सारण मोबाइल वाणी से अजय कुमार। खेल विभाग के द्वारा निकाले हुए फॉर्म की डेट समाप्ति के कागर है पर है छात्र छात्र चिंतित में है लेकिन आए दिन छात्र जाते हैं और बिना काम के घर वापस आ रहे हैं साइबर कैफे में जब हमारे सामने बातचीत हुई तो हमने यह देखा कि वह साइट जो बिहार सरकार के माध्यम से खेल विभाग के द्वारा कुछ वैकेंसी निकाली गई है वह साइट खुल ही नहीं रहा है जिसके वजह से छात्र काफी परेशान है खासक छात्रों के भविष्य के साथ एक तरह का मजाक बनाकर सरकार ने रख दिया है खेल विभाग में हमेशा ही यह खेल चलता रहता है लेकिन इस बार देखने को भी मिला हमें उम्मीद है कि बिहार सरकार या खेल सरकार से जुड़े हुए आईटी सेल के व्यक्ति इस पर ध्यान देंगे और इस पर संज्ञा लेने की कृपा प्रदान करें ताकि सरकार के द्वारा चलाए गए जो वैकेंसी आई है कोई छात्र वंचित न रह जाए।।।
नमस्कार, आदाब दोस्तों ! स्वागत है आपका मोबाइल वाणी और माय कहानी की खास पेशकश कार्यक्रम भावनाओं का भवर में। साथियों, हर माता-पिता को अपने बच्चों से पढ़ लिखकर कुछ अच्छा करने की उम्मीद होती है तभी तो किसी ने अपनी कलम से यह लाइन खूब लिखी है की पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा, बेटा हमारा ऐसा काम करेगा, मगर ये तो कोई न जाने के मेरी मंजिल है कहाँ ...........और सही मायने में ज़िन्दगी मंजिल तो हर किसी का अलग अलग होता है पर आज के समय में माता पिता ज़िन्दगी के दौड़ में हर बच्चे का मंजिल एक ही बनाना चाहते है। आज की जेनेरशन के भी माता -पिता अपने बच्चों के ऊपर एग्जाम में अच्छा प्रदर्शन करने के लिए दबाव तो डालते ही हैं पर गौर करने वाली बात तो यह है कि इन सब के बीच बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के बारे में हम भूल जाते है। तो चलिए आज की कड़ी में जानते है कि साथियों बच्चें देश के भविष्य होते हैं और बच्चों के भविष्य से ही देश की भविष्य की कल्पना की जाती है ऐसे में उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य का ख्याल रखना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। क्यूंकि मानसिक विकार किसी की गलती नहीं इसलिए इससे जूझने से बेहतर है इससे जुड़ी पहलुओं को समझना और समाधान ढूंढना। तो चलिए, सुनते है आज की कड़ी।.....साथियों, अभी आपने सुना कि कैसे बच्चों पर शैक्षणिक दबाव का असर उनके मानसिक स्वास्थ्य का प्रभावित करता है और इससे कैसे निपटा जा सकता है। अब अगली कड़ी में सुनेंगे की आखिर कभी कभी पुरुषों के लिए भी रोना क्यों जरुरी हो जाता है। लेकिन तब तक आपलोग हमें बताएं कि केवल परीक्षा में लाये हुए अच्छे नंबर ही एक अच्छा और सच्चा इंसान बनने का माप दंड कैसे हो सकता है? अक्सर देखा जाता है कि माता पिता अपने बच्चों के तुलना दूसरे बच्चों से करते है. क्या यह तुलना सही मायने में बच्चे को बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रोत्साहित करती है या उनके मन में नकारात्मक सोच का बीज बो देती है ? आपको क्या लगता है? इस पर आप अपनी राय, प्रतिक्रिया जरूर रिकॉर्ड करें। और हां साथियों अगर आज के विषय से जुड़ा आपके मन में किसी तरह का सवाल है तो अपने सवाल रिकॉर्ड करें अपने फ़ोन नंबर 3 दबाकर। हम आपके सवालों का जवाब ढूंढ कर लाने की पूरी कोशिश करेंगे। साथ ही इसी तरह की और भी जानकारी सुनने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें https://www.youtube.com/@mykahaani
