बिहार राज्य के जमुई जिला से भीम राज मोबाइल वाणी के द्वारा कहते हैं कि हिंदी भारत की अमर वाणी है।हम भारतीयों को इस पर गर्व होना चाहिए। महात्मा गाँधी ने भी कहा था हिंदी भाषा ही है जो राष्ट् भाषा का दर्जा ले सकती है।अगर पुरे हिन्दुस्तान को एक कर रखना है तो हमें इस भाषा को अपनाना होगा।हर देश अपने स्थानीय भाषा को गर्व के साथ बोला जाता है।फिर भी हम सब क्यों इस भाषा को बोलने से हिचकिचाते हैं।हम सब हिंदी बोलने में शर्म क्यों महसूस करते हैं।इस मानसिकता को बदलने की जरुरत है।हिंदी दिवस बस एक दिन का दिवस मात्र बन कर रह गया है।हमें इसे दिल से अपनाने की जरुरत है

बिहार राज्य के जमुई जिला से भीम राज मोबाइल वाणी के द्वारा जानकारी देते हैं कि जमुई जिले के खैरा प्रखंड में मिशन इंद्रधनुष टीकाकरण का तृतीय चक्र शुभारंभ हुआ।प्रखंड स्थित स्वास्थ्य केंद्र में ग्राम स्वराज्य अभियान के तहत इस कार्यक्रम को शुरू किया गया।सदर अस्पताल के डॉक्टर श्याम मोहन दास ने बच्चों को दो बूँद खुराक पिला कर इसकी शुरुआत की।इस दौरान उन्होंने लोगों से अपील की इस अभियान का लाभ उठा कर इसे सफल बनाने में अपना योगदान दें।इसके साथ ही यह भी कहा अपने आस-पड़ोस में जो भी बच्चे या गर्भवती महिला ऐसे हैं,जिनका टीकाकरण नहीं हुआ हो उन्हें स्वास्थ्य केंद्र ले जा कर टीका जरूर दिलवाएं।इसके द्वारा बच्चे एवं गर्भवती महिला को कई जानलेवा बीमारियों से बचाया जा सकता है।मिशन इंद्रधनुष टीकाकरण का तृतीय चक्र 20 सितंबर तक चलेगा।इसमें महिलाओं का प्रसव पूर्व जॉंच कर उन्हें टीका दिया जाएगा

बिहार राज्य के जमुई जिला गिद्धौर प्रखंड से संजीवन कुमार मोबाइल वाणी के द्वारा आयुष्मान योजना की जानकारी दे रहे हैं।केंद्र सरकार की इस योजना से बिहार की 10 फीसदी आबादी यानि की 1 करोड़ 8 लाख की आबादी लाभान्वित होगी।इस योजना का लाभ देश के सुविधाहीन परिवारों के लिए शुरू की जाएगी। ताकि, लोगों को गंभीर बीमारियों या स्वास्थ्य संबंधी समस्या का निशुल्क इलाज हो सके।इसमें ग्रामीण क्षेत्रों के सुविधाहीन परिवारों और शहरी क्षेत्रों के भी कुछ तय पेशों में लगे परिवार शामिल किए जाएंगे।राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना” के तहत आने वाले हर परिवार को 5 लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा कराया जाएगा। इस बीमा कवर से आप छोटे और बड़े सभी तरह के अस्पतालों में इलाज करा सकेंगे।परिवार चाहे जितना बड़ा हो, उसके हर सदस्य को ”राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा योजना” के तहत लाभ मिलेगा। महिला-पुरुष, बच्चे-बूढे सब इस योजना के लाभार्थी हो सकते है। उम्र की भी कोई सीमा नहीं है।अस्पताल में भर्ती होने के पहले के स्वास्थ्य संबंधी खर्चे और अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद के खर्चे भी इसमें शामिल होंगे।अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में आने जाने का भत्ता निर्धारित दर पर परिवहन भत्ता भी दिया जाएगा।देश की हर बड़ी पंचायत में स्थित हेल्थ सेंटर और प्राइमरी हेल्थ सेंटर्स को ‘हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर’ के रूप में विकसित किया जाएगा।इसके तहत बिहार में कुल 645 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर खोले जायेंगे।अब तक 44 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर खोले गए है।हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर 12 बिमारियों का निःशुल्क इलाज एवं दवाएँ भी दी जायेंगी।इन बिमारियों में टीबी,काला ज्वर,मलेरिया,ब्लड प्रेशर,डाइबिटीज,ह्रदय रोग,नेत्र रोग,कान,नाक,गाला,दाँत से समबन्धित बिमारियों का उपचार किया जायेगा।सेंटर पर इमरजेंसी सुविधाएँ भी मुहैया करवाई जायेगी।

