झारखण्ड राज्य के खूँटी ज़िला के तोरपा प्रखंड से सुमित टोपनो मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि उन्हें कार्यक्रम से जानकारी और जागरूकता मिली कि पानी को बचा कर सुखाड़ से बचा जा सकता है। कार्यक्रम में जैसा बताया गया अगर उस तरीका को अपना कर खेती में लाभ होगा तो लोग ज़रूर इसे अपनाना चाहेंगे। इनके गाँव में एक नदी है जहाँ मिट्टी बहाव देखने को मिलता है क्योंकि वो नदी अपने पहले दिशा को छोड़ अब दूसरे दिशा की ओर बह रही है। उससे कही ज़्यादा मिटटी का कटाव हो रहा है। कई लोगों के खेत बर्बाद हो गए है। अधिक बारिश ,मिट्टी कटाव की समस्या का समाधान नहीं होने के कारण ये सब दिक्कतें देखने को मिल रही है। गाँव में गड्ढ़े तो नहीं कोड़े गए है लेकिन चेक डैम का निर्माण हुआ है। गर्मी के मौसम में पानी सूख जाता है। सूखा से बचने के लिए जो कार्यक्रम में बताया गया है वो बहुत अच्छा है जिससे लोगों के लिए यह उपाय लाभदायक हो सकती है। अगर गाँव में अनुमति मिलेगी तो वो बताए गए उपाय को गाँव में लाना चाहेंगे ताकि लोगों की समस्या का समाधान हो और उन्हें सुविधा मिल सके। सुमित कहते है कि वो अन्य लोगों के साथ भी सुखाड़ से बचने के उपाय साझा करेंगे। साथ ही कार्यक्रम के सारे किरदार ,समय ,आवाज़ अच्छे है। लेकिन अगर ऑडियो के बजाए वीडियो के माध्यम से कार्यक्रम में जानकारी दी जाए तो लोग अच्छे से और सरल तरीके से बातों को सीख पाएंगे।

झारखण्ड राज्य के खूंटी जिला के तोरपा प्रखंड के कोंडा गांव से सुमित टोपनो मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि कार्यक्रम "हाट बात " में लोगों से सम्बंधित बातें की गईं हैं। मौसम में अधिक परिवर्तन हो रहे हैं। कभी अधिक गर्मी और कभी अधिक बारिश हो जाता है जिसके कारण फसल बर्बाद हो रहे हैं। लेकिन लोगों को ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है क्योंकि कई लोग बाहर जा कर काम करते हैं और सरकार के द्वारा भी उनको राशन दे दिया जाता है।इनको इस कार्यक्रम के माध्यम से यह सिखने के लिए मिला कि प्रखंड स्तर पर कॉन्फ्रेंस ऑफ़ पंचायत भी होती है। इनको लगता है कि इनके गांव में डेवलपमेंट के लिए कोई प्लान नहीं है और न ही कोई विकास हुआ है।गांव के लोगों को पता ही नहीं है कि अपनी समस्याओं को पंचायत में कैसे रखना है। इनको कार्यक्रम के माध्यम से पंचायत में समस्याओं को रखने की प्ररेणा मिली है और वह अब अपनी बातों को पंचायत में रखेंगे

झारखण्ड राज्य के खूँटी जिला के तोरपा प्रखंड से सुमित टोपनो ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि मोबाइल वाणी पर प्रसारित 'मौसम का बदलता मिज़ाज' कार्यक्रम का पहला एपिसोड एक बार में समझ नही आता है। मगर दोबारा सुनने पर अच्छी तरह समझ आता है।इस एपिसोड से इनको बहुत कुछ सीखने और जानने को मिला। एपिसोड में सेमियालता और लाह की खेती के बारे में विस्तृत जानकारियां दी गई है।सेमियालता का पौधा सात फीट ऊँचा होता है और इसे बढ़ने में एक से दो साल लगता है।समय के साथ जैसे-जैसे लाह का दाम बढ़ रहा है,इसकी खेती करना फायदे का सौदा हो सकता है।जब हम खुद लाह की खेती करेंगे तभी हम अपने दोस्तों और जानने वालों को इसके लाभ और खेती के बारे में बता पाएंगे।

झारखण्ड राज्य के रांची से शेखर मंडल ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि कभी सूखा तो कभी बाढ़भारतीय किसानों के लिए एक बड़ी प्रासदी है। जिससे फसलों के बर्बाद होने पर वे भारी कर्ज और मानसिक तनाव में आ जाते है बेमौसम बारिश बाढ़ और सूखे के कारण कृषि उपज घट रही है और खेती जोखिम भरी होती जा रही है। इससे ना केवल आर्थिक नुकसान होता है बल्कि किसानों के अस्तित्व पर भी संकट आ जाता है। इन समस्याओं से निपटने के लिए लोगों को सामूहिक रूप से ग्राम सभा में जाना चाहिए और अपनी समस्याओं को हल करने का आग्रह करना चाहिए।

