आंगनवाड़ी केंद्र पर बच्चों का किया गया टीकाकरण बीमारी से मिलेगी छुटकारा कोटवा प्रखंड में कररिया पंचायत के वार्ड संख्या 1 पर पीएचसी के द्वारा प्रथमिक स्वाथ्य केंद्र के निर्देश में आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 158 पर 0 से 5 वर्ष के बच्चों का टिकाकरण किया गया, वार्ड नंबर 1 पर नियमित टिकाकरण के तहद 16 बच्चो को विभिन्न प्रकार की बीमारियों से बचाव के लिए टिके दिए गए ,बच्चो में होने वाले विभिन्न प्रकार के बीमारियों मे खसरा,जापानी इंसेफ्लाइटिस, क्षयरोग,निमोनिया,डिप्थीरिया,टिटनेस ,चमकी बुखार सहित कई बीमारिया है ,जिनके बचाव के लिए टिके दिए जारहे है , टीकाकरण के साथ-साथ लोगों को कोरोना सभी डोज दिए जा रहे है , आशा कर्मी के सहयोग से एएनएम प्रियंका कुमारी द्वारा टीकाकरण किया गया है ,नियमित टिकाकरण में गर्भवती महिलाओं को कई बीमारियों से बचाव के लिये टिके दिए तथा महिलाओं को आयरन की गोलिया दी गई ।चिकित्सा प्रभारी डॉ गौरव कुमार ने बताया कि नियमित टिकाकरण प्रखंड के सभी पंचायतों में चलाई जा रही है ।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर किया गया सूखा राशन का वितरण कोटवा,पूर्वी चम्पारण:प्रखंड क्षेत्र के सभी 167 आँगनबाड़ी केंद्रों पर सोमवार को जिलाधिकारी एवं आईसीडीएस के निर्देश के आलोक में टीएचआर वितरण किया गया । टीएचआर वितरण से पहले सेविका केंद्र पर विकास समिति की बैठक बुलाई , जिसमे सभी लाभुकों को शामिल किया गया ,विकास समिति में टीएचआर वितरण से संबंधित सभी लाभुकों को इसकी जानकारी दी गई ,बैठक के बाद समिति के देख रेख में 167आंगनबाड़ी केन्द्रों पर टीएचआर वितरण किया गया।टीएचआर वितरण में कुपोषित बच्चों गर्भवती महिलाओं एवम प्रसूति महिलओ बीच राशन वितरण किया गया ।इस दौरान मौके पर महिला पर्यवेक्षिका पिंकी कुमारी ,अनिता तिवारी राजश्री अपने अपने सेक्टर में टीएचआर वितरण का निरीक्षण करती रही ।वहीजिलाधिकारी के निर्देश पर जिले से पहुचे पदाधिकारियो ने कई आँगनबाड़ी केंद्रों के टीएचआर वितरण की जांच की ।
पीपराकोठी प्रखण्ड में जातीय आधारित जनगणना का प्रथम चरण सम्पन्न हो गया है। जिसमें यह आंकड़े सामने आए हैं कि प्रखण्ड की जनसंख्या में 39.85 फीसद की बढ़ोतरी हुई है। बीडीओ मुकेश कुमार ने बताया कि प्रथम चरण की गणना सम्पन्न होने के बाद सभी आंकड़े जिला को सौंप दिया गया है। उसने कार्यरत सभी कर्मियों को बधाई दी है। बताया कि प्रखण्ड के कुल 88 गणना ब्लॉक व 70 उप गणना ब्लॉक में 186 गणना कर्मी लगाए गए थे। जिनके अथक प्रयास से समयावधि के अंतर्गत समय कार्य सम्पन्न हुआ। बताया कि प्रखण्ड के कुल 22221 परिवारों की गणना की गई। जिसमें भवनों की संख्या 14194 व मकानों की संख्या 15412 पाई गई। जिसमें परिवार के सदस्यों की कुल संख्या 99796 है। पूर्व 71355 थी जनसंख्या: पूर्व में प्रखण्ड के सभी छह पंचायतों की कुल जनसंख्या 71355 थी। जिसमें 39.85 फीसद की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। पूर्व में सूर्यपुर की जनसंख्या-12654, दक्षिण ढेकहां की 13400, पंडितपुर की 11765, सलेमपुर की 10500, गोबिंदापुर टिकैता की जनसंख्या 10666 थी।
