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बिहार राज्य के जमुई जिला सिकंदरा प्रखंड से विजय कुमार मोबाइल वाणी के द्वारा कहते हैं की इसके साथ ही 119 देशों के भुख सुचकांक में हमारा देश 130 नम्बर पर है।ऐसे में हमें यह विचार करने की जरूरत है की इस परिस्थिति से कैसे निकला जाए।समाज को जागरूक करने के साथ-साथ सरकार को भी कई आयामों पर कार्य करने की जरूरत है।शहर और गाँवो में अम्मा रसोई जैसी व्यवस्था करनी होगी।जिससे बच्चों को संतुलित आहार न्यूनतम दर पर मिल सके।इस कार्य को करने में खर्च भी होंगे जिनके लिए सरकार को तैयार रहना चाहिए।

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बिहार राज्य के जिला जमुई प्रखंड सिकंदरा से चंद्रशेखर आजाद सिकंदरा मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि पौष्टिक आहार माताओं व बच्चों को शारीरिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान निभाता है। जिला कुपोषण के सबसे ज्यादा शिकार हैं। जन्म से छह माह तक बच्चे को केवल माँ का दूध ही पिलाना चाहिए।जब बच्चा सात महीने का हो जाए तो उसे हर रोज ऊपरी आहार अवश्य देना चाहिए।जैसे चावल-दाल सब्जी मिस कर खिलाना चाहिए।बच्चों को खाना माप के अनुसार खिलाना चाहिए।6-8 माह के बच्चे को एक पाव की कटोरी से आधी कटोरी दिन में दो बार खाना खिलाना चाहिए।9-11 माह के बच्चे को 1 पाव की कटोरी से दिन में तीन बार आधी कटोरी के माप से खाना देना चाहिए।12-24 माह के बच्चे को 1 पाव की कटोरी से दिन में 3 बार खाना खिलाना चाहिए।बच्चा अगर खाना ना खाये तो उसे प्यार से बार-बार खाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए।माँ के दूध से सिर्फ 6 महीने तक ही बच्चों को पूरा पोषण मिल पाता है।उसके बाद माँ के दूध के साथ-साथ बच्चे के लिए पूरक आहार बेहद जरुरी होता है।बच्चों को सात समूह में से चार समूह का खाना हर रोज जरूर खिलाना चाहिए।इसलिए पोषण माह के तहत लोगों को इसके लिए जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि पोषण माह का खास उद्देश्य प्रसव के समय जच्चा-बच्चा की सुरक्षा अति आवश्यक है। जिससे जन्म लेने वाले बच्चे को कुपोषण से रक्षा किया जा सके। वहीं महिलाओं व किशोरियों में खून की कमी आम रुप से देखी जा रही है। पौष्टिक आहार से इसे दूर किया जा सकेगा।

बिहार राज्य के जमुई जिला सिकंदरा प्रखंड से विजय कुमार मोबाइल वाणी के द्वारा कहते हैं की बिहार शिक्षक पात्रता परीक्षा 2011 में पास हुए विद्यार्थीयों का सर्टिफिकेट अब एक्सपायर होने वाला है। बिहार में अब भी 2 लाख शिक्षक पदों पर रिक्तियाँ हैं,लेकिन अब तक सरकार बहाली नहीं कर रही है।बिहार के सरकारी स्कुलों में गरीब मजदुर और किसान बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं।ऐसी परिस्थिति में शिक्षा की गुणवत्ता कैसी होगी इसका अंदाजा लगाना कठिन नहीं है।जबकि यही बच्चे और इनकी शिक्षा देश का भविष्य होगी।लेकिन ऐसे हालत में अच्छी शिक्षा की कल्पना भी नहीं की जा सकती है। इसके लिए सरकार को पहल करने की जरुरत है

बिहार राज्य के जमुई जिला के सिकंदरा प्रखंड से विजय कुमार सिंह मोबाइल वाणी के माध्यम से अपनी राय देते हुए कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री द्वारा पोषण अभियान का शुभारम्भ 8 मार्च 2018 को किया गया। वह अभियान बच्चियों ,गर्भवती माताओं तथा धात्री माताओं के पोषण स्तर को बेहतर बनाने हेतु हैरत की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पोषण अभियान के तहत पुरे सिकंदरा में पोषण माह के रूप में मनाया जा रहा है। विभिन्न विभागों द्वारा चलाये जा रहे पोषण सम्बन्धी योजनाओं का समन्वय कर्मचारियों का कौशल विकास ,व्यवहार परिवर्तन संसार ,सामुदायिक एकजुटता प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन भागीदारी तथा शिकायत निवारण एवं निगरानी के लिए मोबाइल तकनीक का उपयोग ,कुछ ऐसे क्षेत्र है जिसके द्वारा देश में अल्पपोषण की समस्या को कम करने का लक्ष्य रखा गया है।

बिहार राज्य के जमुई जिला सिकंदरा प्रखंड से विजय कुमार मोबाइल वाणी के द्वारा कहते हैं कि सरकार हमेशा से ही देश से कुपोषण को दूर कर सुपोषण लाने की ओर कार्य किया है।छोटे बच्चों से ले कर किशोरों तक में पोषण की कमी को पूरा करने के उद्देश्य से स्कूलों में मध्याह्न भोजन की व्यवस्था की है।लेकिन स्कूलों में बच्चों के सेहत और सरकार के मंशा के साथ धोखा किया जा रहा है। मध्याह्न भोजन के नाम पर पतली खिचड़ी और हरी सब्जियों के नाम पर आलू की मात्रा ज्यादा दे कर बनी हुई सब्जियाँ दे कर खाना पूर्ति की जाती है।जबकि सरकार ने स्कूलों में हर दिन के खाने का मेनू तय कर रखा है जिसमें अंडा से ले कर मौसमी फल तक शामिल हैं।लेकिन स्कूलों में ये सब देखने को भी नहीं मिलता है।इस सम्बंध में अभिभावकों को भी जागरूक नहीं किया जाता है।क्यूँकि स्कूल प्रबंधन अभिभावकों के समक्ष मध्याह्न भोजन का जिक्र तक नहीं करना चाहती है।