बिहार राज्य के गिद्धौर प्रखंड से संजीवन कुमारमोबाइल वाणी द्वारा जानकारी देते हैं कि ट्रेन के अलग-अलग रंगों के क्या मतलब होता है।दशकों तक उपयोग में आने वाले भूरे ईंट जैसे लाल रंग के कोचों को बदलने के लिए रेलवे द्वारा 90 के दशक के अंत में गहरे नीले कोच को पेश किया गया था।जिन ट्रेनों में हम सफर करते हैं,उनका रंग नीला, लाल और हरा क्यों होता है।ये जरुर जानना चाहिए।पटरियों पर दौड़ने वाली इन ट्रेनों का रंग यूं ही नहीं तय किया जाता है, इसके पीछे कुछ विशेष कारण होते हैं। कोच की डिजाइन और उनकी अलग-अलग विशेषताओं के आधार पर उनके रंग तय किये जाते हैं। देश में दो तरह की कोच वाली ट्रेनें चलती हैं एक है आइसीएफ कोच जिसका मतलब होता है इंटीग्रल कोच फैक्ट्री जो चेन्नई में स्थित है। आइसीएफ कोच की स्पीड 70 से 140 किमी प्रति घंटा होती है। इनके कोच मेल एक्सप्रेस या सुपरफास्ट ट्रेनों में लगाए जाते हैं। चेन्नई स्थित आइसीएफ की स्थापना 1952 में की गई थी। ये फैक्ट्री भारतीय रेलवे के अधीन काम करती है, यहां हर तरह के कोच बनाए जाते हैं जिसमें एसी, स्लीपर, जनरल, डेमू और मेमू कोच शामिल हैं।जबकि दूसरा है एलएचबी कोच जिसका मतलब होता है।ये आइसीएफ कोच से अलग होती हैं। देश की सबसे तेज ट्रेन गतिमान एक्सप्रेस, शताब्दी एक्सप्रेस और राजधानी एक्सप्रेस में एलएचबी कोच का प्रयोग किया जाता है।जबकि इसकी क्षमता 160 से 180 किमी प्रति घंटे की होती है। आइसीएफ कोच के मुकाबले एलएचबी कोच काफी बेहतरीन होते है। बता दें, एलएचबी कोच को फास्ट स्पीड ट्रेन के लिए ही डिजाइन किया गया है। एलएचबी कोच में रेलवे यात्रियों की यात्रा काफी सुरक्षित होती है और इनमें दुर्घटना होने की आशंका कम रहती है।लाल रंग के ट्रेन- आइसीएफ की ऐसी ट्रेनों के सभी कोच वातानुकूलित होती हैं। ज्यादातर राजधानी एक्सप्रेस ट्रेनों के रंग लाल होते हैं। इनमें सभी कोच वातानुकूलित होते हैं।हरे रंग के ट्रेन- गरीब रथ के ट्रेन में हरे रंग के कोच का उपयोग किया जाता है। आपने देखा होगा कि भारतीय रेल ने जितनी भी गरीब रथ ट्रेनों की शुरुआत की है उन सभी का रंग हरा होता है।सफेद-लाल-नीले रंग की ट्रेन- इन रंगों के अलावा कभी-आपने पटरियों पर सफेद-नीले या सफेद-लाल रंग के ट्रेनों को भी देखा होगा। इनके संबंध में आपको बता दें कि कुछ रेलवे जोन ने अपने स्वयं के रंगों को नामित किया है, जैसे कि केंद्रीय रेलवे की कुछ ट्रेनें सफेद-लाल-नीली रंग योजना का पालन करती हैं। दूरंतो कोच का रंग पीला और हरा है जो कि ममता बनर्जी की एक पेंटिंग से प्रेरित है। ट्रेन में सफर करते वक्त रंगीन कोचों के साथ किसी-किसी ट्रेनों के कोचों पर बनी अलग-अलग रंग की धारियों को भी देखा होगा जैसे कि पीली या सफेद इत्यादि। क्या आपने कभी सोचा है कि ये रंगीन कोच पर बनी धारियां क्या दर्शाती हैं। हमारे भारतीय रेलवे में बहुत सारी चीजों को समझाने के लिए एक विशेष प्रकार के सिंबल का इस्तेमाल किया जाता है जैसे कि ट्रैक के किनारे बने सिंबल, प्लेटफार्म पे सिंबल। ब्लू रंग के आइसीएफ कोच पर कोच के अंत में खिड़की के ऊपर पीली या सफेद कलर की लाइनों या धारियों को लगाया जाता है जो कि वास्तव में इस कोच को अन्य कोच से अलग करने के लिए उपयोग किए जाते हैं। ये लाइनें द्वितीय श्रेणी के अनारक्षित कोच को इंगित करते हैं।