एक महीने बाद आज से स्कूल कॉलेज कोचिंग धार्मिक स्थल मॉल सब खुलेंगे बिहार में कोरोना की संक्रमण दर में सुधार को देखते हुए राज्य सरकार ने प्रतिबंधों में बड़ी रियायत का ऐलान कर दिया है वहीं आज से सभी शिक्षण और प्रशिक्षण व कोचिंग संस्थान खोले जा सकेंगे छात्रावास व उनके कार्यालय 100% उपस्थिति के साथ संचालित होंगे अन्य शिक्षण प्रशिक्षण संस्थान भी शत-प्रतिशत उपस्थिति के साथ खुल सकेंगे अब नाइट कर्फ्यू भी खत्म कर दिया गया है हालांकि कोरोना के गाइडलाइन को देखते हुए इसे पालन करना सभी को अनिवार्य है वही दुकानें व प्रतिष्ठान सामान्य रूप से खुल सकेंगे पहले रात 8:00 बजे तक ही दुकानों को खोलने की अनुमति थी दुकानों व प्रतिष्ठानों में हमेशा मास्क पहनना अनिवार्य होगा सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा विवाह समारोह में 200 व्यक्ति शामिल हो सकेंगे लेकिन डीजे एवं बारात जुलूस की अनुमति नहीं होगी स्थानीय थाना को विवाह की सूचना 3 दिन पहले देनी होगी अंतिम संस्कार दफन एवं श्राद्ध में 200 व्यक्ति शामिल होंगे पहले यह क्षमता 50 थी सिनेमा हॉल में दर्शकों की कुल क्षमता के 50% के साथ संचालित होंगे रेस्टोरेंट्स एवं खाना की दुकान में बैठने की क्षमता के 50% उपयोग के साथ संचालित होगी क्लब जी एवं स्विमिंग पूल 50% उपस्थिति के साथ संचालित होंगे l
बिहार राज्य के मुंगेर जिला से अंकित चौधरी मोबाइल वाणी के माध्यम से कोरोना और जिंदगी कार्यक्रम के तहत कालीस्थान निवासी राजा यादव दूध विक्रेता से साक्षात्कार लिया है। जिसमें उन्होंने बताया कि वह लॉकडाउन से पहले दूध बेचा करते थे जिन्हें लॉकडाउन के दौरान बहुत दिक्कत हुई क्यूंकि बहुत लोग दूध कोरोना में दूध नहीं लिया करते थे और पैसे के अभाव में लोग सही से पैसे भी नहीं दिया करते जिस से घर खर्च चलने में कठिनाई होती है।
बिहार राज्य से मोबाइल वाणी के माध्यम से अवध ठाकुर के साथ राजकुमार बता रहें हैं की लॉक डाउन के समय आजीविका चलाना बहुत ही मुश्किल हो गया था दो वक़्त की रोटी जुटाने के लिए भी काफी समस्या हो रही थी कुछ भी रोज़गार करने पर पुलिस वाले उसे बंद करवा देते थें लेकिन अब धिरे धिरे जीवन पटरी पर लौट रही है और अब रोज़गार भी ठीक ठाक चल जा रहा है।
शहरों में ऑफिस दोबारा खोले जा रहे हैं लेकिन फिर भी यहां से जो छोटे—मोटे ठेले, पान की दुकानें गायब हुईं हैं वो अब भी खाली हैं. ट्रेनों में यात्रियों की भीड है पर इस भीड़ में चने—मूंगफली बेचने वाले नही हैं. क्या सोचा है आपने कि वे सब कहां गए? वे लोग जो गांव से निकलकर शहर आए थे और छोटा—मोटा रोजगार कर अपना और परिवार का पेट पाल रहे थे आखिर वे गए कहां? क्यों लॉकडाउन खुलने के बाद भी वे वापिस नहीं आए? आखिर क्या हुआ उनका? सरकार ने कोरोना राहत पैकेज के तहत स्वरोजगार करने वालों को बिना ब्याज के लोन सुविधा देने का एलान किया लेकिन फिर भी बहुत से लोग खुद