प्राख्यात बिहार का मखाना अब चम्पारण में दस्तक दी दस्तक, धनौती नदी में करीब 3 किमी में हो रही है खेती
मिथलांचल की तरह अब मोतिहारी में भी मखाना की खेती शुरू की गई है। यहां भी इस खेती को बढ़ाया जा रहा है। बंजरिया में धनौती नदी में इसकी खेती की शुरूआत हुई है। रोहिनिया, सिजुआ व रतड़ा चंवर में भी खेती संभव है। यह एक नकदी फसल है। बाहर के व्यापारी आकर यहां उगाए गए मखाना को खरीद रहे हैं। पूर्व प्रमुख ललन कुमार इसकी खेती कर रहे हैं। करीब तीन किमी में इसकी खेती की जा रही है। यहां के मखाना का दाना बड़ा व गोल होता है। जिसकी बाजार में अधिक डिमांड है। मखाने की खेती की है खासियत:इसके खेती की खासियत यह है कि इसमें लागत ज्यादा नहीं आती। खेती के लिए तालाब और पानी की जरूरत होती है। ज्यादा गहरे तालाब की जरूरत भी नहीं होती। बस दो से तीन फीट गहरा तालाब ही इसके लिए काफी रहता है। जिन इलाकों में अच्छी बारिश होती है और पानी के संसाधन मौजूद हैं, वहां इसकी खेती खूब फलती-फूलती है। यूं तो मखाने की खेती दिसंबर से जुलाई तक ही होती है। लेकिन अब कृषि की नित-नई तकनीकों और उन्नत किस्म के बीजों की बदौलत किसान साल में मखाने की दो फसलें भी ले सकते हैं। एक हेक्टेयर तालाब में 80 किलो बीज बोये जाते हैं। सेहत का खजाना मखाना: जैविक विधि से होने वाले मखाना को स्वास्थ्य के लिए भी काफी फायदेमंद माना गया है। मखाना में मौजूद प्रोटीन मसल्स बनाने और फिट रखने में मदद करता है। मखाना में सोडियम, पोटेशियम और मैग्नीशियम अच्छी मात्रा में पाया जाता है। ब्लड प्रेशर की शिकायत में मखाना का सेवन किया जा सकता हैं। हड्डी और दांत के लिए भी यह फायदेमंद होता है। डायबिटीज में इसका सेवन लाभदायक होता है। मखाना में एस्ट्रिंजेंट से किडनी की बीमारी से बचता है। इसमें वसा नहीं होने से वजन भी कम करता है। इसमें भरपूर पोषक तत्व इम्युनिटी बढ़ाने में उपयुक्त माना गया है।
शहर वासियों को शहर में जल्द ही एक और रेल ओवरब्रिज का तोहफा मिलने वाला है। यह ओवरब्रिज कचहरी रेलवे गुमटी पर मिलेगा। गुमटी पर रेलवे पुल का निर्माण कर रही है। जबकि पुल निर्माण निगम दोनों तरफ एप्रोच पथ बना रहा है। एप्रोच पथ का काम कचहरी साइड में शुरू किया गया है। इसके लिए फिलहाल सर्विस लेन बनाई जा रही है। सर्विस लेन करीब 5 मीटर चौड़ा होगा। 1 सप्ताह के भीतर सर्विस लेन का काम पूरा कर लिया जाएगा। उसके बाद रिंग रोड बनाने का काम शुरू होगा। सर्विस लेन के लिए सड़क के दोनों तरफ से लगे बिजली के पोल को शिफ्ट किया गया है। जबकि पेड़ को हटाकर दूसरे जगह शिफ्ट किया गया है। इन जगहों पर अतिक्रमण खाली कराकर सर्विस लेन बनाई जा रही है। रेलवे गुमटी से कचहरी रोड में दोनों तरफ काम तेजी से चल रहा है। रेल ओवरब्रिज का एप्रोच पथ करीब 240 मीटर होगा। यानी कचहरी साइड में अंबेडकर भवन के पास से ओवरब्रिज शुरू होगा। जनवरी के अंत तक पाइलिंग का काम शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। पाइलिंग के काम के साथ दूसरे साइड में भी सर्विस लेन बनाने का काम शुरू होगा। उसकी भी तैयारी की जा रही है। 