नमस्कार आदाब श्रोताओं, मोबाइल वाणी आपके लिए लेकर आया है रोजगार समाचार। यह नौकरी उन लोगों के लिए है जो बिहार राज्य पुलिस द्वारा निकाली गयी स्टेनो सहायक उप निरीक्षक पद पर 29,200 - 92,300 रूपए वेतनमान पर कार्य करने के लिए इच्छुक है । इन पदों पर कुल एक सौ तैंतीस रिक्तियां निकाली गयी है। इस पद के लिए वैसे उम्मीदवार आवेदन कर सकते है जिन्होंने किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से 12वीं की परीक्षा उत्त्रिण किया हो। इन पदों पर आवेदन करने के लिए आयु सीमा अधिकतम 25 वर्ष रखी गई है । उम्मीदवारों का चयन 12वीं में प्राप्त किये अंक, लिखित परीक्षा, टाइपिंग टेस्ट और कंप्यूटर टेस्ट के आधार पर किया जायेगा। इन पदों पर आवेदन करने के लिए आवेदन शुल्क, सामान्य और ओ.बी.सी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 700 रुपये तथा एससी और एसटी वर्ग के उम्मीदवारों के लिए 400 रुपये रखा गया है। शुल्क का भुगतान ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया के दौरान किया जाएगा। यदि आप के पास मांगी गयी सारी योग्यताएं है तो आप अपना आवेदन http://www.bpssc.bih.nic.in/ भर सकते है। याद रखिये आवेदन पत्र 30 मार्च 2020 तक ही स्वीकार किये जायेंगे।

दोस्तों, बिहार में कुपोषण के गंभीर हालातों के कारण हमारे बुधिया चाचा और साधना काफी परेशान हैं. वे इस मामले में बात करने के लिए गांव के सरपंच से मिलने पहुंचे हैं तो क्या आप जानना नहीं चाहेंगे कि आखिर सरपंच से उनकी क्या बात हुई!

ईद का चांद दिख चुका है और बुधवार को पूरे भारत में ईद का त्यौहार मनाया जाएगा. ग्रामवाणी परिवार की तरफ से आप सभी को ईद मुबारक...

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चंपारण, यहां के प्राकृतिक नजारे जितने खूबसूरत हैं उससे कहीं ज्यादा समृद्ध है यहां का इतिहास. चंपारण वह धरती है जहां भारत महात्मा गांधी ने 1917 में किसानों को शोषण से मुक्त करवाने के लिए सत्याग्रह शुरू किया था और यह जगह ऐतिहासिक हो गई. लेकिन दशकों बाद एक बार फिर चंपारण नए सत्याग्रह के लिए तैयार है. क्या आप नहीं जानना चाहेंगे कि यह कौन सा सत्याग्रह है...? सुनिए और हिस्सा बनिए नेटिव पिक्चर संस्था और ग्रामवाणी की संयुक्त मुहिम का

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सोशल मीडिया पर इन दिनों एक शख्स की तस्वीर खूब वायरल हो रही है जिसके साथ दावा किया जा रहा है कि वो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भाई है और चाय की दुकान चलाता है. लेकिन खोजबीन करने पर पता चला कि तस्वीर में नजर आ रहा शख्स योगी आदित्यनाथ का भाई नहीं है और यह दावा झूठा है. सोशल मीडिया पर कई अकाउंट्स और पेज पर यह तस्वीर पोस्ट की गई है. फेसबुक यूजर “नीलम चतुर्वेदी विधायक” ने फोटो पोस्ट कर कैप्शन में लिखा: “उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी जी के भाई हैं जो चाय की दुकान चला रहे हैं, कांग्रेस के कोई भी बड़े नेता का भाई इस तरह का हो तो जरूर पोस्ट कीजिएगा”. लेकिन योगी आदित्यनाथ की बहन शशि सिंह और उनके पति पति पूरण पायल ने साफ किया है कि तस्वीर में नजर आ रहा व्यक्ति न तो योगी का भाई है और न ही कोई रिश्तेदार. उन्होंने यह भी बताया कि योगी आदित्यनाथ का कोई भी भाई चाय की दुकान नहीं चलाता. मुख्यमंत्री योगी के तीन भाई और तीन बहनें हैं. साथियों आपसे अपील है कि ऐसी भ्रामक पोस्ट पर विश्वास न करें. कुछ राजनीतिक पार्टियां आपको चुनाव के दौरान बहकाने की कोशिश कर सकती हैं. इसलिए निष्पक्ष रहें और झूठी खबरों के प्रति जागरूक बनें.

