीएसपी रामनारायण चौधरी, बुढ़मू थाना प्रभारी रामजी कुमार, बुढ़मू बीडीओ, प्रखंड के पश्चिमी क्षेत्र के जिला परिषद सदस्य रामजीत गंझू, मांडर इंस्पेक्टर, राजद के सज्जाद अंसारी, वरिष्ट कांग्रेसी याकूब अंसारी, बुढ़मू के पूर्व मुखिया गोवर्धन लोहरा, ईदू खान, दिनेश यादव एवं शांति समिति के सदस्य सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
सबसे पहले 250 ग्राम कुद्रुम का फूल ले लेना है और इस फूल की पंखुड़ी को इसके बीज से अलग कर के अच्छे से धो कर साफ कर लेना है। अब कढ़ाई को गैस में चढ़ा लीजिये और इसमें दो बड़ा चम्मच सरसो का तेल डालिये। तेल गर्म होने के बाद इसमें आधा छोटा चम्मच जीरा ,एक लाल सूखी मिर्च तोड़ कर चटका लीजिये। अब कुद्रुम को इसमें डाल दीजिये साथ ही स्वादानुसार नमक ,चुटकी भर हल्दी और आधा छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर डाल कर ढ़क दीजिये और 10 मिनट तक पकाए। अच्छी तरह से पक जाने पर अब दो बड़ा चम्मच चीनी डाल दीजिये। अब चीनी अच्छे से चटनी में मिल जाने पर गैस बंद कर दीजिये। तैयार है कुद्रुम की मज़ेदार खट्टी मीठी चटनी।
नमस्कार मैं झारखंड के रांची से आसी मोबाइल वानी पर आज एक झारखंड की सुप्रसिद्ध रेस्पी के बारे में बताने जा रही हूं तो आइए जानते हैं चिल्का रोटी झारखंड की एक पारंपरिक और काफी फेमस फूड डिश है. ये रेसिपी स्वादिष्ट होने के साथ ही हेल्दी और न्यूट्रीशन से भरपूर है. आप अगर हर बार कुछ नया खाने का शौक रखते हैं तो चिल्का रोटी आपके स्वाद को बढ़ाने के लिए एक बढ़िया ऑप्शन हो सकता है. चिल्का रोटी को बनाना आसान है । तो आइए जानते हैं इसे बनाने में लगने वाली सामग्री और इसे बनाने की विधि चावल – डेढ़ कप ,चना दाल – पौन कपनमक – स्वादानुसार चिल्का रोटी बनाने के लिए सबसे पहले एक बर्तन लें और उसमें चावल और चने की दाल डालकर रातभर भिगोकर रख दें. सुबह पानी छानकर चावल और दाल को निकाल ले. इसके बाद भीगे हुए दाल, चावल को मिक्सर ग्राइंडर में पीसकर गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लें. अब एक बर्तन में इस पेस्ट को डालकर स्वादानुसार नमक मिला दें और पेस्ट को अच्छी तरह से फेंट लें.अब मीडियम आंच पर नॉनस्टिक पैन/तवा रखकर गर्म करें. इस दौरान तवे पर थोड़ा सा तेल लगाकर उसे चिकना कर लें. अब छोटी कटोरी या चम्मच की मदद से चावल,दाल के पेस्ट को तवे पर फैला दें और उसे लाइट ब्राउन होने तक सेकें. इसके बाद चिल्का रोटी को पलट दें और दूसरी तरफ भी हल्का तेल लगाकर उसे सुनहरा होने तक सेंके. इसी तरह सारे पेस्ट की चिल्का रोटी तैयार कर लें. अब इन्हें चटनी या दही के साथ गर्मागर्म सर्व करें.
