दिल्ली गुरुग्राम से नन्द किशोर श्रमिक वाणी के माध्यम से दिहाड़ी काम करने वाले श्रमिक धर्मेंद्र से बात कर रहे हैं। वे बताते हैं कि उन्हें दिहाड़ी में महीने के पंद्रह दिन ही काम मिलते है ,जिस कारण उन्हें घर किराया छह हज़ार रुपये देने में दिक्क्त होती है। उन्हें दिहाड़ी मात्र छह सौ रूपए ही दी जाती है
