ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, छठ पर्व में छठी माता के साथ सूर्य देव की पूजा की जाती है। ऐसे में छठी माता को ठेकुआ विशेष प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है। क्योंकि छठी माता को ठेकुआ बेहद ही प्रिय है। मान्यता है कि छठ पर्व ठेकुआ के बिना अधूरा माना जाता है, क्योंकि ठेकुआ छठ पर्व का विशेष प्रसाद है। छठ में ठेकुआ मिट्टी से बने चूल्हे और आम की लकड़ी की व्यवस्था करनी होती है। साथ ही गेहूं के आटे, गुड़ और सूजी का भी व्यवस्था करना होता है। ठेकुआ को छठ पर्व का विशेष पकवान कहा जाता है। ठेकुआ के आकार-प्रकार और रंग की बात करें तो यह बहुत हद तक सूर्य देव जैसा दिखता है। जिसके कारण ठेकुआ को सूर्य भगवान का प्रतीक भी माना गया जाता है।
लोक आस्था का महापर्व छठ को लेकर गिद्धौर बाजार में सामानों की खरीदारी को लेकर लोगों की भीड़ शुरू हो गयी हैै। छठ पूजा को लेकर फलों की आवक तेज हो गयी है वहीं दाम में वृद्धि हो गयी हैै। इसके साथ सभी पुजन सामाग्री बाजार में सजने लगे हैं। छठ पूजा को लेकर बाजार में सुप डाला, पूजा सामाग्री, नारियल आदि की डिमांड बढ़ गई है। बता दे कि आज रविवार को भगवान सूर्य को पहला अर्घ्य दिया जाएगा तथा कल सोमवार को दूसरे उदीयमान सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। छठ पूजा को लेकर अभी से ही पूरे शहर में छठ मइया के गीत सुनायी देने लगी है। सभी छठ व्रती अपने घरों की सफाई में लगे हैं, छठ पूजा में आस्था का विशेष ध्यान रखा जाता है। छठ घाटों की सफाई के साथ सजावट का काम जारी हो गया हैै। छठ को लेकर विभिन्न समितियों के द्वारा गली मोहल्लों के सजाने का काम किया जा रहा है। छठ पूजा को लेकर सूप 40 से 50 रुपए बिक रहा है।
नेम-निष्ठा और लोक आस्था का महापर्व छठ की शुरुआत बीते 17 नवम्बर को नहाय खाय के साथ ही हो गई थी शनिवार को खरना था उसके साथ ही 36 घंटे का निर्जला उपवास की शुरूआत हो गई है। विस्तार पूर्वक खबरों को सुनने के लिए ऑडियो पर क्लिक करें। धन्यवाद
सूर्य उपासना का महापर्व छठ अपने आप में बहुत ही खास है इनकी महिमा की जितनी भी बखान की जाए वह कम है! छठ एक ऐसा त्यौहार जो चार दिनों तक चलता है, इसमें न कोई दंगा होता है और ना ही इंटरनेट कनेक्शन बंद होती, किसी शांति समिति की बैठक कराने की जरुरत नहीं पड़ती, चंदे के नाम पर गुंडा गर्दी नहीं होती और जबरन पैसों की उगाही भी नहीं होती ! शराब की दुकाने बंद रखने का नोटिस भी नहीं साटनी पड़ती, मिठाई के नाम पर मिलावट नहीं परोसी जाती है! उंच - नीच का भेद नहीं किया जाता, व्यक्ति-धर्म विशेष के जयकारे नहीं लगाए जाते, किसी से अनुदान और अनुकम्पा की अपेक्षा नहीं की जाती, राजा रंक एक कतार में खड़े होते है, समझ से परे रहने वाले मंत्रो का उच्चारण नहीं होते हैं. दान दक्षिणा का रिवाज नहीं है, प्रकृति के ऐसे महा पर्व #छठ पूजा की आपको और आपके समस्त परिवार जनों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनायें
पांच विपक्ष के तहत चल रहे अभियान पर किस बिहारी तिवारी के द्वारा यह बताया जा रहा है की कंपनी में 12 से 16 घंटे काम लिया जाता है और हम लोग भी अधिक पैसे कमाने के लिए काम करते हैं लेकिन इसका परिणाम हमारे जीवन पर बड़ा पड़ रहा है लेकिन हमारे साथ भी मजबूरी है इसके कारण ओवर टाइम काम करना पड़ता है
अंतरराष्ट्रीय पटल पर काम के घंटे एवं कार्य दिवस काम होते जा रहे हैं लेकिन हमारे देश में सप्ताह के पूरे दिन एवं कार्य दिवस के साथ-साथ कार्य का समय 12 से 16 घंटे हो रहे हैं और श्रमिक एवं कर्मचारी उसे कार्य को मजबूरी बस कर रहे हैं जिसके कारण कर्मचारी का मानसिक एवं शारीरिक परेशानी बढ़ता जा रहा है एवं अपने परिवार एवं बच्चों से दूर होता जा रहा है अधिक काम करने के कारण लोग थकान अधिक महसूस कर रहे हैं और अपने परिवार एवं बच्चों पर ध्यान नहीं दे पा रहे हैं और अपनी थकान को दूर करने के लिए कर्मचारी और श्रम एक नशा की ओर अग्रसर भी हो रहे हैं
एक मजदूर देश के निर्माण में बहुमूल्य भूमिका निभाता है और उसका देश के विकास में अहम योगदान होता है। किसी भी समाज, देश, संस्था और उद्योग में काम करने वाले श्रमिकों की अहम भूमिका होती है। मजदूरों के बिना किसी भी औद्योगिक ढांचे के खड़े होने की कल्पना नहीं की जा सकती। इसलिए श्रमिकों का समाज में अपना ही एक स्थान है, लेकिन आज भी देश में मजदूरों के साथ अन्याय और उनका शोषण होता है। आज भारत देश में बेशक मजदूरों के 8 घंटे काम करने का संबंधित कानून लागू हो लेकिन इसका पालन सिर्फ सरकारी कार्यालय ही करते हैं, बल्कि देश में अधिकतर प्राइवेट कंपनियां या फैक्टरियां अब भी अपने यहां काम करने वालों से 12 घंटे तक काम कराते हैं। जो कि एक प्रकार से मजदूरों का शोषण हैं। आज जरुरत है कि सरकार को इस दिशा में एक प्रभावी कानून बनाना चाहिए और उसका सख्ती से पालन कराना चाहिए।
सरकारी विद्यालय का बदहाल व्यवस्था
छठ महापर्व में आज शनिवार को खरना (लोहंडा) धूमधाम के साथ मनाया जा रहा है। अधिकतर व्रतियों के घरों में इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है। आज सिर्फ दूध का इंतजाम करना है। इसके लिए खटालों के साथ-साथ दूध बूथों पर लोगों ने एडवांस बुकिंग करा ली है। जिले में करीब 2 लाख लीटर दूध की खपत छठ में होने का अनुमान है। पर्व के लिए विभिन्न कंपनियों ने हजार से अधिक लीटर से अधिक दूध का इंतजाम किया है। सामान्य दिनों की तुलना में सुधा ब्रांड के दूध की करीब तीन गुनी बुकिंग हुई है। अन्य कंपनियों ने भी अतिरिक्त दूध मंगाया है। शुक्रवार को देर रात तक कंपनियों ने बूथों तक दूध पहुंचाया। यहां सबसे अधिक बिक्री सुधा और अमूल दूध की होती है।
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