झारखण्ड राज्य के रांची ज़िला से अखिलेश कुमार झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से सभी श्रोताओं एवं दिव्यांग भाई-बहनों को संदेश दे रहे हैं कि उन्हें कभी भी अपना मनोबल नहीं गिरने देना चाहिए, चाहे कोई भी बाधा या परेशानी जीवन के सामने क्यों न आए ।वे खुद एक दृष्टिबाधित हो कर भी बाकि दिव्यांग भाइयों तक यह संदेश पहुँचा रहे हैं कि दिव्यांग शारीरिक तौर से कमजोर हो सकते हैं पर मानसिक तौर पे नहीं।उन्हें कभी भी खुद को निशक्त नहीं समझना चाहिए ना ही अपनी विकलांगता को अपनी कमज़ोरी समझना चाहिए। वे मानते हैं कि दिव्यांग व्यक्तियाँ भी वो सारे काम कर सकते हैं जो बाकि सामान्य लोग करते हैं।उन्हें बस संघर्ष कुछ ज़्यादा करना होता हैं।सफलता की मंज़िल तक वहीं पहुँच सकते हैं जो हर एक बाधा आने पर भी कड़ी संघर्ष ज़ारी रखते हैं।अखिलेश जी अपनी उदाहरण देते हुए बता रहे हैं कि उन्होंने भी अपने जीवन में कई संघर्ष किए हैं। कई मुश्किलों का सामना उन्हें भी करना पड़ा हैं।परन्तु उन्होंने अपनी कमज़ोरी को कभी रुकावट बनने नहीं दिया,सारी समस्याओं का सामना डट कर किया और कड़ी महनत करते हुए आज अखिलेश जी हमारी वाणी में कार्यरत हैं।
झारखण्ड राज्य के धनबाद ज़िला के बाघमारा प्रखंड से राधू राय झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि कई आमलोग सरकारी योजनाओं से आज भी वंचित हैं। तमाम योजनाओं के लागू होने के बावज़ूद लोग पूर्ण रूप से इसका लाभ नहीं ले पा रहे हैं। इसका मुख्य कारण हैं जानकारी का आभाव।सरकार द्वारा लोगों के बेहतर भविष्य एवं आर्थिक एवं सामाजिक विकास हेतु कई योजनाएँ लागु कर रखी हैं परन्तु लोगों को इसकी सही जानकारी नहीं हैं जिस कारण वे योजनाओं का पूर्ण रूप से लाभ नहीं उठा पाते हैं।सरकार योजनाएँ तो लागु करने में सफल हो गई हैं परन्तु इसकी सही जानकारी लोगों तक सक्षम रूप में पहुँचाने में असफल रही।जिसके कारण दिव्यांगों को कई महीनो तक पेंशन नहीं मिलता है।सरकार द्वारा कई योजनाएँ तो लागु हुई पर उसे धरातल तक पहुँचने में नाक़ामयाब रही।पंचायत में सारी योजनाओं की जानकारी पूरी नहीं हैं इस कारण लाभुक को दफ्तरों की चक्कर लगाते हुए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे हैं और ठगे भी जा रहे हैं।पंचायत स्तर पर हर योजनाओं की जानकारी एक बैठक बुला कर देना चाहिए और दिव्यांग लोगों को भी पूर्वं अधिकार देना चाहिए। क्योंकि सरकार द्वारा निकाली गई कई योजनाएं केवल फाइलों का शोभा बना रही हैं। योजनाएं केवल कागजों में डाब कर रह गई है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की ही बात करें तो उसका भी लाभ कृषि प्रधान देश होने के बावजूद किसान उठा नहीं पाते हैं।किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हेतु इसे लागु किया गया परन्तु पूर्ण जानकारी के आभाव में किसान इसका लाभ नहीं उठा पा रहे और वर्षा के अभाव में अच्छी खेती ना होने के कारण एवं अपनी आर्थिक स्थिति से तंग आ कर पलायन करने को विवश हो जा रहे हैं।कुछ किसानें तो आत्मदेह का प्रयास भी कर रहे।पंचायत स्तर पर सारी योजनाओं की पूरी जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध कराने की आवश्यकता हैं ताकि बैठक कर लोगों तक सारी जानकारी पहुँचाई जा सके ताकि लाभक पूरी लाभ ले सके।