मढ़ौरा में स्थित विधालयों में बुधवार को क्रिसमस डे व पूर्व प्रधानमंत्री की जयंती धुमधाम से मनाई गयी इस दौरान प्रखंड के तेजपुरवा स्थित द अचीवमेंट पब्लिक स्कूल में तुलसी पूजन के साथ क्रिसमस-डे एवं अटल बिहारी वाजपाई की जयंती का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय के निर्देशक रंजन सिंह के साथ सभी छात्र एवं शिक्षक ने माता तुलसी का पूजन किया साथ ही बाजपेई के चलचित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित किया, छात्रों के साथ केक काट कर क्रिसमस डे मनाया गया। कार्यक्रम में छोटे-छोटे बच्चों ने सेंटा क्लॉज के रूप में सबको भाव विभोर कर दिया। प्राचार्य सुमित कुमार सिंह ने बच्चों को उनके जीवन में तुलसी के पौधे के चिकित्सकीय और आध्यात्मिक गुणों के बारे में बताया और शिक्षकों एवं बच्चों के बिच तुलसी के पौधों का वितरण किया। उपस्थित शिक्षक निवेदिता सिंह, मनीष सिंह, गौरव सिंह, संजना सिंह, प्रिया सिंह, प्रज्ञा सिंह, कन्हैया सिंह, साहिन सिद्धिकी एवं विकाश कुमार का कहना है कि सभी उत्सवों को एक साथ मना कर बच्चों द्वारा सर्व धर्म समभाव का संदेश देना चाहते हैं।
मोबाइल वाणी और माय कहानी का एक ख़ास पेशकस आपके लिए कार्यक्रम भावनाओं का भवर जहाँ हम सुनेंगे मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने से जुड़ी कुछ जानकारियां , तो आइये, आज की कड़ी में सुनेंगे बुलिंग यानि कि ताकत दिखाके बदमाशी करना क्या होता है और इसका पहचान कैसे किया जाये साथ ही इस समस्या से निपटने के लिए क्या किया जा सकता है इस बारे में । हां तो साथियों, बुलिंग का सामना करना कोई आसान काम नहीं होता है। हमारे समाज में कई ऐसे लोग हैं जो इसका शिकार है. क्या आपने या आपके किसी जानने वाले ने कभी अपने जीवन में बुलिंग का सामना किया है ? आखिर क्या वजह है कि समाज में बुलिंग जैसी समस्या उत्पन्न होती है और क्यों लोग इस समस्या से जूझने के लिए मजबूर होते हैं ? बुलिंग से जूझने में माता पिता की क्या भूमिका हो सकती है ? साथ ही इसी तरह की और भी जानकारी सुनने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें। https://www.youtube.com/@mykahaani
नूह के 16 बच्चों का नेशनल गेम्स में सिलेक्शन
हजारीबाग जिला के विष्णुगढ़ प्रखंड अंतर्गत चानो निवासी चंद्रनाथ भाई पटेल,की पुत्री मोनिका पटेल संघ लोक सेवा आयोग परीक्षा में सफलता प्राप्त कर आईएएस बनने के बाद वह अपने गांव पहुंचे लोगों ने चौक चौराहों पर जगह-जगह भव्य स्वागत किया साथ ही कई स्कूली बच्चों के साथ अपने संघर्ष की कहानी रूबरू हुए। मौके पर उप प्रमुख सरयू साव राजेंद्र मंडल कैलाश महतो मुन्नीलाल महतो गोविंद महतो धनेश्वर महतो खेमिया देवी परमेश्वर महतो समेत बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।
