आयुष्मान कार्ड और आधार कार्ड में नाम अलग अलग होने पर क्या सरकारी लाभ मिलने में दिक्कत होगी
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के बारे में एक महिला क्या सोचती है... यह जानना बहुत दिलचस्प है.. चलिए तो हम महिलाओं से ही सुनते हैं इस खास दिन को लेकर उनके विचार!! आप अपने परिवार की महिलाओं को कैसे सम्मानित करना चाहेंगे? महिला दिवस के बारे में आपके परिवार में महिलाओं की क्या राय है? एक महिला होने के नाते आपके लिए कैसे यह दिन बाकी दिनों से अलग हो सकता है? अपने परिवार की महिलाओं को महिला दिवस पर आप कैसे बधाई देंगे... अपने बधाई संदेश फोन में नम्बर 3 दबाकर रिकॉर्ड करें.
हम अमिताभ कुमार दुल्लापुर से जानना चाहते हैं कि जो आरोग्य कार्ड बनाया जा रहा है वह सरकारी है , जिसका राशन कार्ड में नाम नहीं है ।
-बीते एक सप्ताह में विभिन्न कार्यस्थलों पर 22 ठेका मजदूरों की मौत -भुखमरी व बेरोजगारी वाले भारत में सांसदों की औसत संपत्ति 38.33 करोड़ और 7 फीसदी से ज्यादा हैं अरबपति
-पिछले हफ़्ते अलग-अलग राज्यों में कार्यस्थल पर घटनाओं में 22 ठेका मज़दूर मारे गए -भारत से गया खेतिहर मज़दूर बना इसराइल के जनसंहारक युद्ध का पहला शिकार
-पुरानी पेंशन बहाली के लिए केंद्र व राज्य सरकारी कर्मियों का 1 मई से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान -प्रशासन द्वारा 10 मार्च तक श्रमिक मामलों के समाधान का आश्वासन; प्रस्तावित धरना कार्यक्रम स्थगित
-SKM द्वारा व्यापक लामबंदी का आह्वान; 26 फरवरी ट्रैक्टर परेड, 14 मार्च किसान मज़दूर महापंचायत -हिंसक पशुओं से सुरक्षा हेतु जन-सम्मेलन: सांसद-विधायक कार्यालयों पर धरना-प्रदर्शन का निर्णय
-सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग करते हुए राज्य की 35000 आंगनबाड़ी कार्यकर्त्ता गई हड़ताल पर -ऑस्ट्रेलिया में नए श्रम कानून, मजदूरों की महत्त्वपूर्ण जीत
पिछले 10 सालों में गेहूं की एमएसपी में महज 800 रुपये की वृद्धि हुई है वहीं धान में 823 रुपये की वृद्धि हुई है। सरकार की तरफ से 24 फसलों को ही एमएसपी में शामिल किया गया है। जबकि इसका बड़ा हिस्सा धान और गेहूं के हिस्से में जाता है, यह हाल तब है जबकि महज कुछ प्रतिशत बड़े किसान ही अपनी फसल एमएसपी पर बेच पाते हैं। एक और आंकड़ा है जो इसकी वास्तविक स्थिति को बेहतर ढ़ंग से बंया करत है, 2013-14 में एक आम परिवार की मासिक 6426 रुपये थी, जबकि 2018-19 में यह बढ़कर 10218 रुपये हो गई। उसके बाद से सरकार ने आंकड़े जारी करना ही बंद कर दिए इससे पता लगाना मुश्किल है कि वास्तवितक स्थिति क्या है। दोस्तों आपको सरकार के दावें कितने सच लगते हैं। क्या आप भी मानते हैं कि देश में गरीबी कम हुई है? क्या आपको अपने आसपास गरीब लोग नहीं दिखते हैं, क्या आपके खुद के घर का खर्च बिना सोचे बिचारे पूरे हो जाते हैं? इन सब सरकारी बातों का सच क्या है बताइये ग्रामवाणी पर अपनी राय को रिकॉर्ड करके
-पंजाब सीमा पर किसानों के खिलाफ क्रूर पुलिसिया दमन बेहद निंदनीय -औद्योगिक हड़ताल व ग्रामीण बंद: देशभर से एक आवाज- मजदूर, किसान व जन विरोधी नीतियाँ रद्द करो