सरकार ने दिव्यांगों के लिए भी कई लाभकारी योजनाएँ लागू कर रखी हैं परन्तु जानकारी के अभाव में लाभ नहीं उठा पा रहे। सरकार को इस पर ध्यान देनी चाहिएँ साथ ही जो ज़रूरत की वस्तुएँ उन्हें नहीं मिल पा रही उसे भी उपलब्ध करवानी चाहिए एवं उनके कौशल विकास के लिए विशेष क़दम उठानी चाहिए और समय समय पर प्रोत्साहन देना चाहिए।सरकार द्वारा दिव्यांगों के लिए साईकिल,छड़ी इत्यादि निकाली जाती है लेकिन इसका लाभ दिव्यांग उठाने से वंचित रह जाते हैं। अतःसरकारी नौकरी ना ही सही पर सारी योजनाओं की सही जानकारी उक्त रूप से उपलब्ध करवानी चाहिए ताकि कोई लाभुक इन योजनाओं से वंचित ना रह सके।
झारखण्ड राज्य के बोकारो जिला से सुमंत कुमार ने झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे है कि,सरकार के लाख प्रयास के बाद भी जरूरतमंद गरीब दिव्यांगजनों तक आज भी सरकारी योजनाओं का लाभ नही मिल पा रहा है। इसका मुख्या कारण यह है कि दिव्यांगों को मिलने वाले सरकारी लाभ विचौलियों द्वारा कागजी प्रतिक्रिया दिखा कर उनके लाभ का गमन कर लिया जाता है।दिव्यांगों में सूचनाओं का अभाव स्पष्ट रूप से दिखाई पड़ता है,क्योंकि इन्हे आने जाने में विभिन्न परेशानियों से गुजरना पड़ता है। पहले दिव्यांगजनों को सरकार के द्वारा ट्रेक साइकिल दिया जाता था।लेकिन इस भी विज्ञात कई वर्षो से बंद कर दिया गया। ऐसे में दिव्यांगों को आवागमन करने में विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ता है साथ ही दिव्यांगों को सरकार के द्वारा आरक्षण मिला है ,परन्तु जानकरी के अभाव में उन सुविधाओं का लाभ वे नहीं ले पाते हैं । दिव्यांगों के हौसले बढ़ने के लिए सरकार को विशेष प्रशिक्षण उपलब्ध करना चाहिए और इन्हे स्वरोजगार के साथ-साथ धन राशि भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। जिससे इन्हे किसी भी प्रकार के व्यवसाय करने में कठिनाइओं का सामना न करना पड़े और दिव्यांगजनों के लिए इनके शिक्षा की व्यवस्था उनके निकटतम स्थान में करना चाहिए क्योकिं वे अपनी निशक्त के कारण दूर के शिक्षण संस्थान में नहीं पहुँच पाते है, जिससे इनकी शिक्षा अधूरी रहा जाती है।
झारखंड राज्य के हजारीबाग जिला के बिष्णुगढ प्रखंड से राजेश्वर महतो मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते हैं, कि आज भी कई दिव्यांग व्यक्ति अपना योगदान देकर देश की प्रगति में अपनी भागीदारी निभा रहे हैं।पर शारीरिक विकास में थोड़ी अपूर्णता रहने के कारण समाज के लोग उन्हें थोड़ी हीन दृष्टि से देखते हैं। लेकिन आज वर्तमान स्थिति देखा जाए तो अनपढ़े दिव्यांग लोगों को प्रमाण पत्र बनाने में कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। सरकार के नियमानुसार 40% से कम रहने वाले दिव्यांग सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले पाते हैं। बिष्णुगढ के तीन दिव्यांग व्यक्तियों से वार्तालाप करने पर उनमे से एक महादेव तुरी ने बताया कि वे शारीरिक श्रम नहीं कर पाते हैं वहीँ चंद्रशेखर महतो कंप्यूटर ऑपरेटर है और हेमलाल साहू स्कूल में पारा शिक्षक हैं। उन सभी को दिव्यांग पेंशन का लाभ आसानी से मिलता है। साथ ही सरकार द्वारा चलाए जा रहे कल्याणकारी योजनाओं का लाभ भी आसानी से मिल रहा है।जिन दिव्यांग लोगों को योजना की जानकारी होती है वे उसका भरपूर लाभ उठा रहे हैं और जिनके पास जानकारी नहीं है उन तक गांव की सेविकाओं के द्वारा सर्वे कर कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने में मदद किया जा रहा है। सरकार द्वारा मनरेगा योजनाओं में दिव्यांगों को भी काम दिए जाने तथा हल्की कामो में योगदान देने का प्रावधान रखा गया है।वर्तमान स्थिति में सभी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाता है। बैंक,रेलवे स्टेशन एवम सरकारी दफ्तरों में दिव्यांगों को भी तरजि दिया जाता है।पर भी दिव्यांगों में असहजता महसूस जरूर करते हैं