बिहार राज्य के जमुई जिला गिद्धौर प्रखंड से भीम राज मोबाइल वाणी के द्वारा जानकारी देते हैं कि लैब टेक्नीशियनों की हड़ताल खत्म हो गयी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से 10 दिन के अंदर बिहार में मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नीशियन काउंसिल के गठन के आश्वासन के बाद टेक्नीशियनों ने हड़ताल वापस लेने का निर्णय लिया। लेकिन फैसला लेने के पहले मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। हड़ताल के दूसरे दिन जमुई जिला में हड़ताल का असर देखने को मिला।जिले के सभी निजी पैथोलॉजी लैब भी बंद रखे गए।हालांकि पहले दिन की तुलना में दूसरे दिन पैथोलॉजी जांच अधिक हुई। दिन के 11:30 बजे तक लैब में सभी तरह की जांच हुई। लेकिन बाद में हड़तालियों ने हंगामा कर लैब को बंद करा दिया।

बिहार राज्य के नालंदा जिला से भीम राज मोबाइल वाणी के द्वारा जानकारी साझा करते हैं कि गिद्धौर में मृदा स्वास्थ्य दिवस पर कार्यक्रम का आयोजन संपन्न हुआ।प्रखंड के किसान भवन में प्रखंड कृषि पदाधिकारी के देख-रेख में विभिन्न जगहों से आये किसानों को मृदा संरक्षण एवं फसल उपज के वृद्धि और बचाव को ले कर जानकारी दी गयी। वहीँ कृषि समन्वयक अवध बिहारी ने किसानों को मिट्टी की ऊपजाव और खेतों को स्वच्छ और स्वस्थ रखने के लिए कई महत्वपुर्ण जानकारियां भी दी।इसके साथ ही दर्जनों किसानों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड का भी वितरण किया गया