झारखण्ड राज्य के सिमडेगा ज़िला से सुप्रिया मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि जलवायु परिवर्तन के दौर में किसानों के लिए सही फसल का चुनाव बहुत जरूरी हो गया है। मौसम का पैटर्न अनिश्चित है जैसे कभी सूखा, कभी बाढ़। ऐसे में किसानों को ऐसी फसलें अपनानी चाहिए जो कम पानी, गर्मी या नमी जैसी परिस्थितियों में भी अच्छी उपज दें सके । उन्हें सूखा और ताप-सहिष्णु फसलें जैसे ज्वार, बाजरा या चना अपनानी चाहिए। वर्षा जल संचयन से पानी को संरक्षित रखा जा सकता है ताकि जरूरत पड़ने पर सिंचाई की जा सके।मिश्रित खेती अपनाने से एक फसल खराब होने पर दूसरी फसल से नुकसान की भरपाई संभव होती है।किसानों को फसल बीमा योजनाओं से भी जुड़े रहना चाहिए ताकि प्राकृतिक आपदा की स्थिति में आर्थिक सुरक्षा मिल सके।

झारखण्ड राज्य के सिमडेगा ज़िला से सुप्रिया मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि सेमियालता की खेती करने से किसानों को लाभ हो सकता है। क्योंकि यह कम उपजाऊ भूमि में आसानी से उग जाता है। सेमियालता 7 फ़ीट से 8 फ़ीट तक ही बढ़ता है तो इसकी कटाई में ज़्यादा समस्या नहीं होगी। इसकी खास बात है कि जब सेमियालता के तनो को काटा जाता है तो यह दोबारा उगता है जिससे बार बार बुवाई की कोई ज़रुरत नहीं होती है।सेमियालता मिटटी की उर्वरता को भी बढ़ाता है। किसानों के लिए यह एक अच्छा आय का श्रोत होगा ।

झारखंड राज्य के लातेहार जिला के चंदवा प्रखंड के लोहसीना गाँव से सविता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि इनके गांव में लाह और पलास की खेती की जाती है ।यहां के किसान बेड़ और पलास के पेड़ पर लाह की खेती करती हैं ।इस गांव के लोग लाह की खेती कर के अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं ।कई लोगों के पास अपना लाह और पलास का पेड़ नहीं हैं जिसके कारण वे लोग दूसरे के लाह के पेड़ पर साझेदारी में माध्यम से खेती करते हैं और लाभ कमाते हैं । लाह की खेती लोग अधिक मात्रा में कर रहे हैं और लाभ कमा रहे हैं ।

झारखंड राज्य के लोहरदगा जिला के कायरो प्रखंड से सुनीता देवी मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि बार बार मौसम के बदलने के कारण इसका प्रभाव खेती और किसानों पर पड़ता है ।इस वर्ष अधिक ठंड पड़ने के कारण मटर और आलू का फसल बर्बाद हो गया ।जिसके कारण किसानों को आर्थिक छती हुई ।अचानक गर्मी और ठंड के कारण किसानों को दोहरा मार झेलना पड़ता है ।जब बारिश ठीक से नहीं होती है तो किसान को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिलता है ।उनको अन्य तरीकों से पानी का व्यवस्था करना पड़ता है ।

झारखण्ड राज्य से डौली देवी ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन के कारण खेती पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।अनियमित वर्षा, भीषण गर्मी, बाढ़ और सूखे जैसी स्थितियों देखने को मिल रही है।फसलें समय से पहले पक रही हैं।इससे उत्पादन और गुणवत्ता में भारी कमी आ रही है।कीटों का प्रकोप,सिंचाई की समस्या,खाद्य सुरक्षा,इत्यादि का खतरा बढ़ गया है।

झारखण्ड राज्य के लोहरदगा जिला के भंडरा प्रखंड से पुष्पा ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि इन्होने मोबाइल वाणी पर बारिश के पानी बचाने के बारे में सुना और ये जानकारी इनको बहुत अच्छी लगी। भंडरा प्रखंड के कई किसानों ने खेतों में सरकार की मदद से छोटे - छोटे डोभा का निर्माण सिंचाई के लिए किया है।सरकार द्वारा डोभा निर्माण का पहल बहुत अच्छा और सराहनीय है।इससे किसानों की आमदनी बढ़ी है और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी हो रहे हैं। साथ ही गर्मी के मौसम में होने वाली पानी की किल्लत दूर हुई है। अब गर्मी में भी डोभा में पानी रहता है। जिससे पशुओं को लोग पानी पीला पाते हैं।बारिश के पानी को बचाने का पहल अन्य क्षेत्रों में भी होना चाहिए।