झारखंड राज्य के बोकारो जिला से कविता जो एक दिव्यांग है और नवीं तक शिक्षा प्राप्त की हैं। वे मोबाइल वाणी के माध्यम से बताती हैं, कि सरकार द्वारा दिए जाने वाले योजनाओं का लाभ इन्हे आसानी से प्राप्त नहीं होता है
झारखण्ड राज्य के रांची से दृष्टि वाधित महिला नाज़िया मोबाइल वाणी और पंचायत नामा के साथ अपनी आपबीती साझा करते हुवे कहती हैं, कि ये एक साधारण स्कूल से अपनी दशवीं की पढाई पूरा कि। जब ग्रेजुवेशन कर रहीं थी तभी इनकी आँखों में कुछ दिक्कत होने लगी और धीरे-धीरे इनकी आँखों क रौशनी ख़त्म हो गई। नाज़िया ने कभी भी अपनी कमी को कमी नहीं समझा। कुछ दिनों के बाद इन्होने कंप्यूटर सीखा और एक शिक्षिका के रूप में लगभग दस वर्षों तक बच्चों को कंप्यूटर भी सिखाया। साथ ही नाज़िया ने कंप्यूटर संस्था के लिए खुद का रजिस्टेशन भी करवाया। नाज़िया ने कई कंपनियों और संस्थाओं में नौकरी के लिए इंटरव्यू भी दिया पर कही भी इन्हे नौकरी नहीं मिला। इनकी विकलांगता के कारण सबने कहा की आप विकलांग हो आपको दिखाई नहीं देता तो आप कैसे काम करोगे। तभी अचानक कहीं से नाज़िया को मालूम हुआ की झारखंड के रांची स्थित एक कम्पनी में दो आवेदन निकला है दृष्टिबाधितों के लिए। नाज़िया ने ऑफिस में फ़ोन कर अपना रजिस्ट्रेशन करवाया। कुछ दिनों के बाद ऑफिस से फोन आया और नाज़िया को अपना बायोडाटा जमा करने को कहा गया। नाज़िया ने अपना बायोडाटा जमा किया और इंटरव्यू भी दिया। और उन्हें हमारी वाणी में एक मॉडरेटर के रूप में नौकरी मिल गई। काम करने में नाज़िया को कोई दिक्क्त नहीं होती है क्योंकि जिन लोगों को कंप्यूटर में दिखाई देता है वे देख कर काम करते हैं और जिन्हे दिखाई नहीं देता वो टेक्नॉलजी सुविधा के साथ सुनकर काम करते हैं। काम पर आने जाने में नाज़िया को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। जैसे-यदि घर में कोई ऑफिस पहुंचाने वाला ना हो तो ऑफिस समय पर नहीं जा पातीं हैं। इसी प्रकार ऑफिस से घर परिवार के सदस्य ही लेकर आते हैं।नाज़िया अन्य लोगों को यह सन्देश देती हैं कि कोई भी अपनी विकलांगता को अपनी कमजोरी ना समझे बल्कि उसे अपनी ताकत बनाएं। यदि कोई दिव्यांग नहीं देख सकते तो क्या हुआ वे हर वो काम को कर सकते हैं जिसे सम्पूर्ण व्यक्ति करते हैं।
झारखण्ड राज्य के बोकारो जिला के पेटरवार प्रखंड के तेनुघाट से सुषमा कुमारी मोबाइल वाणी के माध्यम से बताती हैं, कि सरकार द्वारा दिव्यांग लोगों तक लाभ पहुंचाने के लिए दिव्यांग अधिकार अधिनियम 2016 में लागु किया गया है। इसके तहत सभी दिव्यांगों को नौकरी देने में 4 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है। दिव्यांग लोगों को दिव्यांग पेंशन,आवास,निःशुल्क शिक्षा, सुगम्य भारत अधिनियम के तहत सभी सार्वजनिक स्थलों में पहुंचने के लिए ट्रेनों,मेट्रों में आरक्षण देने का आदेश दिया गया।