को वापिस खड़ा नहीं कर पाए हैं? क्या ऐसा इसलिए है कि लोन लेने की स्थिति में नहीं हैं, क्योंकि उन पर पहले से ही कर्ज बहुत ज्यादा है? क्या अब शहरों में इन छोटे रोजगार करने वालों की जरूर खत्म हो गई है? क्या शहरों की होटलों, ढाबों या दूसरे छोटे संस्थानों में मजदूरों की मांग कम हो गई है? अगर ऐसा है तो यहां काम करने वाले पुराने मजदूर अब कहां हैं? वे कैसे अपना जीवन यापन कर रहे हैं? अगर आप ऐसे किन्ही मजदूरों के बारे में जानते हैं तो हमें उनकी स्थिति के बारे में जरूर बताएं. अपनी बात रिकॉर्ड करने के लिए फोन में अभी दबाएं नम्बर 3
साथियों, क्या आपने इस कोरोना काल के दौरान आपने शिक्षकों को तलाशने की कोशिश की? क्या आपने उनसे उनका हाल जाना? क्या आपके आसपास ऐसे लोग हैं जो पहले शिक्षक थे लेकिन कोविड काल में नौकरी जाने के बाद अब कोई दूसरा काम कर रहे हैं? क्या आपको नहीं लगता कि सरकार को शिक्षकों की आर्थिक स्थिति सुधारने पर ध्यान देने की जरूरत है? स्कूल बंद होने और शिक्षकों के ना रहने से आपके बच्चों की पढ़ाई पर कितना असर पड़ा है? अगर आप शिक्षक हैं, तो हमें बताएं कि कोविड काल के दौरान आपको किस तरह की परेशानियां आईं और क्या अब आपके हालात पहले जैसे हैं? अपनी बात हम तक पहुंचाने के लिए फोन में अभी दबाएं नम्बर 3.
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दोस्तों, शिक्षक का पद बहुत ही गरिमामय है, वे हमेशा अपने छात्रों को स्वाभिमानी बनने की शिक्षा देते हैं, सोचिए उनके लिए यह समय कितना विकराल रहा है? स्कूल बंद, कोचिंग बंद, नौकरी नहीं, तनख्वाह नहीं... हाथ खाली और वे बस बेबस! सरकार ने गरीबों को राशन दिया, अच्छी बात है पर एक शिक्षक का आत्मसम्मान तो उसे वहां तक भी नहीं पहुंचा सकता. सरकारी शिक्षकों के पास तो फिर भी तनख्वाह पहुंच रही थी लेकिन संविदा शिक्षक, निजी स्कूल में आॅनलाइन कक्षाएं ना ले पाने वाले शिक्षकों या फिर ऐसे शिक्षक जो छात्रों तक नहीं पहुंच पाए क्या उनके साथ सबकुछ ठीक रहा? अब जबकि हालात सामान्य की ओर हैं, तब भी स्कूलों से शिक्षक नदारद हैं. कुछ ने अपने लिए नए काम की तलाश कर ली है तो कुछ रोजगार की तलाश में हैं. साथियों, हम आपसे जानना चाहते हैं... कि क्या आपने इस कोरोना काल के दौरान आपने शिक्षकों को तलाशने की कोशिश की? क्या आपने उनसे उनका हाल जाना? क्या आपके आसपास ऐसे लोग हैं जो पहले शिक्षक थे लेकिन कोविड काल में नौकरी जाने के बाद अब कोई दूसरा काम कर रहे हैं? क्या आपको नहीं लगता कि सरकार को शिक्षकों की आर्थिक स्थिति सुधारने पर ध्यान देने की जरूरत है? स्कूल बंद होने और शिक्षकों के ना रहने से आपके बच्चों की पढ़ाई पर कितना असर पड़ा है? अगर आप शिक्षक हैं, तो हमें बताएं कि कोविड काल के दौरान आपको किस तरह की परेशानियां आईं और क्या अब आपके हालात पहले जैसे हैं? अपनी बात हम तक पहुंचाने के लिए फोन में अभी दबाएं नम्बर 3.