संवाददाता सुशांत पाठक 24/03/2024 रविवार को भद्रा प्रातः 9:24 से प्रारंभ होकर रात्रि 10:27 तक रहेगा। भद्रा समाप्त होते ही होलिका दहन रविवार को फाल्गुन पूर्णिमा तिथि पर रात्रि 11:13 से 12:27 के बीच किया जाएगा। होलिका जलते ही फाग गीत गूंज उठेंगे और होलियारों की टोली मस्ती में डूब जाएगी। होलिका की परिक्रमा करने और अन्न की आहुति देने से पद प्रतिष्ठा एश्वर्य की प्राप्ति होती है। पुराणों के अनुसार हमें जीवन के लिए जरूरी सभी चीजें प्रकृति से ही मिलती हैं, और जो भी चीज हमें प्रकृति से मिलती है, वही चीजें हम भगवान को समर्पित करके आभार व्यक्त करते हैं। होली के समय में गेहूं चने के साथ कई अन्य फसलें पक जाती हैं। फसल आने पर उत्सव मनाने की परंपरा है। पुराने समय से ही जब फसल पकती है तब होली जलाकर उत्सव मनाया जाता है, जलती होली को यज्ञ मानकर नया अन्न भगवान को अर्पित किया जाता है। तंत्र साधना के लिए बहुत खास होती है रविवार की होलिका दहन जब रविवार को होलिका दहन होता है, तो ये रात तंत्र साधना के लिए बहुत खास होती है तंत्र साधक होलिका दहन की रात अपने इष्ट देव का विशेष पूजन करते हैं गुरु के मंत्रों का जाप करते हैं। रात में जागकर तपस्या और ध्यान किया जाता है। भविष्य पुराण के अनुसार नारद जी के कहने पर युधिष्ठिर ने फाल्गुन पूर्णिमा पर कई बंदियों को अभय दान दिया था। बंदियों को मुक्त करने के बाद कंडे जलाकर होली मनाई गई थी। होलिका दहन में आहुतियां देना बहुत ही जरूरी माना गया है, होलिका में कच्चे आम, नारियल भुट्टे ,या सप्तधान्य , नई फसल का कुछ भाग गेहूं, उड़द ,मूंग, चना, जौ, चावल ,मसूर आदि की आहुति दी जाती है। ऐसा करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है। साथ ही गुप्त शत्रुओं का नाश होता है। साथ ही आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। वही होलिका दहन की रात्रि तंत्र साधना के रात्रि होने के कारण इस रात्रि आपको कुछ सावधानियां रखनी चाहिए सफेद खाद्य पदार्थों की सेवन से बचें मानता है, होलिका दहन वाले दिन टोने टोटके के लिए सफेद खाद्य पदार्थ का उपयोग किया जाता है। इसलिए इस दिन सफेद खाद्य पदार्थों के सेवन से सावधानी बरतें।
नमस्कार मैं झारखंड के रांची से ऋषिकांत मोबाइल वानी पर आज एक झारखंड की प्रसिद्ध रेस्पी के बारे में बताने जा रहा हूं जो खाने में स्वादिष्ट तो है ही लेकिन स्वास्थ्य के लिये भी काफी फायदेमंद माना जाता है। जिस कारण इसका बडे पैमाने में तस्करी भी होती है और इसे खाने से दस्त में आराम मिलता है। और साथ ही साथ इसमें बीटेन और साइनोजे नाम का कंपाउंड पाया जाता है जो अपच और लूज मोशन से बचाता है। तो आईए जानते हैं इसके बारे में और इसके बनाने की विधिके बारे में, ये एक सब्जी है । जिसे बांस करील की सब्जी कहते हैं । इसे बनाने के लिए हमें बांस (करील) 1/2 किलो, जीरा 2 चम्मच, धनिया पाउडर 2 चम्मच, हरी मिर्च ,1 छोटी चम्मच हल्दी ,10 कालिया लहसुन , 1 इंच अदरक , तेल ,पानी ,नमक स्वादनुसार,रोगिनी मिर्च आदि चीजों की जरूरत होंगी। और हम इस इस प्रकार से बनाएंगे। सबसे पहले बांस करील को लेकर उसे छोटे टुकड़ो में काट लेंगे और फिर उसके बाद पानी में थोड़ा सा दही डाल कर उसे भिगोकर रात भर के लिए रख देंगे। इससे