झारखण्ड राज्य के धनबाद ज़िला से तफ़ाज़िल आज़ाद झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि अगर हौसला बुलंद हो तो कोई भी ताकत आगे बढ़ने से खुद को रोक नहीं सकती।यहाँ बात हो रही हैं उन तमाम दिव्यांग व्यक्तियों की जो अपनी अपनी कमज़ोरी से जीत कर आगे बढ़ते हुए इसी विकलांगता को अपनी ताक़त बना लेते हैं।ऐसे लोग किसी भी बाधा को अपनी क़ामयाबी का रोड़ा नहीं बनने देते । इसी सन्दर्भ में इन्होने तोपचांची प्रखंड अंतर्गत कुंदरसा पंचायत के आज़ाद नगर टोला निवासी अलीजान अंसारी की कहानी सुनाई । दुर्भाग्यवश अंसारी जी जब पच्चीस साल के थे तो ,वो लकवा की चपेट में आने से कमर के निचले हिस्से से अपाहिज हो गए। पर ये अपंगता उनकी जिम्मेदारियों के आगे नहीं आ पाई।बचपन में ही पिता को खोने के बाद परिवार की ज़िम्मेदारी उन पर थी।मुंबई में कार्यरत परिवार का एकलौता कमाऊ बेटा अंसारी जी जब अपंगता का शिकार हुए तब निराशा आई पर इस निराशा को उन्होंने अपनी कमज़ोरी नहीं बनाया, हिम्मत लाई और घर लौट कर आए फिर सिलाई का काम सिख कर अभी अपने परिवार का लालन-पोषण कर रहे हैं। सरकार द्वारा विकलांगों की सहयोग हेतु कई योजनाएँ लागु किए गए हैं परन्तु बिचौलियों का प्रभाव इस पर भी हावी हैं। अंसारी जी द्वारा भी सरकारी लाभ लेने के लिए प्रखंड कार्यालय में कई कागज़ात जमा करवाए गए परन्तु बिचौलिए अड़ंगा बन बैठे और उन्हें निराशा हाथ लगी।
झारखण्ड राज्य के गिरिडीह ज़िला के जमुआ प्रखंड से महेन्दर मंडल झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं, कि दिव्यांगों की परेशानियों का मुद्दा पंचायत स्तर पर नहीं रखी जाती हैं।दृष्टिबाधित होते हुए खुद को और अन्य दिव्यांगों को इस कारण किस किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता हैं।सरकार द्वारा कई योजनाएँ दिव्यांगों को सहयोग करने हेतु लागु हुए हैं परन्तु पंचायत स्तर पर उन योजनाओं का लाभ दिव्यांगों तक नहीं पहुंचाया जाता जिसके कारण वे सरकार की किसी भी योजना का लाभ लेने से वंचित रह जाते हैं।जिसके कारण विकलांगो को शारीरिक एवं मानसिक दोनों ही तौर से परेशानियाँ का सामना करना पड़ता हैं।सरकार द्वारा लागु योजनाएँ सारे कार्यालय तक पहुँच तो जाती हैं परन्तु उन लाभों को प्राप्त करने हेतु बड़ी मसक्कत करनी पड़ती हैं। एक तो सरकारी अधिकारी दिव्यांगों का मान नहीं रखते दूसरी ओर योजनाओं की जानकारी लेने के लिए एवं योजनाओं से जुड़ने के लिए सरकारी दफ्तरों के कई बार चक्कर लगाने पड़ जाते हैं फिर भी काम नहीं बन पाता। सरकार को इस पर ध्यान देते हुए कुछ उपाय निकालना चाहिए। क्योंकि जब भी कोई दिव्यांग अधिकारी की पास अपनी समस्या को रखते हैं तो उन्हें कोई मान्य नहीं दिया जाता है। अतः हो सके तो सरकार को इन सारी योजनाओं को लाभकों के घर-घर तक पहुँचाने की सुविधा उपलब्ध कराने की पहल करनी चाहिए।
राज्य झारखण्ड,जिला हजारीबाग से टेक नारायण प्रसाद कुशवाहा झारखण्ड मोबाईल वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि जैसा आज देखा जा रहा है की अपने दिव्यनगता को शक्ति का प्रदर्शन करते हैं।परन्तु यह भी दिखता है की दिव्यांग की लोग कैसे मदद करते हैं। दिव्यांग लोगो को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। अकेला उनके लिए आना और जाना संभव नहीं है। तथा उन्हें की तरह की प्रकिर्या करना पड़ता है। जिससे उन लोगो को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