दोस्तों, लॉकडाउन के अकेलेपन को हम सबने झेला है पर खतरा अभी टला नहीं है और हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वैज्ञानिक कोरोना की तीसरी लहर आने का अंदेशा जता चुके हैं. ऐसे में क्या इस तरह की लापरवाही ठीक है? हमें बताएं कि आखिर क्यों सार्वजनिक स्थलों पर इतनी ज्यादा आवाजाही हो रही है? क्या स्थानीय प्रबंधन इसे रोकने के लिए कोई प्रयास कर रहा है? क्या केवल चालान काटने और जुर्माना लगा देने भर से कोरोना के प्रति बरती जा रही लापरवाही को रोका जा सकता है या फिर इसके लिए आम लोगों का जागरूक होना ज्यादा जरूरी है? अपनी बात हम तक पहुंचाने के लिए फोन में अभी दबाएं नम्बर 3.
नमस्कार दोस्तों, पहले कोरोना आया और फिर साथ में लेकर आया लॉकडाउन, जिसने देश में हर गतिविधि को रोक दिया. जिनके घर राशन से भरे थे वे इस वक्त को गुजारते चले गए और जो हर दिन की कमाई पर निर्भर थे वे सरकारी राशन, आम लोगों की दया के भरोसे वक्त गुजारते रहे. अब अनलॉक हो चुका है, प्रवासी मजदूरों को यकीन था कि वे फिर से शहर लौटेंगे और सब ठीक हो जाएगा... पर क्या वाकई ऐसा हुआ है?दोस्तों, हम आपसे जानना चाहते हैं कि क्या आप भी इस संकट का सामना कर रहे हैं? क्या आपको भी रोजगार की तलाश करने में परेशानी हो रही है? कंपनी मालिक क्या कह कर काम देने से इंकार कर रहे हैं? क्या कारखानों में काम देने के पहले वैक्सीन लगवाना अनिवार्य कर दिया गया है? अगर आप अब तक कोरोना की वैक्सीन नहीं ले पाएं हैं तो इसका क्या कारण है? क्या वापिस गांव लौटने पर आपको काम मिलने की उम्मीद है? अगर आपको पहले की तरह रोजगार नहीं मिल रहा है, तो परिवार का भरण पोषण कैसे कर रहे हैं? अपनी बात हम तक पहुंचाने के लिए फोन में अभी दबाएं नम्बर 3.
संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों की एक नई रिपोर्ट कह रही है कि दुनियाभर में बाल मजदूरों की संख्या में 16 करोड़ नए बच्चों ने इजाफा किया है. यह बीते 4 दशक की सबसे बड़ी बढोत्तरी है. इसके पीछे दो कारण है. पहला, परिवार की आर्थिक स्थितियां खराब हो गईं हैं इसलिए अब परिवार का हर सदस्य अपनी क्षमता के हिसाब से काम की तलाश कर रहा है और दूसरा, स्कूल बंद हैं. और भला...मजदूर के आंगन में खेलता हुआ बच्चा कब किसे अच्छा लगा है.... सो उसे भी काम की आग में झोंका जा रहा है. दिल्ली, मुंबई, सूरत, अहमदाबाद समेत कई महानगरों में बाल श्रमिकों की संख्या तेजी से बढ़ी है. जो चिंता का विषय होना चाहिए.दोस्तों --बाल मज़दूरी के बारे में आप क्या सोचते है ? -- आखिर क्यों हमें बाल मज़दूरी समाप्त करनी चाहिए ? -- आपके हिसाब से बाल मज़दूरी कारण है ? इस बारे में अपने विचार और अनुभव बताने के लिए अभी दबाएँ अपने फोन में नं 3 और रिकॉर्ड करें अपनी बात
