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शिक्षा किसी भी इंसान के व्यक्तित्व का पहचान कराती है, लोगों में संस्कार पैदा करती है अर्थात यूँ कहे कि शिक्षा के बिना हम मानव का जीवन ही अंधकार में डूबा सा प्रतीत होता है। जिस तरह एक घर के लिए नींव का मजबूत होना जरुरी होता है ठीक उसी तरह हमारे लिए प्राथमिक शिक्षा का मजबूत होना भी बेहद जरुरी है।इन्हीं बातों को ध्यान में रखते हुए संविधान के 86वें संशोधन द्वारा शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 को देश भर में लागु किया गया।दोस्तों ,हम आपसे जानना चाहते हैं कि आपके पंचायत में प्राथमिक शिक्षा की क्या स्थिति है ? क्या आपके पंचायत में बच्चों को शिक्षा के अधिकार कानून के तहत प्राथमिक शिक्षा का लाभ मिल रहा है ? और अगर नहीं मिल रहा है , तो आखिर प्राथमिक शिक्षा के इस हालात के लिए कौन ज़िम्मेवार है ? पंचायतों में प्राथमिक शिक्षा की स्थिति में सुधार लाने के लिए सरकार क्या कोई प्रयास कर रही है ? साथ ही प्राथमिक शिक्षा, उच्च प्राथमिक शिक्षा,अनौपचारिक शिक्षा तथा साक्षरता आदि सम्बंधी कार्यों को देखना पंचायत प्रतिनिधियों की ज़िम्मेदारी है ,तो क्या पंचायत प्रतिनिधि अपने इस कार्य को ईमानदारीपूर्वक निभा रहे हैं ? आपके अनुसार पंचायतों में प्राथमिक शिक्षा की स्तर में सुधार लाने हेतु सरकार को किस तरह के कदम उठाने की जरुरत है ?
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विकास के नाम पर मनुष्यों ने अपने सुख -सुविधाओं के लिए विभिन्न प्रकार के साधनों का आविष्कार किया है। बिना इसका परवाह किये कि मानव जीवन पर उसका क्या दुष्परिणाम हो सकता है।इन्ही ऐशोआराम का एक नमूना है बढ़ती गाड़ियों की संख्या। जितने तेजी से आज सड़क पर गाडिओं की संख्या बढ़ी है,उतनी ही तेजी से सड़क दुर्घटनाएँ और सड़क हादसों में होने वाली मौतों की संख्यां में भी इज़ाफ़ा हुआ है।आखिर इस तरह के निरंतर हो रहे सड़क -हादसों के पीछे मुख्य वजह क्या हो सकती है..? क्या वजह है की यातायात के कठोर नियम होने के बाद भी सड़क हादसे कम नहीं हो रही है..? लगातार हो रहे सड़क हादसों में कमी आये इसके लिए प्रशासन क्या कोई ठोस कदम उठा रही है...? क्या वाहन चालकों द्वारा यातायात नियमों का पालन ईमानदारी पूर्वक किया जाता है...? लगातार बढ़ रही सड़क हादसों को कम करने के लिए सरकार को क्या-क्या कदम उठाने की जरुरत है...? और यातायात नियमों का पालन ना करने वाले चालकों पर क्या करवाई होनी चाहिए...? साथ ही इस तरह की घटनाएँ ना घटे इसके प्रति आम जन कितने गंभीर हैं और अपने स्तर पर क्या करते हैं..?
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पूर्वी सिंघभूम पोटका प्रखंड से चक्रधर भगत जी ने मोबाईल वाणी के माध्यम से बताया कि पोटका प्रखंड के अंतर्गत गाँव कोहदा है ,जहाँ बिजली कटे लगभग एक सप्ताह से अधिक हो गया है।बच्चों की गर्मी की छुट्टियाँ चल रही है,साथ ही गाँव में बच्चा चोरी का अफवाह भी फैला हुआ है। इस माहौल में गाँव अँधेरे में डूबा हुआ है।बिजली के अभाव में ऐसा लग रहा है जैसे " ढीबरी -युग" में रह रहे हैं।इस गर्मी में लोगों को पानी भी नही मिला है।सरकार जनता को आधारभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराने में बिलकुल लाचार और असमर्थ दिख रही है।
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