20 करोड़ की लागत से बन रहा पुल और एप्रोच पथ पुल निर्माण निगम के कार्यपालक अभियंता ने बताया कि 20 करोड़ की लागत से कचहरी गुमटी पर रेल ओवरब्रिज एवं एप्रोच पथ बन रहा है। ओवर ब्रिज को रेलवे खुद बना रही है। जबकि एप्रोच पथ पुल निर्माण निगम की एजेंसी बना रही है। 2 साल में काम को पूरा करने का लक्ष्य है। हालांकि काम में तेजी लाकर इसे इस साल के अंत तक पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकतर बंद रहती है गुमटी, लगता जाम कचहरी गुमटी पर आरओबी बनने से यहां लगने वाले जाम की समस्या से मुक्ति मिलेगी। यहां गुमटी बंद रहने से कचहरी चौक तक जाम लगता है। 250 मीटर बरियारपुर साइड में होगा एप्रोच पथ बरियारपुर साइड का एप्रोच पथ कचहरी साइड की तुलना में थोड़ा लंबा होगा। करीब 10 मीटर अधिक लंबाई में एप्रोच पथ बनाई जाएगी। इस तरफ का काम भी जल्द ही शुरू होने की संभावना है। इधर भी सर्विस लेन कचहरी रोड के पैरलर में बनेगा। सर्विस लेन बनने के बाद सेंट्रल पोर्शन में एप्रोच पथ बनाने का काम शुरू होगा। दोनों साइड का एप्रोच पथ पिलर पर बनेगा। जिससे नीचे का जगह खाली रहेगा। वहां पार्किंग की व्यवस्था की जा सकती है या अन्य काम भी हो सकता है। बलुआ ओवरब्रिज की तरह यहां का एप्रोच पथ होगा। हालांकि, रेल पुल समान्य होगा। एप्रोच पथ के बाहर की चौड़ाई 8.4 मीटर जबकि अंदर का 7.5 मीटर होगी।
शांति समिति की बैठक
कोटवा प्रखंड में जीवन प्रमाणीकरण से वंचित वृद्ध पेंशन धारियों हो सकता है पेंशन कोटवा प्रखंड के लिए जीवन प्रमाणीकरण से वंचित वृद्ध पेंशन धारकों के लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर 18 जनवरी से 15 फरवरी तक प्रखंड के बंचित वृद्ध पेंशन धारकों को जीवन प्रमाणीकरण कराना अनिवार्य होगा, वंचित वृद्ध पेंशन धारक जीवन प्रमाणीकरण नहीं कराने पर मार्च से पेंशन से वंचित हो जाएगा, कोटवा प्रखंड में 1876 पेंशन धारियों का नॉन ट्रेकेबुल के रूप में चिन्हित किया गया है जिलाधिकारी के निर्देश पर उनका डोर टू डोर भौतिक सत्यापन किया जाना है इसको लेकर सभी पंचायत सचिव विकास मित्र कार्यपालक सहायक और जनप्रतिनिधियों को निर्देशित किया गया हैजिसे फरवरी माह के अंतिम समय तक पेंशन धारियों का जीवन प्रमाणीकरण किया जा सके ।
कार ड्राइवर साइकिल सवार को 8 किलोमीटर तक घसीट कर कुचला प्राथमिकी दर्ज कोटवा थाना क्षेत्र में दिल्ली के कंझावला जैसा कांड हो गया था. जब एक कार ड्राइवर ने अपनी कार से एनएच 27 बंगरा चौक के पास एक साइकिल सवार बुजुर्ग शख्स को टक्कर मार दिया ,बुजुर्ग कार के बोनट में फस गया ,कार रोकने के लिए बुजुर्ग चिल्लाता रहा जिनको कार चालक 8 किलो मीटर कदम चौक के पास गिरा दिया तथा कुचलते हुए भाग निकला लेकिन कार को पिपरा कोठी के पास पकड़ पुलिस ने जप्त कर लिया, मामले में 70 वर्षीय मृतक शंकर चौधुर के पुत्र कौशल चौधुर ने प्राथमिकी दर्ज कराते हुए कार का रजिस्ट्रेशन नम्बर देकर उसके चालक पर आरोप लगाया है। बताया गया कि 20 जनवरी की शाम शंकर चौधुर अपना खेत देखकर लौट रहे थे , इस दौरान बंगरा चौक पर उक्त घटना हो गई , थानाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह कार नंबर के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की जा रही । .