इसकी महक चली जाएगी। फिर इसे 2 से 4 बार अच्छे से धो लेंगे। फिर इसे कुटनी में अच्छे से मोटा कूट लेंगे। कूटने के बाद एक जाली की सहायता से इससे इसका सारा पानी निकाल देंगे। जिससे बांस करील की महक नहीं आएगी। अब इसे एक बड़े बर्तन में रख देंगे। उसके बाद एक कढ़ाई में तेल गरम कर लेंगे फिर एक छोटा चम्मच जीरा डाल देंगे। फिर बांस करील को डाल कर 10 मिनट तक अच्छे से भूनेंगे। उसके बाद गैस की आंच धीमी कर लेंगे और 5 मिनट तक उसे ढक कर पाकायेगे। उसके बाद उसे कुछ देर तक अच्छे से भूनते हुए चलएंगे ताकि ये अच्छे से भुन् जाये,फिर मसाला के लिए एक मिक्सी में 1 छोटा चम्मच जीरा,अदरक, 10 लहसुन की कली , हरी मिर्ची और पानी डाल कर पतला पीस लेंगे। फिर बांस करील को चलाएंगे उसके बाद बांस करील में सारा मसाला डाल देंगे, इसी समय इसमें हल्दी और पीसी धनिया भी डाल देंगे। उसके बाद अच्छे रंग के लिए रोगनि लाल मिर्च डालेंगे। फिर मसाले को अच्छे से चलाते हुए 5 मिनट के लिए भूनेंगे। जब मसाला भून जाए तो उसमे नमक डाल देंगे। गैस की आंच धीमी कर देंगे। इसे 10 मिनट के लिए पकने के लिए ढक कर छोड़ देंगे। आपकी बांस करील की सब्जी बन कर तैयार हो गई है। इसे खाने के साथ सर्व करे। धन्यवाद
सबसे पहले एक पेन में गुड़ डाले लें और इसमें 3 -4 बड़ा चम्मच पानी मिला है। ध्यान रखे पानी को ज्यादा नहीं मिलाना है। अगर ज्यादा पानी मिल जाएगा तो मिक्सचर को सूखने में समय लग जाएगा। अब लगातार इसे धीमी आंच पर चलाते रहना है जब तक गुड़ अच्छी तरह से पिघल न जाए। ध्यान रहे गुड़ को धीमे आंच में ही पकाना है। अगर आप अधिक आंच में पकाएगे तो गुड़ का रंग काला और कड़वा हो जाएगा। जब गुड़ में झाग आने लगेगा तो इसमें कसा हुआ सूखा नारियल मिलाना है और इस मिक्सचर को अच्छे से मिलाना है। अब इलाइची पाउडर डाल कर अच्छी तरह से मिला लें। ध्यान रहे मिक्सचर को ज्यादा सूखाना नहीं है। अगर ज़्यादा सूख जाता है तो आप थोड़ा पानी मिला सकते है। आपका गुड़ ,नारियल का मिक्सचर तैयार है। अब एक पैन में चावल का आटा को डालकर धीमी आंच में दो से तीन मिनट तक ड्राई रोस्ट कर लें।ध्यान रखियेगा की आटा लगातार चलाते हए रोस्ट करना है। जब चावल आटा से हल्की सोंधी खुशबु आने लगेगी तो चावल को एक बड़ा कटोरा में निकाल लें। अब पैन में एक कप पानी डाले और ढक कर एक उबाल आने दें। अगर नमक का इस्तेमाल करना है तो आधा छोटा चम्मच नमक डाल दें। और इसमें रोस्ट किया हुआ चावल का आटा को डाल कर लगातार चलाते हुए अच्छे से मिला लें । अब चावल का आटा पानी में अच्छे से मिल जाने के बाद उसे दो से तीन मिनट के लिए ढक कर रख दें। इसके बाद इसे बड़ा कटोरा में निकाल कर थोड़ी देर ठंडा कर लें। अब हल्की गर्म रहने पर आटा को गूंद ले। गुंदा हुआ आटा में थोड़ा सूखा चावल का आटा मिला कर रोल कर लें और छोटा छोटा लोई बना लें। अब लोई को कटोरी की तरह बनाए और उसमे गुड़ और नारियल का मिक्सचर डाल कर गुजिया का आकर दें। ध्यान रहे चारो और से गुड़ और नारियल का मिक्सचर चावल आटा के बीच में अच्छे से सील हो जाए। अब इसे 7 से 10 मिनट तक भाप लें।10 मिनट बात इसे चेक कर लें, पीठा थोड़ा कड़ा रहे तो यह अच्छी तरह से पक चुका है। आपका चावल और गुड़ नारियल का पीठा बनकर तैयार है।
Transcript Unavailable.
