झारखण्ड राज्य के दुमका जिला से राजेश कुमार हेम्ब्रम ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि जलवायु परिवर्तन एक बहुत बड़ी समस्या है। इसे कम करने के लिए व्यक्तिगत रूप से नही बल्कि सामूहिक रूप से जोर लगाना होगा। सब मिलकर प्रयास और पहल करेंगे तो जलवायु परिवर्तन की समस्या दूर हो सकता है

झारखण्ड राज्य के दुमका ज़िला के दुमका प्रखंड के ग्राम बड़ाढ़ाका से सुधीर सोरेन मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते है कि अभी के समय में जलवायु परिवर्तन तेज़ी से हो रहा है। इसे बचाने के लिए हमें एक जुटता होना चाहिए। जलवायु को बचाने के लिए ग्राम सभा ,महिला सभा और युवाओं के साथ सामूहिक वार्तालाप करना चाहिए। जिससे जलवायु को बचाया जा सके। साथ ही हमारे आने वाली पीढ़ी को शुद्ध पेयजल और शुद्ध हवा मिल सके

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झारखण्ड राज्य के खूँटी जिला के तोरपा प्रखंड के पटपुरा बाबर टोली से हमारे श्रोता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि जल ,जमीन और पर्यावरण में बदलाव और तापमान में वृद्धि एक बड़ी समस्या है। गांव के विकास और स्वास्थय के लिए यह समस्या गंभीर है। प्राकृतिक संसाधनों,मिटटी ,पानी और हवा में प्रदुषण और असंतुलन बढ़ा है। इन समस्याओं के विकास और गांव के विकास के लिए बड़े और बुजर्गों के अनुभव और आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों का तालमेल जरूरी है। जल और जमीन का उपचार -लोगों को पुराने तालाबों की सफाई, वर्षा जल संचायन और मिटटी की जांच करा कर जैविक खेती अपनाना चाहिए। स्वच्छता और गंध का समाधान -गांव में ठोस और तरल उपशिष्ट प्रबंधन लागू करना चाहिए,खुले में कचड़ा नहीं फेंकना चाहिए और खाद के गड्ढे बनाने चाहिए। तापमान में कमी -हर साल गांव में बड़े पैमाने पर स्थानीय पौधे लगाने चाहिए। जैसे -नीम ,पीपल ,बरगद आदि लगाने चाहिए ताकि यह छाया और ऑक्सीजन प्रदान करे।बुजुर्गों से सलाह लेनी चाहिए। परंपरागत जल संरक्षण तकनीकों और स्थानीय जड़ी -बूटियों के ज्ञान का उपयोग करना चाहिए। गांव के विकास के लिए सरकारी योजनाओं जैसे -मनरेगा के तहत वृक्ष रोपण ,जल शक्ति अभियान का लाभ उठाना चाहिए। गांव के विकास के लिए फण्ड और योजनाएं पंचायत के पास आती है और लोग पोर्टल पर भी जा कर देख सकते हैं कि गांव के विकास के लिए कितना बजट आया है और कहाँ खर्च हो रहा है। तापमान कम करने के लिए सबसे सस्ता और टिकाउ साधान वृक्षा रोपण है।

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झारखण्ड राज्य से हमारे श्रोता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि उनको एपिसोड -1 के माध्यम से लाह की खेती करने की जानकारी मिली।इस कार्यक्रम में विभिन्न तरीकों से लाह की खेती करने के बारे में बताया गया है।वह लाह की खेती पलास के पेड़ पर ही किया करती थीं,लेकिन उनको इस कार्यक्रम के माध्यम से यह पता चला कि सेमियालता पर लाह की खेती किया जा सकता है और इसमें उत्पादन बहुत अच्छी होती है।सेमियालता का उत्पादन करने से उर्वरक शक्ति भी बढ़ती है। एपिसोड 2 और 3 में मौसम के बारे में बताया गया है।वर्षा के कम या अधिक होने के कारण उत्पादन सही तरीके से नहीं हो पाता है।किसान और माता -पिता मौसम पर ही निर्भर रहते हैं। मौसम में परिवर्तन हो रहा है क्योंकि पर्यावरण पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।लोग पेड़ों को काट भी रहे हैं और नया पौधा भी नहीं लगा रहे हैं।पेड़ों को काटने के कारण मौसम में परिवर्तन हो रहे हैं और लोग फसल का उत्पादन सही समय पर नहीं कर पा रहे हैं। उनको इस कार्यक्रम के माध्यम से पानी को बचाने के बारे में भी जानकारी मिली है।लोग इस कार्यक्रम में बताये गए बातों को उपयोग में लाएंगे तो उनको जरूर लाभ मिलेगा