ज़ोहर साथी नेहरू प्लस टू स्कूल तेलो के छात्र बने और जे. एम. रंगीला मोबाइल वानी बु में इंटर आर्ट्स में जिला टॉपर बने। बोकारो जिले के चंद्रपुरा प्रखंड के अंतर्गत आने वाली तेलो पंचायत के निवासी भोला सोनार की बेटी जिया कुमारी ने चार सौ तैंतीस अंक प्राप्त किए और इंटर आर्ट्स की छात्रा बन गई। जिला टॉपर सामाजिक कार्यकर्ता गणेश बंगनवाल जिया के घर पहुंचे और मिठाई देकर उन्हें बधाई दी। प्लस टू की स्थापना के बाद यह परीक्षाओं का पहला बैच था। जिया के पिता भोला सोनार राजमिस्त्री का काम करते हैं, जबकि उनकी माँ रानी देवी एक गृहिणी हैं। उल्लेखनीय है कि स्वर्गीय शिक्षा मंत्री जगन्नाथ महतो ने अपने कार्यकाल के दौरान नेहरू हाई स्कूल को प्लस टू का दर्जा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
नमस्कार मोबाइल बनी में स्वागत है आपका सीतामढ़ी से दीपक पटेल की रिपोर्ट जानकारी के मुताबिक आपको बताते चले सीतामढ़ी जिले में मैट्रिक परीक्षा को लेकर के हजारों की संख्या में उमड़ी भीड़ सीतामढ़ी से दीपक पटेल की रिपोर्ट क्या
इंटर के परीक्षा दे रही दो परीक्षार्थी एसपीएस परीक्षा केंद्र में हुई बेहोश सोनपुर । इंटर के हिंदी विषय के परीक्षा दे रही प्रथम पाली के परीक्षार्थी के अचानक एसपीएस परीक्षा केंद्र में बुधवार को अचानक तबीयत बिगड़ने से परीक्षार्थी बेहोश हो गयी । जहां परीक्षा केंद्र पर तैनात शिक्षक राजेश शुभांगी व पुलिस पदाधिकारी पूर्णिमा कुमारी ने आनन फानन में उसे सोनपुर के अनुमंडलीय अस्पताल में ले जाकर इलाज कराया और इस घटना की जानकारी उसके परिजनों को दी वहीं कुछ ही देर के बाद स्कूल में फिर एक परीक्षार्थी का तबीयत खराब हो गया और वह भी बेहोश हो गई जहां परीक्षा में तैनात पुलिस बाल व स्कूल में तैनात शिक्षक ने अनुमंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया । दोनों बेहोशी परीक्षार्थी का डॉक्टर द्वारा इलाज कराया गया। परीक्षार्थी निशा कुमारी जो रामसुंदर दास महिला कॉलेज गोला बाजार की विद्यार्थी है इसका परीक्षा केंद्र एसपीएस स्कूल में परीक्षा दे रही थी तो वहीं दूसरा मोनिका कुमारी पिता अशोक कुमार घर शिकारपुर के रहने वाली है। यह शिकारपुर हाई स्कूल के विद्यार्थी है । डॉक्टर ने बेहतर इलाज के लिए निशा कुमारी को रेफर कर दिया। घर के परिजनों ने बताया कि निशा कुमारी का तबीयत पहले से खराब थी जिसका इलाज पहले से चल रही है। जबकि मोनिका कुमारी के इलाज के दौरान ठीक हो गई। वहीं उपस्थित लोगों ने कहा कि पुलिस और शिक्षक अपने कार्यों में ही तत्पर नहीं रहते बल्कि वह समय पर मानव सेवा करने में पीछे भी नहीं हटते ।
2016 में 14% छात्र औपचारिक शिक्षा से बाहर थे जो कि देश में 2023 में भयानक सुधार होने के बाद भी अब मात्र 13.2 फीसद बाहर हैं ... 2016 में 23.4 फीसद अपनी भाषा में कक्षा 2 का पाठ नहीं पढ़ पाते थे आज 2023 में अति भयानक सुधार के साथ ये आंकड़ा 26.4 प्रतिशत है ... देश के आज भी 50 फीसद छात्र गणित से जूझ रहे हैं ... मात्र 8 साल में गणित में हालात बद से बदतर हो गए ... 42.7% अंग्रेजी में वाक्य नहीं पढ़ सकते हैं... अगर आप सरकार से जवाब माँगिए , तो वे कहती है कि वो लगातार बैठकें कर रहे हैं लेकिन असर की रिपोर्ट बताती है कि ये बैठकें कितनी बेअसर हैं... तो विश्व गुरु बनने तक हमें बताइये कि *-----आपके गांव या जिला के स्कूलों की स्थिति क्या है ? *-----वहां पर आपके बच्चों को या अन्य बच्चों को किस तरह की शिक्षा मिल रही है ? *-----और आपके गाँव के स्कूलों में स्कुल के भवन , बच्चों की पढ़ाई और शिक्षक और शिक्षिका की स्थिति क्या है ?
