मध्यप्रदेश राज्य के खंडवा जिला से नेहा बैरागी ने मोबाईल वाणी के माध्यम से ग्राम गुड़ी खेड़ा निवासी निखत से साक्षात्कार लिया।निखत ने बताया कि ये निष्ठा स्वास्थ्य वाणी पिछले छे महीने से सुन रही हैं। मंच पर प्रसारित संतुलित आहार वाली वार्ता को सुनकर अपने दिनचर्या में बदलाव लाया है। पहले ये फल और सब्जियां नहीं खाती थीं।वार्ता से प्रभावित होकर अब निखत फल,सब्जियाँ और संतुलित आहार खाने लगी हैं। महत्वपूर्ण जानकारी देने के लिए निखत ने निष्ठा स्वास्थ्य वाणी को धन्यवाद दिया।

यह पदार्थ जो हमारे भोजन में मौजूद हैं तथा शरीर के महत्वपूर्ण क्रियाओं के लिए जिन की खपत की जाती है उन्हें पोषक कहा जाता है पोषक पदार्थों में विभिन्न प्रकार की महत्वपूर्ण तत्व होते हैं जिनको विटामिंस खनिज कार्बोहाइड्रेट प्रोटीन कह सकते हैं इनकी संतुलित मात्रा हमारे शरीर के लिए बहुत आवश्यक है ताकि हम स्वस्थ तंदुरुस्त रखें जब हमें भी करना अति आवश्यक होता है

भोजन जीवन की परम आवश्यकता है प्राचीन काल से ही मानव की उत्सुकता भोजन की खपत तथा शरीर में इसके पाचन एवं प्रभाव जैसे विषयों पर बनी रही है जिसके परिणाम स्वरूप पोषण विज्ञान का जन्म हुआ लेवसियर को पोषण विज्ञान का पिता माना जाता है नर्सों के लिए इस विषय की जानकारी अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है क्योंकि रोगियों को स्वस्थ बनाने के लिए उन्हें पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा देना अत्यावश्यक है

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नाश्ता करने का सही समय सुबह उठने के 30 मिनट के बाद ही नाश्ता करें सुबह का नाश्ता 7:00 से 10:00 के बीच कर लेना चाहिए लंच दोपहर का खाना नाश्ता खाने के बीच 4 घंटे का अंतराल अवश्य होना चाहिए दोपहर का खाना सामान्यता 12:00 से 3:00 के बीच ले लेना चाहिए डिनर यानी रात का खाना खाने का सही समय होता है सोने के लगभग 3 घंटे पहले का दांत खाने का सही समय 6:00 से 9:00 के बीच माना जाता है

मित्रता एक ऐसा रिश्ता है जो अन्य रिश्तो की भांति थोपा नहीं जा सकता अपनी सुविधा एवं रूचि के अनुसार देख प्रकार मित्र चुने जाते हैं यह एक ऐसा बंधन है जो लोगों के मन को जोड़ता है परिवार से समाज का निर्माण होता है लेकिन परिवार और समाज से अलग कुछ रिश्ते जो हम स्वयं जोड़ दें उसे ही मित्रता कहते हैं यह रिश्ते जन्म से नहीं मिलते लेकिन समाज का निर्माण करने और व्यक्तित्व का विकास करने के लिए अति आवश्यक एवं महत्वपूर्ण होते हैं

परिवार को समाज की लघु इकाई कहा जाता है परिवार ही वह प्रासंगिक स्थान है जहां सर्वप्रथम बालक का सामाजिक कारण होता है परिवार के बड़े लोगों का जैसा आचरण और व्यवहार होता है बालक भी वैसा ही आचरण और व्यवहार करने का प्रयत्न करता है