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गिद्धौर प्रखंड में प्रखंड अध्यक्ष नंदन यादव के अध्यक्षता में बिहार में मतदाता सूची के पुनरीक्षण कार्य पर रोक लगाने की मांग को लेकर महागठबंधन ने बुधवार को बिहार बंद का आह्वान किया। गिद्धौर प्रखंड में इसका व्यापक प्रभाव देखने को मिला। महागठबंधन के कार्यकर्ताओं ने घंटो से अधिक तक गिद्धौर झाझा मुख्य मार्ग के प्रखंड मुख्यालय के समीप बांस-बल्लों से अवरुद्ध कर दिया। इस दौरान यातायात पूरी तरह से ठप रहा। कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग, केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की।
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गिद्धौर प्रखंड क्षेत्र के पूर्वी गुगुलडीह पंचायत के फुटबॉल मैदान पूर्वी गुगुलडीह के खेल मैदान में जनता दल पंचायती राज प्रकोष्ठ का बैठक आयोजित किया गया। बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी दिनांक 23 अक्टूबर 2024 को बापू सभागार पटना कार्यक्रम में भाग लेने एवं संगठन को मजबूत बनाने हेतु एकदिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कुछ महीने पहले की बात है, सरकार ने महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए कानून बनाया है, जिससे उन्हें राजनीति और नौकरियों में आरक्षण मिलेगा, सवाल उठता है कि क्या कानून बना देने भर से महिलाओं को उनका हक अधिकार, बेहतर स्वास्थय, शिक्षा सेवाएं मिलने लगेंगी क्या? *----- शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और आर्थिक अवसरों तक महिलाओं की पहुंच में सुधार के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं *----- महिलाओं को जागरूक नागरिक बनाने में शिक्षा की क्या भूमिका है? *----- महिलाओं को कानूनी साक्षरता और उनके अधिकारों के बारे में जागरूक कैसे किया जा सकता है"
बिहार राज्य के जमुई जिला से मोबाइल वाणी संवाददाता भीम राज ने बताया कि जमुई लोकसभा के नवनिर्वाचित सांसद अरुण भारती गिद्धौर प्रखंड में स्थित लाल कोठी पहुंचे । विस्तार पूर्वक खबर सुनने के लिए ऑडियो क्लिक करें
भारत में जहां 18वीं लोकसभा के लिए चुनाव हो रहे हैं। इन चुनावों में एक तरफ राजनीतिक दल हैं जो सत्ता में आने के लिए मतदाताओं से उनका जीवन बेहतर बनाने के तमाम वादे कर रहे हैं, दूसरी तरफ मतदाता हैं जिनसे पूछा ही नहीं जा रहा है कि वास्तव में उन्हें क्या चाहिए। राजनीतिक दलों ने भले ही मतदाताओं को उनके हाल पर छोड़ दिया हो लेकिन अलग-अलग समुदायो से आने वाले महिला समूहों ने गांव, जिला और राज्य स्तर पर चुनाव में भाग ले रहे राजनीतिर दलों के साथ साझा करने के लिए घोषणापत्र तैयार किया है। इन समूहों में घुमंतू जनजातियों की महिलाओं से लेकर गन्ना काटने वालों सहित, छोटे सामाजिक और श्रमिक समूह मौजूदा चुनाव लड़ रहे राजनेताओं और पार्टियों के सामने अपनी मांगों का घोषणा पत्र पेश कर रहे हैं। क्या है उनकी मांगे ? जानने के लिए इस ऑडियो को सुने
दोस्तों, हमारे यह 2 तरह के देश बसते है। एक शहर , जिसे हम इंडिया कहते है और दूसरा ग्रामीण जो भारत है और इसी भारत में देश की लगभग आधी से ज्यादा आबादी रहती है। और उस आबादी में आज भी हम महिला को नाम से नहीं जानते। कोई महिला पिंटू की माँ है , कोई मनोज की पत्नी, कोई फलाने घर की बड़ी या छोटी बहु है , कोई संजय की बहन, तो कोई फलाने गाँव वाली, जहाँ उन्हें उनके मायके के गाँव के नाम से जाना जाता है। हम महिलाओ को आज भी ऐसे ही पुकारते है और अपने आप को समाज में मॉडर्न दिखने की रीती का निर्वाह कर लेते है। समाज में महिलाओं की पहचान का महत्व और उनकी स्थिति को समझने की आवश्यकता के बावजूद, यह बहुत दुःख कि बात है आधुनिक समय में भी महिलाओं की पहचान गुम हो रही है। तो दोस्तों, आप हमें बताइए कि *-----आप इस मसले को लेकर क्या सोचते है ? *-----आपके अनुसार से औरतों को आगे लाने के लिए हमें किस तरह के प्रयास करने की ज़रूरत है *-----साथ ही, आप औरतों को किस नाम से जानते है ?