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बिहार राज्य के गिद्धौर प्रखंड से संजीवन कुमारमोबाइल वाणी द्वारा जानकारी देते हैं कि ट्रेन के अलग-अलग रंगों के क्या मतलब होता है।दशकों तक उपयोग में आने वाले भूरे ईंट जैसे लाल रंग के कोचों को बदलने के लिए रेलवे द्वारा 90 के दशक के अंत में गहरे नीले कोच को पेश किया गया था।जिन ट्रेनों में हम सफर करते हैं,उनका रंग नीला, लाल और हरा क्यों होता है।ये जरुर जानना चाहिए।पटरियों पर दौड़ने वाली इन ट्रेनों का रंग यूं ही नहीं तय किया जाता है, इसके पीछे कुछ विशेष कारण होते हैं। कोच की डिजाइन और उनकी अलग-अलग विशेषताओं के आधार पर उनके रंग तय किये जाते हैं। देश में दो तरह की कोच वाली ट्रेनें चलती हैं एक है आइसीएफ कोच जिसका मतलब होता है इंटीग्रल कोच फैक्ट्री जो चेन्नई में स्थित है। आइसीएफ कोच की स्पीड 70 से 140 किमी प्रति घंटा होती है। इनके कोच मेल एक्सप्रेस या सुपरफास्ट ट्रेनों में लगाए जाते हैं। चेन्नई स्थित आइसीएफ की स्थापना 1952 में की गई थी। ये फैक्ट्री भारतीय रेलवे के अधीन काम करती है, यहां हर तरह के कोच बनाए जाते हैं जिसमें एसी, स्लीपर, जनरल, डेमू और मेमू कोच शामिल हैं।जबकि दूसरा है एलएचबी कोच जिसका मतलब होता है।ये आइसीएफ कोच से अलग होती हैं। देश की सबसे तेज ट्रेन गतिमान एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस और राजधानी एक्सप्रेस में एलएचबी कोच का प्रयोग किया जाता है।जबकि इसकी क्षमता 160 से 180 किमी प्रति घंटे की होती है। आइसीएफ कोच के मुकाबले एलएचबी कोच काफी बेहतरीन होते है। बता दें, एलएचबी कोच को फास्ट स्पीड ट्रेन के लिए ही डिजाइन किया गया है। एलएचबी कोच में रेलवे यात्रियों की यात्रा काफी सुरक्षित होती है और इनमें दुर्घटना होने की आशंका कम रहती है।लाल रंग के ट्रेन- आइसीएफ की ऐसी ट्रेनों के सभी कोच वातानुकूलित होती हैं। ज्यादातर राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनों के रंग लाल होते हैं। इनमें सभी कोच वातानुकूलित होते हैं।हरे रंग के ट्रेन- गरीब रथ के ट्रेन में हरे रंग के कोच का उपयोग किया जाता है। आपने देखा होगा कि भारतीय रेल ने जितनी भी गरीब रथ ट्रेनों की शुरुआत की है उन सभी का रंग हरा होता है।सफेद-लाल-नीले रंग की ट्रेन- इन रंगों के अलावा कभी-आपने पटरियों पर सफेद-नीले या सफेद-लाल रंग के ट्रेनों को भी देखा होगा। इनके संबंध में आपको बता दें कि कुछ रेलवे जोन ने अपने स्वयं के रंगों को नामित किया है, जैसे कि केंद्रीय रेलवे की कुछ ट्रेनें सफेद-लाल-नीली रंग योजना का पालन करती हैं। दूरंतो कोच का रंग पीला और हरा है जो कि ममता बनर्जी की एक पेंटिंग से प्रेरित है। ट्रेन में सफर करते वक्त रंगीन कोचों के साथ किसी-किसी ट्रेनों के कोचों पर बनी अलग-अलग रंग की धारियों को भी देखा होगा जैसे कि पीली या सफेद इत्यादि। क्या आपने कभी सोचा है कि ये रंगीन कोच पर बनी धारियां क्या दर्शाती हैं। हमारे भारतीय रेलवे में बहुत सारी चीजों को समझाने के लिए एक विशेष प्रकार के सिंबल का इस्तेमाल किया जाता है जैसे कि ट्रैक के किनारे बने सिंबल, प्लेटफार्म पे सिंबल। ब्लू रंग के आइसीएफ कोच पर कोच के अंत में खिड़की के ऊपर पीली या सफेद कलर की लाइनों या धारियों को लगाया जाता है जो कि वास्तव में इस कोच को अन्य कोच से अलग करने के लिए उपयोग किए जाते हैं। ये लाइनें द्वितीय श्रेणी के अनारक्षित कोच को इंगित करते हैं।

बिहार राज्य के गिद्धौर प्रखंड से भीम राज मोबाइल वाणी द्वारा जानकारी देते हैं कि रत्नपुर पंचायत के मध्य विद्यालय का औचक निरीक्षण प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी कौशलेन्द्र कुमार और वरीय बीआरपी अमरेश कुमार द्वारा किया गया।निरीक्षण के दौरान शिक्षक और शिक्षिका के साथ ही कई कर्मी और स्कूल के रसोईया भी उपस्थित थे।निरीक्षण के दौरान रसोईयों को साफ़-सफाई और भोजन के भंडारण की जानकारी दी गयी।इसके साथ ही उन्हें खाना बनाते समय स्वच्छता के साथ शुद्धता का ध्यान रखने के लिए भी कहा।

बिहार राज्य के जमुई जिला गिद्धौर प्रखंड से रंजन मोबाइल वाणी के द्वारा जानकारी साझा करते हुए बताते हैं कि सौहजानावार्ड नंबर नौ और वाना दी वार्ड नंबर सात में मुख्यमंत्री सात निश्चय योजना का कार्य जोरों पर चल रहा है।गाँवो में भी शहरों की तरह ही सफाई और सुविधा लोगों को प्राप्त हो सके इसलिए वार्ड सचिव हर गली में सड़क और पक्की नालियों का निर्माण कार्य खुद की निगरानी में करा रहे हैं।वार्ड सचिव का कहना है कि गाँव के समुचित विकास के लिए सात निश्चय योजना का कार्य करवाया जा रहा है। इसके साथ ही अपनी निगरानी में कार्य करवाने से कार्य में पारदर्शिता भी रहेगी।