मरीजों को त्वरित इलाज मुहैया कराने के उद्देश्य से जिले में पशुपतिनाथ डिस्ट्रीब्यूटर व सम्मान फाउंडेशन एंबुलेंस का संचालन किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के द्वारा जिले के सदर अस्पताल सहित सभी अनुमंडलीय, सीएचसी व पीएचसी में बेसिक लाइफ सपोर्ट सिस्टम व एडवांस लाइफ सपोर्ट सिस्टम से लैस एंबुलेंस दी गई है। इसका लाभ सीरियस मरीजों को नही मिल रहा है। इन एंबुलेंस में अनुभवहीन ईएमटी की तैनाती की गई है। ऐसे में सड़क दुर्घटना व कार्डियक अटैक जैसे केस के दौरान ईएमटी गोल्डन आवर का पालन नहीं कर पा रहे हैं। मरीज को अस्पताल पहुंचने से पहले रास्ते में कोई भी उपचार नहीं मिल रहा है। एंबुलेंस में चलने वाले ईएमटी (इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन) को विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। गंभीर मामलों में ईएमटी को मरीज की बीपी, दिल की धड़कन, शुगर का स्तर जांच कर उपचार करना है। सूत्र बताते हैं कि जिले में 77 एंबुलेंस में 27 एडवांस लाइफ सपोर्ट सिस्टम से लैस हैं। क्या है गोल्डन आवर कार्डिएक अरेस्ट व दुर्घटना के बाद घायल के लिए एक घंटे का समय अति महत्वपूर्ण होता है। इस अवधि को ही गोल्डन आवर कहते हैं। यदि इस अवधि में मरीज को सुरक्षित रखने में ईएमटी कामयाब हो गए तो व्यक्ति की बचने की संभावना 50 प्रतिशत तक बढ़ जाती है। इस एम्बुलेंस में ऑक्सीजन सुविधा के साथ-साथ वेंटिलेटर, डिफिब्रीलेटर-सह-कॉर् डियक मॉनिटर, सेन्ट्रल वेन कैथेटर्स आदि की सुविधा उपलब्ध होती है। ईएमटी को दी गई है बेसिक ट्रेनिंग: जिले में संचालित सभी एडवांस व बेसिक लाइफ सपोर्ट सिस्टम वाला एंबुलेंस बिल्कुल नया है। जिसमें नई टेक्नोलॉजी का जीवन रक्षक उपकरण लगा हुआ है। जिसके संचालन के लिए दक्ष ईएमटी का होना जरूरी है। जबकि एंबुलेंस में लगाए गए उपकरण के कंपनी के इंजीनियर द्वारा कुछ ईएमटी को ही सिर्फ बेसिक ट्रेनिंग दी गई है। जबकि एडवांस लाइफ सपोर्ट सिस्टम से लैस एंबुलेंस के संचालन के लिए ईएमटी को एडवांस ट्रेनिंग की जरूरत है। एंबुलेंस कंट्रोलर, पशुपतिनाथ डिस्ट्रीब्यूटर, आनंद कुमार ने बताया कि एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस में नई टेक्नोलॉजी के साथ सेंसर लगा है। एंबुलेंस में जो उपकरण लगाए गए हैं उस कंपनी के इंजीनियर ने कुछ ईएमटी को ही ट्रेनिंग दी है। बाकी की ट्रेनिंग इन्ही ट्रेंड ईएमटी के द्वारा देने की बात कही गई थी। ईएमटी को नई टेक्नोलॉजी में सेट करने में समय लगता है। ऐसे अनट्रेंड ईएमटी की ड्यूटी एडवांस लाइफ सपोर्ट वाले एंबुलेंस में नही लगाया जाता है। सीएस डॉ. अंजनी कुमार कहते हैं कि एंबुलेंस का संचालन एजेंसी को करना है। ईएमटी को ट्रेंड भी एजेंसी को ही करना है। अनट्रेंड ईएमटी अगर एडवांस लाइफ सपोर्ट वाले एंबुलेंस में ड्यूटी कर रहे हैं तो यह गलत है। एजेंसी को सभी को ट्रेंड करने के लिए शीघ्र ही पत्राचार किया जाएगा।
उन जॉब कार्ड धारको के जॉब कार्ड को रद्द किया जा सकता है जिनका जॉब कार्ड तो बना है लेकिन इनका आधार कार्ड नहीं बना है। इनमें से ज्यादातर वे जॉब कार्ड धारक है जो कि, अपनी आजीविका के लिए दूसरे राज्यों में प्रवासी मजदूर के तौर पर कार्य करते हैं। या फिर पिछले 3 सालो से मनरेगा मे सक्रिय नहीं है। जॉब कार्ड को युद्ध स्तर पर आधार कार्ड से लिंक करने का कार्य शुरु कर दिया गया है। कहा गया है कि, सभी जॉब कार्ड धारको को 26 जनवरी, 2023 तक अपने – अपने जॉब कार्ड से अपने आधार कार्ड को लिंक करना अनिवार्य है। 26 जनवरी, 2023 तक अपने जॉब कार्ड को आधार कार्ड से लिंक ना करने पर आपके जॉब कार्ड को रद्द किया जा सकता है।
