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झारखण्ड राज्य के धनबाद ज़िला से बीरबल महतो झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से कहते हैं कि आज के युग में गरीबों के लिए अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा प्रदान करवाना बहुत ही मुश्किल हो गया है। सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी होने के कारण ग़रीब बच्चे पूर्ण रूप से शिक्षा ग्रहण करने से वंचित रह जा रहे हैं। सरकारी स्कूलों में कहीं पँखे का अभाव है, तो कहीं बच्चों के बैठने के लिए बेंचों की सुविधा नहीं है ।इसी व्यवस्था के अभाव में बच्चे अच्छे से पढ़ाई नहीं कर पाते हैं। ऐसे कई विद्यालय हैं जहाँ शिक्षकों की कमी है। जिस कारण विद्यार्थी अच्छी शिक्षा ग्रहण नहीं कर पाते हैं। इसीलिए प्रशासन द्वारा सरकारी विद्यालयों में बेंच,पाठ्यक्रम के पुस्तकें,पँखे इत्यादि की सुविधा को व्यवस्थित कर विद्यार्थियों को सहूलियत प्रदान करना चाहिए। निजी स्कूल में फीस अधिक रहती है।ग़रीबी के कारण कई बच्चे निजी स्कूलों में पढ़ाई करने में असमर्थ होते हैं इसलिए प्रशासन सरकारी स्कूलों पर भी ध्यान दे और शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाकर ग़रीब बच्चों को भी अच्छी शिक्षा प्रदान करें।

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झारखण्ड राज्य के धनबाद ज़िला से बीरबल महतो झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते हैं कि सरकार द्वारा गरीबों के इलाज हेतु कई स्वास्थ्य केंद्र खोले गए हैं ,परन्तु उन स्वास्थ्य केन्द्रो में दवाइयों का अभाव बहुत है। इन्हीं अभाव के चलते ग़रीब इलाज के दौरान बहुत परेशान रहते हैं। बीरबल महतो सरकारी स्वास्थ्य केंद्र पर अपने अनुभव के बारे में बताते हुए कहते हैं कि क़रीब आठ माह पूर्व वे खुद धनबाद के एक सरकारी अस्पताल में भर्ती थे। उस दौरान प्रतिदिन चिकित्सक उन्हें दवाइयों के पर्ची थमा देते थे यह कह कर कि अस्पताल में दवाई उपलब्ध नहीं हैं। लेकिन बाहर की दवाइयाँ महँगी होने के कारण उन्हें दवाई खरीदने में बहुत दिक्क़तें आती थी। वे कहते है कि लोग अपनी ग़रीबी के कारण इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों का रुख लेते हैं पर उन्हें सुविधाओं के अभाव में काफ़ी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इतना ही नहीं अस्पताल की बदहाल स्थिति और गंदगी के कारण मरीज़ के साथ साथ मरीज़ के परिजन भी परेशान रहते हैं।प्रशासन को इस समस्या पर विशेष ध्यान देना चाहिए और मरीज़ों तक हर संभव सुविधा पहुँचाना चाहिए।

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झारखण्ड राज्य के धनबाद ज़िला से बीरबल महतो झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम बताते हैं कि गर्मी आते ही जल व बिजली की समस्या पैदा हो जाती है। गर्मी के मौसम में ऐसी ही तमाम समस्याओं का सामना लोगों को करना पड़ता हैं। ग्रामीण घर से बाहर निकलने के लिए भी कतराते हैं। अक्सर देखा जाता हैं कि लोग पानी के लिए आपस में लड़ते झगड़ते हैं। परन्तु स्थानीय जनप्रतिनिधि इस समस्या पर बिलकुल ध्यान नहीं देते हैं। उनके क्षेत्र में तालाबों व कुओं में पानी नहीं रहता है। कोलियरी क्षेत्र होने के कारण धरातल पर पानी का श्रोत काफ़ी कम है। अगर कोलियरी का पानी तालाबों में दिया जाए तो थोड़ी बहुत पानी का अभाव से राहत प्राप्त होगी।साथ ही इस क्षेत्र में जो लगातार बिजली की समस्या उत्पन्न हो रही है उसका हर्ज़ाना विद्यार्थी भुगत रहे हैं। बिजली के अभाव में पढ़ाई करने में बहुत मुश्किलें होती हैं। कोलियरी क्षेत्र से पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित जितने भी गांव हैं ,वहाँ बिजली,पानी की सुविधा प्रदान की जानी चाहिए।

झारखण्ड राज्य के धनबाद ज़िला से खीरु महतो झारखण्ड मोबाइल वाणी के माध्यम से एक गीत प्रस्तुत किए हैं। जिसके बोल हैं : जीते लकड़ी,मरते भी लकड़ी ,देख तमाशा लकड़ी का....