नमस्कार दोस्तों , मैं झारखंड राज्य के रांची जिले से अनिका बोल रही हूं , आज मैं आपके साथ खाना पकाने की प्रतियोगिता के तहत मटर मशरूम बनाने की विधि साझा करूंगी क्योंकि मशरूम में प्रोटीन विटामिन होते हैं । विटामिन सी , विटामिन बी , विटामिन डी , कॉपर , पोटेशियम , फॉस्फोरस और एंटीऑक्सीडेंट पोषक तत्वों में पाए जाते हैं जो शरीर को स्वास्थ्य समस्याओं से बचाने में बहुत मददगार होते हैं । आइए अब हम मशरूम करी तैयार करते हैं , इसलिए मशरूम करी बनाने के लिए आवश्यक सामग्री दो सौ पचास ग्राम मशरूम , दो सौ पचास ग्राम मटर , दो बड़े तख्त हैं । पाँच टमाटर एक इंच अदरक का टुकड़ा सात आठ लहसुन के लौंग एक कटोरी क्रीम दो चुटकी हीर एक दो चम्मच हल्दी पाउडर एक चम्मच धनिया पाउडर एक चम्मच हरा धनिया मसाला और आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर , नमक और आवश्यकतानुसार पानी के साथ लें । पहले मशरूम को अच्छी तरह से धो लें और फिर उन्हें काट लें । अब हम मशरूम को दो मिनट के लिए उबलते पानी में डाल देंगे ताकि मशरूम की सारी गंदगी बाहर आ जाए । अब हम मटर को छीलेंगे । इसके बाद , सभी प्याज , लहसुन , अदरक , प्याज , लहसुन , अदरक को छीलकर धो लें , टमाटर को धो लें और उन्हें एक मिक्सर जार में पीसकर गाढ़ा पेस्ट बना लें । हम उस पर एक कुकर रखेंगे और उसमें हींग डालेंगे । दही मिलाने के बाद हम टमाटर और प्याज का पेस्ट और मलाई भी डालेंगे । हम मशरूम करी के लिए आवश्यक सभी मसालों को जोड़ देंगे । उन सभी को जोड़ें और लगातार हिलाते रहें ताकि मसाला पैन से चिपक जाए , फिर मसाला को तब तक लगातार हिलाते रहें जब तक कि मसाला तेल और मसाला को अच्छी तरह से न छोड़ दे । फिर हम मसाला में मटर और मशरूम डालेंगे , अब हम सब्जी को अच्छी तरह से रखेंगे और उसमें पानी और स्वाद के लिए नमक डालेंगे और कुकर का ढक्कन बना लेंगे । हम इसे सीटी बजाने के लिए छोड़ देंगे इस प्रकार पाँच मिनट के बाद जब हम कुकर का ढक्कन खोलेंगे , तो हमारे मटर मशरूम की सब्जी बन जाएंगे और मटर मशरूम में बदल जाएंगे । सब्जी बहुत स्वादिष्ट होगी और हम इसे डिब्बे से बाहर निकालने के बाद परोसेंगे , हम इसे चावल या रोटी के साथ खा सकते हैं , तो आइए इस तरह से आपके घर पर मटर की मशरूम सब्जी बनाते हैं और इसे आपके परिवार को देते हैं ।
