झारखण्ड राज्य से हमारे श्रोता मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहती हैं कि उनको एपिसोड -1 के माध्यम से लाह की खेती करने की जानकारी मिली।इस कार्यक्रम में विभिन्न तरीकों से लाह की खेती करने के बारे में बताया गया है।वह लाह की खेती पलास के पेड़ पर ही किया करती थीं,लेकिन उनको इस कार्यक्रम के माध्यम से यह पता चला कि सेमियालता पर लाह की खेती किया जा सकता है और इसमें उत्पादन बहुत अच्छी होती है।सेमियालता का उत्पादन करने से उर्वरक शक्ति भी बढ़ती है। एपिसोड 2 और 3 में मौसम के बारे में बताया गया है।वर्षा के कम या अधिक होने के कारण उत्पादन सही तरीके से नहीं हो पाता है।किसान और माता -पिता मौसम पर ही निर्भर रहते हैं। मौसम में परिवर्तन हो रहा है क्योंकि पर्यावरण पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं।लोग पेड़ों को काट भी रहे हैं और नया पौधा भी नहीं लगा रहे हैं।पेड़ों को काटने के कारण मौसम में परिवर्तन हो रहे हैं और लोग फसल का उत्पादन सही समय पर नहीं कर पा रहे हैं। उनको इस कार्यक्रम के माध्यम से पानी को बचाने के बारे में भी जानकारी मिली है।लोग इस कार्यक्रम में बताये गए बातों को उपयोग में लाएंगे तो उनको जरूर लाभ मिलेगा
झारखण्ड राज्य के खूँटी ज़िला के तोरपा प्रखंड से सुमित टोपनो मोबाइल वाणी के माध्यम से बताते है कि उन्हें कार्यक्रम से जानकारी और जागरूकता मिली कि पानी को बचा कर सुखाड़ से बचा जा सकता है। कार्यक्रम में जैसा बताया गया अगर उस तरीका को अपना कर खेती में लाभ होगा तो लोग ज़रूर इसे अपनाना चाहेंगे। इनके गाँव में एक नदी है जहाँ मिट्टी बहाव देखने को मिलता है क्योंकि वो नदी अपने पहले दिशा को छोड़ अब दूसरे दिशा की ओर बह रही है। उससे कही ज़्यादा मिटटी का कटाव हो रहा है। कई लोगों के खेत बर्बाद हो गए है। अधिक बारिश ,मिट्टी कटाव की समस्या का समाधान नहीं होने के कारण ये सब दिक्कतें देखने को मिल रही है। गाँव में गड्ढ़े तो नहीं कोड़े गए है लेकिन चेक डैम का निर्माण हुआ है। गर्मी के मौसम में पानी सूख जाता है। सूखा से बचने के लिए जो कार्यक्रम में बताया गया है वो बहुत अच्छा है जिससे लोगों के लिए यह उपाय लाभदायक हो सकती है। अगर गाँव में अनुमति मिलेगी तो वो बताए गए उपाय को गाँव में लाना चाहेंगे ताकि लोगों की समस्या का समाधान हो और उन्हें सुविधा मिल सके। सुमित कहते है कि वो अन्य लोगों के साथ भी सुखाड़ से बचने के उपाय साझा करेंगे। साथ ही कार्यक्रम के सारे किरदार ,समय ,आवाज़ अच्छे है। लेकिन अगर ऑडियो के बजाए वीडियो के माध्यम से कार्यक्रम में जानकारी दी जाए तो लोग अच्छे से और सरल तरीके से बातों को सीख पाएंगे।
झारखण्ड राज्य के खूंटी जिला के तोरपा प्रखंड के कोंडा गांव से सुमित टोपनो मोबाइल वाणी के माध्यम से यह बताना चाहते हैं कि कार्यक्रम "हाट बात " में लोगों से सम्बंधित बातें की गईं हैं। मौसम में अधिक परिवर्तन हो रहे हैं। कभी अधिक गर्मी और कभी अधिक बारिश हो जाता है जिसके कारण फसल बर्बाद हो रहे हैं। लेकिन लोगों को ज्यादा फर्क नहीं पड़ता है क्योंकि कई लोग बाहर जा कर काम करते हैं और सरकार के द्वारा भी उनको राशन दे दिया जाता है।इनको इस कार्यक्रम के माध्यम से यह सिखने के लिए मिला कि प्रखंड स्तर पर कॉन्फ्रेंस ऑफ़ पंचायत भी होती है। इनको लगता है कि इनके गांव में डेवलपमेंट के लिए कोई प्लान नहीं है और न ही कोई विकास हुआ है।गांव के लोगों को पता ही नहीं है कि अपनी समस्याओं को पंचायत में कैसे रखना है। इनको कार्यक्रम के माध्यम से पंचायत में समस्याओं को रखने की प्ररेणा मिली है और वह अब अपनी बातों को पंचायत में रखेंगे