फेसबुक पर एक वीडियो इस समय खूब धूम मचा रहा है, इसमें दावा किया जा रहा है कि इंस्टेंट नूडल मैगी में स्वाद बढ़ाने के चक्कर में सूअर की चर्बी का इस्तेमाल किया जा रहा है. फेसबुक पर सीक्रेट इंडियन नाम के एक पेज ने इस दावे के साथ ये वीडियो अपलोड की. इस वीडियो में ये भी कहा गया कि ऐसे कई अन्य पैकेज फूड हैं जिसमें ऐसा फ्लेवर एनहांसर डाला जाता है जो सूअर की चर्बी से बनता है. वीडियो के शीर्षक में लिखा है 'मैगी खाते हो सच को फैलाओ'. लेकिन यह वीडियो और इसमें दर्शाया गई कहानी झूठी है. शुरुआत में वीडियो लेज़ चिप्स में स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल हुए एनहांसर के बारे में बताता है और दावा करता है कि इसमें सूअर की चर्बी होती है. उसके बाद वीडियो में कहा जाता है कि कई खाद्य पदार्थों में इसी एनहांसर का प्रयोग किया जाता है. वीडियो में ये भी बताया गया कि कैसे सूअर की चर्बी को 18वीं सदी में कई चीज़ों के लिए उपयोग में लाया जाता था. वीडियो लोगों को मैगी के सेवन के बारे में जागरूक करने की बात तो करता है लेकिन पूरे वीडियो में मैगी का तो कोई ज़िक्र ही नहीं है. AFWA ने पाया कि इस दावे का कोई पुख्ता सबूत नहीं है. हालांकि E 635 और E631 जानवरों से ही प्राप्त किये जा सकते हैं,लेकिन जानवर ही इस एनहांसर का एकलौता स्रोत नहीं हैं. नेस्ले ने अपनी वेबसाइट के FAQ https://www.maggi.in/faq सेक्शन में साफ़ बताया है कि मैगी के E 635 एनहांसर को बनाने के लिए चुकंदर और यीस्ट का प्रयोग होता है जो जानवरों से नहीं लिया जाता. तो साथियों इस वीडियो को सच न मानें. यह सच ​है कि हमें पौष्टिक आहार खाना चाहिए और जंक फूड से दूर रहना चाहिए लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि इन खाद्य पदार्थों से दूरी बनाने के लिए ऐसे भ्रामक वीडियो पर विश्वास करें.

हाईकोर्ट ने प्रदेश के विभिन्न विद्यालयों में तैनात शिक्षा मित्रों को राहत दी है. मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ ने शिक्षको की स्थायी नियुक्ति होने तक शिक्षा मित्रों को अपने पदों पर बनाये रखने के निर्देश सरकार को दिए हैं. शिक्षक पात्रता परीक्षा पास न करने वाले शिक्षकों की सेवा 31 मार्च को समाप्त करने का आदेश केंद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय ने जारी किया था. यही मामला उत्तराखंड हाईकोर्ट भी पहुंचा और अमर सिंह सहित अन्य कुछ लोगों ने हाईकोर्ट में स्पेशल अपील दायर कर कहा था कि शिक्षा मित्रों का कार्यकाल 31 मार्च को समाप्त हो गया है. सरकार उन्हें अब सेवा विस्तार भी नहीं दे रही है. सुप्रीम कोर्ट इस मामले में प्रदेश सरकार को आदेश दे चुकी है कि नई नियुक्तियां न होने तक इनको कार्य करते रहने दिया जाए.