झारखण्ड राज्य के रांची से श्रोता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि 'फूलों की कहानी' के सन्देश से गांव की समस्याओं को सामूहिक रूप से चर्चा कर के सरकार तक पहुंचाने की सीख मिली। कौन सा निर्णय सही है यह सामूहिक चर्चा के माध्यम से अच्छे से समझ आता है। साथ ही ग्राम सभा की बैठक नियमित करने की प्रेरणा मिली।सामूहिक खेती कर के हम अपनी आजीविका को बढ़ा सकते हैं।

झारखण्ड राज्य के रांची से श्रोता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि सन्देश सुनकर यह सीख मिली कि मौसम में होने वाले बदलाव का कारण इंसान हैं।हमें इसके लिए आवाज उठानी है और एकजुटता दिखानी है। ताकि हम आने वाली पीढ़ी को बचा सकें। किसी भी काम के लिए सामूहिक प्रयास करनी चाहिए। जलवायु परिवर्तन एवं योजनाओं के बारे में युवाओं को जागरूक करना होगा।साथ ही युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।

झारखण्ड राज्य के रांची से श्रोता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि कहानी सुनकर यही सीख मिली कि जलवायु परिवर्तन के दौर में कैसे अपने गांव,घर,जल,जंगल,जमीन और खेती को बचा कर रखना है।विकट परिस्थिति में सरकारी योजनाओं के माध्यम से गांव के लोगों को रोजगार दिया जा सकता है।अकेले किसी काम को करने की तुलना में संगठित होकर काम करने से सफलता मिलती है। साथ ही गांव और घर में सभी को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए

झारखण्ड राज्य के पाकुड़ जिला से सोहेल अख्तर ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि वर्तमान समय में जलवायु परिवर्तन का प्रभाव बहुत ज्यादा देखने को मिल रहा है।इस बदलते मौसम के जिम्मेदार हम लोग ही हैं।इसे रोकने या कम करने के लिए सामूहिक आवाज उठाना बहुत जरुरी है। जिसमें युवाओं एवं बच्चों की भागीदारी बहुत जरुरी है।आने वाली पीढ़ी को जलवायु परिवर्तन से बहुत परेशानी होगी।गांव-गांव जाकर इसके दुष्परिणामों के बारे में लोगों को जागरूक करना होगा।साथ ही ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं से जोड़ना और उनको रोजगार दिलवाना बहुत जरुरी है।

झारखण्ड राज्य के रांची जिला से शुभम कुमार मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि कभी सूखा तो कभी बाढ़ जलवायु परिवर्तन भारत में एक बड़ी त्रासदी है जिससे कृषि, अर्थव्यवस्था और जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होते हैं।सूखे से फसलें, पीने के पानी की कमी और भुखमरी पैदा होती है। दूसरी ओर, बाढ़ जान-माल का नुकसान, बुनियादी ढांचे का विनाश और बीमारियां लाती है।इन विपरीत स्थितियों से बड़े पैमाने पर पलायन और आर्थिक संकट होता है। सूखा के कारण होने वाली परेशानियां:कृषि और खाद्य संकट,जल संकट,आर्थिक नुकसान,स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं,पर्यावरण प्रभाव अदि। बाढ़ के कारण होने वाली परेशानियां:,जन-जीवन और संपत्ति,बुनियादी,ढांचे का विनाश,स्वास्थ्य समस्याएं,कृषि की बर्बादी,पलायन आदि।

इस आख़िरी कड़ी में पानी बचाने और ज़मीन को सँभालने के आसान तरीकों पर बात होती है। खेती और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की समझ इस एपिसोड का मुख्य संदेश है |

इस एपिसोड में बारिश न होने और फिर अचानक ज़्यादा होने से फसल को होने वाले नुकसान की बात है। मौसम की मार और उससे जूझते किसान की असली परेशानी यहाँ दिखाई देती है।

गांव आजीविका और हम कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ श्री जीब दास साहू जैविक खेती के लिए नीमास्त्र के प्रयोग और लाभ की जानकारी दे रहे हैं ।

इस कड़ी में बदलते मौसम की बात होती है और उसका खेती पर पड़ने वाला असर सामने आता है। किसान नई परिस्थितियों में अपनी फसल को कैसे सँभालने की कोशिश कर रहे हैं, यही इस कहानी की शुरुआत है।

गांव आजीविका और हम कार्यक्रम के तहत हमारे कृषि विशेषज्ञ श्री जीब दास साहू जैविक खेती के लिए नीमास्त्र निर्माण और उपयोग की जानकारी दे रहे हैं ।