झारखण्ड राज्य के खूँटी जिला के तोरपा प्रखंड से सुमित टोपनो ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि मोबाइल वाणी पर प्रसारित 'मौसम का बदलता मिज़ाज' कार्यक्रम का पहला एपिसोड एक बार में समझ नही आता है। मगर दोबारा सुनने पर अच्छी तरह समझ आता है।इस एपिसोड से इनको बहुत कुछ सीखने और जानने को मिला। एपिसोड में सेमियालता और लाह की खेती के बारे में विस्तृत जानकारियां दी गई है।सेमियालता का पौधा सात फीट ऊँचा होता है और इसे बढ़ने में एक से दो साल लगता है।समय के साथ जैसे-जैसे लाह का दाम बढ़ रहा है,इसकी खेती करना फायदे का सौदा हो सकता है।जब हम खुद लाह की खेती करेंगे तभी हम अपने दोस्तों और जानने वालों को इसके लाभ और खेती के बारे में बता पाएंगे।
झारखण्ड राज्य के लोहरदगा जिला के भंडरा प्रखंड से पुष्पा ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि इन्होने मोबाइल वाणी पर बारिश के पानी बचाने के बारे में सुना और ये जानकारी इनको बहुत अच्छी लगी। भंडरा प्रखंड के कई किसानों ने खेतों में सरकार की मदद से छोटे - छोटे डोभा का निर्माण सिंचाई के लिए किया है।सरकार द्वारा डोभा निर्माण का पहल बहुत अच्छा और सराहनीय है।इससे किसानों की आमदनी बढ़ी है और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी हो रहे हैं। साथ ही गर्मी के मौसम में होने वाली पानी की किल्लत दूर हुई है। अब गर्मी में भी डोभा में पानी रहता है। जिससे पशुओं को लोग पानी पीला पाते हैं।बारिश के पानी को बचाने का पहल अन्य क्षेत्रों में भी होना चाहिए।
झारखण्ड राज्य के रांची ज़िला से दिव्या मोबाइल वाणी के माध्यम से कहती है कि उन्हें कार्यक्रम सुन कर अच्छा लगा।वो कहती है कि लोगों को एकजुट हो कर अपने जमीन जंगल जल को बचाने का प्रयास करना चाहिए। इससे आने वाले भविष्य के लिए पर्यावरण सुरक्षित होगा।सभी युवाओं को आगे आना चाहिए और जल जंगल जमीन की समस्याओं और समाधान में विचार विमर्श करना चाहिए। युवाओं को एक प्लान भी बनाना चाहिए और तब तक प्रयास करते रहना चाहिए जब तक उनका प्लान जीपीडीपी में शामिल न हो जाए। यह कार्य को एकजुटता में ही करना चाहिए ताकि उनकी जीत हो सके
झारखण्ड राज्य के रांची से हमारी श्रोता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि इस कार्यक्रम को सुनने के बाद यह समझ आया कि एकजुटता से बहुत सारे बदलाव लाये जा सकते हैं। कई बार ऐसा होता है की किसी काम को करने के लिए जब हम अकेले जाते हैं, तो सुनवाई नहीं होती है। जीपीटीपी में भी वार्ड सदस्य और मुखिया खुद से लिख कर योजना तैयार करते थे। लेकिन अब ग्राम सभा में सभी शामिल होते हैं और तब जीपीटीपी में योजना चलाई जाती है। इसलिए हमें एकजुटता के साथ ही प्रयास करना चाहिए
झारखण्ड राज्य के रांची से श्रोता ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि इनको कार्यक्रम से यह समझ आया कि समस्याओं से भागना नहीं चाहिए बल्कि उसके समाधान के लिए प्रयास करना चाहिए। मुद्दा कुछ भी हो फसल या अन्य हमें उसका समाधान निकालना चाहिए। अपनी बातों को जीपीटीपी में भी रखना चाहिए। जिससे की हमारी बात वार्ड सदस्यों तक पहुंचे और समस्याओं का हल हो
झारखण्ड राज्य के रांची जिला से नरीता मुर्मु कहती हैं कि जलवायु परिवर्तन से कई तरह की समस्यायें हो रही हैं। इस सन्देश से यह सीख मिलती है कि इससे हमारे बच्चों के स्वास्थ्य पर असर पड़ रहा है। इसलिए हमें जल , जंगल , जमीन ,पेड़ बचाना चाहिए। स्वच्छ पानी पीना चाहिए। सभी को एकजुट हो कर समस्या का समाधान निकालना होगा और समुदाय में अपनी बातों को रखना होगा
झारखण्ड राज्य के रांची से संजय साह ने मोबाइल वाणी के माध्यम से बताया कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव बहुत तेजी से हो रहा है। इस संदेश से यह सीख मिलता है कि मौसम में हो रहे बदलाव के प्रति हमें एकजुटता दिखाना है। ताकि आने वाले पीढ़ी को बचा सकेंगे। हम जो भी प्रयास करते हैं वो गर सामूहिक रूप से किया गया तो बेहतर परिणाम की संभावना अधिक रहती है। हमें एक बार में हार नहीं मानना चाहिए। बार-बार प्रयास करते रहना चाहिए। अकेले जानें पर अक्सर हमारी बात नहीं सुनी जाती है। लेकिन सामूहिक तौर पर आसानी से बात राखी जा सकती है और जो भी योजना आती है, उसे भी समूह में जा कर बताना चाहिए
