हरियाणा से हमारे संवाददाता ने साझा मंच मोबाइल वाणी के माध्यम से राज्य हरियाणा सीआईटीयू ट्रेड यूनियन की अध्यक्ष से हरियाणा श्रम मसौदा कानून 2021 पर चर्चा कर रहे हैं। जहाँ इन्होने बताया कि कई कानून को बदलकर सरकार ने चार श्रम कोड लेकर आये है। सरकार ने यह संविधान बनाया था कि किसी भी काम की प्रवृति में यदि काम पक्का है तो रोजगार भी पक्का होना चाहिए। लेकिन अब काम चाहे किसी भी प्रवृति का हो ,काम स्थायी है या अस्थायी है लेकिन रोजगार वहाँ अस्थायी रह सकता है। पक्की रोजगार की धारणा को सरकार ने खत्म कर दिया है। यह श्रम कानून को हायर एंड फायर की तौर पर देखा जा सकता है। इन श्रम क़ानून से श्रमिकों को नुकसान है। पहले कोरोना का बहाना से काम के घंटे बदले। अब ओवरटाइम की बात ही ख़त्म हो गई है। हड़ताल करने की नोटिस पीरियड की बात भी कही गई इससे मज़दूर के हड़ताल करने व यूनियन बनाने का अधिकार को छीनने की कोशिश की गई है। मजदूर के हर एक अधिकार छीन कर मालिकों को ज़्यादा से ज़्यादा मुनाफ़ा कमाने की छूट इन कानून में व्यक्त है। आने वाले समय में श्रमिक परेशान होंगे। पहले से श्रमिक जो ख़राब स्थिति में है ,अब कानूनी रूप में श्रमिक और बुरी स्थिति में पहुँच जाएँगे। क़ानून के तहत अब कभी भी कंपनी द्वारा बिना नोटिस दिए श्रमिकों को निकाला जा सकता है ,अब यूनिट में 300 से कम मज़दूर होने पर यूनियन बनाने का कोई अधिकार नहीं रहा। श्रमिकों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है ,इस कानून के विरोध में यूनियन द्वारा हड़ताल किया गया था ,यह अब संघर्ष जारी है
